राजधानी दिल्ली की एक अदालत में पत्नी की हत्या से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया गया है। प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग ने इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए मृतका रश्मि उर्फ रेशमा के पति अमन को उसकी हत्या का दोषी करार दिया है। इस न्यायिक फैसले में हालांकि आरोपी पक्ष को बड़ी राहत भी मिली है, क्योंकि अदालत ने अमन और उसकी मां संगीता को दहेज हत्या और क्रूरता के गंभीर आरोपों से मुक्त कर दिया है। न्यायाधीश के अनुसार, अभियोजन पक्ष इस बात के पुख्ता और ठोस प्रमाण पेश करने में विफल रहा जिससे यह साबित हो सके कि मृतका को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
वैवाहिक विवाद और हत्या की घटना का विवरण
अदालत के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों और बयानों के मुताबिक, रश्मि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में अपनी मां और अपनी छोटी बच्ची के साथ एक किराये के मकान में रहती थी। इस दौरान वह अपने पति अमन से अलग जीवन बिता रही थी। गत 25 फरवरी 2025 को अमन अपनी पत्नी से मिलने उसी किराये के कमरे पर पहुंचा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया। इसी हंगामे के दौरान अमन ने गुस्से में आकर रश्मि की ही चुन्नी से उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अपनी मासूम बेटी को साथ लेकर सीधे पुलिस थाने जा पहुंचा था।
परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
इस पूरे मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं था, जिसके चलते पुलिस और अभियोजन पक्ष को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर निर्भर रहना पड़ा। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में इस बात का विशेष उल्लेख किया कि यद्यपि चश्मदीद गवाह का अभाव था, लेकिन पुलिस द्वारा जुटाए गए कड़ियों और साक्ष्यों ने अपराध की पुष्टि कर दी। इसके अलावा, मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि रश्मि की मौत दम घुटने यानी गला कसे जाने के कारण हुई थी। रिपोर्ट में दर्ज चिकित्सीय राय के अनुसार, गले पर आई चोटें इतनी गंभीर थीं कि सामान्य परिस्थितियों में वे किसी भी व्यक्ति की जान लेने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त थीं। इन्हीं पुख्ता वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर अदालत ने पति अमन को हत्या का दोषी मान लिया।
दहेज के आरोपों पर अदालत का फैसला
शुरुआती जांच और परिवार के बयानों के आधार पर अमन तथा उसकी मां संगीता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत दहेज हत्या और प्रताड़ना के मामले दर्ज किए गए थे। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अमन और उसके परिवार द्वारा एक मोटरसाइकिल और डेढ़ लाख रुपये नकद लाने की मांग को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता था। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान इन आरोपों का गहराई से विश्लेषण किया। न्यायाधीश ने पाया कि गवाहों द्वारा दिए गए बयान बेहद सामान्य प्रकृति के थे और उनके समर्थन में किसी भी प्रकार का विशिष्ट विवरण या मजबूत कानूनी पुष्टि रिकॉर्ड पर पेश नहीं की जा सकी।
शक के दायरे में रिश्ते और आगे की राहत
अदालत ने अपने आदेश में इस संभावना पर भी विचार किया कि आपसी मनमुटाव और शक की सुई किसी और दिशा में भी इशारा कर रही थी। न्यायिक समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि अमन के मन में रश्मि के चरित्र को लेकर गहरा शक घर कर चुका था, और यही वैवाहिक कलह का मुख्य कारण बना हुआ था। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि इस बात से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता कि रश्मि की दुखद मृत्यु के पश्चात ही दहेज प्रताड़ना से जुड़े ये आरोप गढ़े गए हों। इन्हीं सब कानूनी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दहेज हत्या तथा क्रूरता के आरोपों में अमन और संगीता को पूर्ण राहत देते हुए बरी कर दिया, जबकि हत्या के जुर्म में अमन की सजा तय कर दी गई है।




















