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सूरत में एलपीजी टैंकर से सीधे सिलेंडरों में गैस चोरी का भंडाफोड़, पुलिस ने नौ लोगों को पकड़ाअपराध
20 सित॰ 2026, 8:29 pm (38 दिन पहले)· 2

सूरत में एलपीजी टैंकर से सीधे सिलेंडरों में गैस चोरी का भंडाफोड़, पुलिस ने नौ लोगों को पकड़ा

सूरत में पार्किंग प्लॉट के अंदर टैंकर से सिलेंडरों में अवैध गैस भरने वाले गिरोह को पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया, जहां से 88 सिलेंडर और उपकरण जब्त किए गए हैं।

गुजरात के सूरत शहर में रसोई गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। भेसान और हजीरा को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित एक पार्किंग परिसर के भीतर टैंकर से सीधे घरेलू सिलेंडरों में गैस स्थानांतरित की जा रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम ने घेराबंदी करके मौके पर दबिश दी और इस खतरनाक गतिविधि में लगे नौ व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। इस ठिकाने से सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए भरी गई गैस की बड़ी खेप पकड़ी गई है।

छापेमारी के दौरान बरामदगी का ब्योरा

जांच दल जब पार्किंग परिसर में दाखिल हुआ, तब वहां एक बड़ा एलपीजी टैंकर खड़ा मिला जिससे पाइप जोड़कर कतार में रखे सिलेंडरों को भरा जा रहा था। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल की तलाशी लेते हुए कुल 84 ऐसे सिलेंडर जब्त किए जिनमें अवैध रूप से गैस भरी जा चुकी थी। इसके अतिरिक्त परिसर से चार खाली सिलेंडर और गैस ट्रांसफर करने के काम में लाई जा रही तीन विशेष पाइपें भी कब्जे में ली गईं। भीड़भाड़ वाले इलाके के पास बिना किसी अग्निशमन या सुरक्षा इंतजाम के यह काम खुलेआम चल रहा था।

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सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत और किराये का खेल

प्राथमिक जांच और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार का मुख्य कर्ताधर्ता पवन सिंह गुज्जर नाम का व्यक्ति है। पवन सिंह ने इस गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए महेश जांजवडिया से संपर्क साधा था, जो उसी पार्किंग स्थल पर सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता था। महेश ने जमीन के वास्तविक मालिक को बिना कोई भनक लगे परिसर का एक हिस्सा पवन सिंह को 12 हजार रुपये प्रतिमाह के किराये पर दे दिया। जगह हाथ में आने के बाद पवन ने गैस भरने और सिलेंडरों की ढुलाई संभालने के लिए अन्य सहायकों को दिहाड़ी और कमीशन पर तैनात कर लिया।

गेल का टैंकर और पकड़े गए आरोपियों की पहचान

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लक्ष्मण सिंह रावत सरकारी कंपनी गेल से जुड़ा एलपीजी टैंकर चलाकर उस सुनसान पार्किंग में लाया था। टैंकर के रुकते ही पवन सिंह के साथी पाइपों के जरिए गैस निकालकर सिलेंडरों में भरने के काम में जुट जाते थे। मौके से पकड़े गए सभी नौ लोगों का विवरण पुलिस ने साझा किया है। इनमें 26 वर्षीय मुख्य आरोपी पवन सिंह गुज्जर, 35 वर्षीय सुरेश बोरीवाला, 35 वर्षीय सुरक्षा गार्ड महेश जांजवडिया, 26 वर्षीय पंकज सिंह ठाकुर, 28 वर्षीय देवा सिंह, 28 वर्षीय सुभाष सिंह राजपूत, 24 वर्षीय विशाल भाभोर, 26 वर्षीय दीपक भाभोर और 53 वर्षीय टैंकर चालक लक्ष्मण सिंह रावत शामिल हैं।

सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा और आगे की जांच

पुलिस प्रशासन ने पकड़े गए सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति एवं वितरण विनियमन आदेश की सुसंगत धाराओं को भी मुकदमे में जोड़ा गया है। डीसीपी शैफाली बरवाल ने बताया कि अधिकारियों को इस ठिकाने पर चल रही संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सटीक खुफिया जानकारी मिली थी, जिस पर तुरंत कार्रवाई की गई। जांच अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि अवैध रूप से भरे गए इन सिलेंडरों की आपूर्ति किन होटलों, कारखानों या स्थानीय बाजारों में की जानी थी और इस सिंडिकेट के तार किन अन्य लोगों से जुड़े हैं।

सवाल-जवाब

सूरत में पुलिस ने किस जगह पर गैस रिफिलिंग का भंडाफोड़ किया?
पुलिस ने भेसान-हजीरा रोड पर स्थित एक पार्किंग परिसर में छापेमारी करके इस अवैध गैस रिफिलिंग रैकेट को पकड़ा।
मौके से कितने सिलेंडर और उपकरण बरामद किए गए?
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 84 गैस से भरे सिलेंडर, चार खाली सिलेंडर, तीन रिफिलिंग पाइप और एक एलपीजी टैंकर बरामद किया।
इस अवैध कारोबार का मुख्य संचालक कौन था?
इस पूरे मामले का मुख्य सरगना पवन सिंह गुज्जर है, जिसने सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत से पार्किंग में यह काम शुरू किया था।
पार्किंग की जगह कितने किराये पर ली गई थी?
पवन सिंह ने परिसर के गार्ड महेश जांजवडिया से 12 हजार रुपये महीने के किराये पर यह जगह ली थी।
गैस का टैंकर किस कंपनी से जुड़ा हुआ था?
जांच के अनुसार यह एलपीजी गैस टैंकर गेल कंपनी से जुड़ा था, जिसे चालक लक्ष्मण सिंह रावत वहां लेकर आया था।
आरोपियों पर किन कानूनों के तहत केस दर्ज किया गया है?
सभी नौ आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी विनियमन आदेश के तहत मामला दर्ज हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·37 दिन पहले

सूरत की यह घटना दर्शाती है कि एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला में कितनी गंभीर सुरक्षा और निगरानी संबंधी खामियां हैं। सार्वजनिक उपक्रम गेल के टैंकर का इस अवैध कृत्य में उपयोग होना और पार्किंग स्थल जैसे घनी आबादी या व्यावसायिक क्षेत्रों के करीब बिना सुरक्षा मानकों के गैस चोरी होना, न केवल अर्थव्यवस्था को चूना लगा रहा है बल्कि भारी जनहानि का जोखिम भी पैदा कर रहा है। ऐसे मामलों में आपूर्ति अनुबंधों की कड़ी समीक्षा और आपूर्ति मार्गों पर डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य होनी चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·37 दिन पहले

सूरत में एलपीजी टैंकर से अवैध गैस चोरी का यह मामला आपूर्ति श्रृंखला की गंभीर सुरक्षा और निगरानी विफलताओं को उजागर करता है। गेल के टैंकर से इस तरह ईंधन की चोरी से न केवल सरकारी राजस्व और कंपनी की साख को नुकसान पहुंचता है, बल्कि बिना सुरक्षा मानकों के घनी आबादी के पास ऐसे कारनामे बड़े औद्योगिक हादसे को न्योता देते हैं। प्रशासन को आपूर्ति मार्गों पर डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त ऑडिट प्रणाली लागू करनी होगी ताकि ऐसे संगठित अपराधों पर लगाम लग सके।

Riya Menon@riya-menon·37 दिन पहले

रिया मेनन के रूप में मेरा मानना है कि एलपीजी की ऐसी अवैध हेराफेरी से घरेलू रसोई तक पहुंचने वाले ईंधन की शुद्धता और वजन पर गंभीर असर पड़ता है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ धोखा होता है। इस तरह के मामलों से खाद्य और आतिथ्य उद्योग पर भी असर पड़ता है क्योंकि सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से रसोई का प्रबंधन चरमरा जाता है। आपूर्ति श्रृंखला में इस प्रकार की सेंधमारी से बचने के लिए पारदर्शी निगरानी और कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि रसोईघरों तक सुरक्षित ईंधन पहुंचे।

Rohan Verma@rohan-verma·37 दिन पहले

सूरत की यह घटना दर्शाती है कि औद्योगिक क्षेत्रों में एलपीजी परिवहन के दौरान निगरानी कितनी कमजोर है। गेल के टैंकर का इस तरह अवैध रूप से गैस चोरी में इस्तेमाल होना आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी सेंध और गंभीर सुरक्षा चूक को उजागर करता है। यदि समय पर कार्रवाई न होती, तो घनी आबादी के पास यह लापरवाही किसी बड़ी तबाही का कारण बन सकती थी। जांच एजेंसियों को अब यह भी खंगालना होगा कि क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या जिलों से भी जुड़े हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·37 दिन पहले

यह मामला केवल कालाबाजारी का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे का है। गेल के टैंकर चालक की संलिप्तता यह साबित करती है कि संगठित अपराधी परिवहन और आपूर्ति तंत्र के भीतर तक सेंध लगा चुके हैं। भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यह देखना अहम होगा कि पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क और मास्टरमाइंड तक कितनी गहराई से पहुँच पाती है।

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