दैनिक राशिफल 30 जुलाई 2026: मेष से लेकर मीन तक, जानें किस राशि के खुलेंगे किस्मत के द्वारकैटरीना कैफ और सलमान खान की जोड़ी का अनोखा रिकॉर्ड, साथ काम की 7 फिल्मों में एक भी नहीं रही फ्लॉपविदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मन राजदूत फ़िलिप एकरमैन से की विदाई मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी की सराहना कीमेम्फिस क्लासिक में भीषण गर्मी बनी आफत, कोर्ट पर गिर गईं एकैटरीना अलेक्जेंड्रोवा; उधर वीनस विलियम्स भी हारकर बाहरमघा नक्षत्र में दिसंबर तक विराजमान रहेंगे केतु, इन 3 राशियों को मिलेगा धन लाभ और सफलतामहाराष्ट्र में एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक पर बवाल, रोहित पवार ने सीबीआई जांच की मांग उठाईइंकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की 31 जुलाई डेडलाइन: 10 आसान स्टेप्स में समझें ऑनलाइन ITR फाइलिंग की पूरी प्रक्रियालॉक अप सीजन 2 के 27वें एपिसोड में श्रेया कालरा का छलका दर्द, टास्क के दौरान 13 साल पुराना गहरा राज आया सामनेभोजपुरी बवाल के नए प्रोमो में बोटॉक्स पर बातचीत, आम्रपाली दुबे और रानी चटर्जी की मस्ती वायरलहिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में 3% से ज्यादा का उछाल, पहली तिमाही के नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने दिया खरीदारी का लक्ष्य
जमशेदपुर से पद्म श्री तक: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधिका वसुंधरा कोमकली की प्रेरणादायक जीवन यात्राकल्चर
29 जुल॰ 2026, 4:26 am (11 घंटे पहले)· 1

जमशेदपुर से पद्म श्री तक: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधिका वसुंधरा कोमकली की प्रेरणादायक जीवन यात्रा

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की नामचीन गायिका वसुंधरा कोमकली ने अपनी सुरमई साधना से भारतीय संगीत जगत में एक विशिष्ट छाप छोड़ी। ऑल इंडिया रेडियो से लेकर देश-विदेश के बड़े मंचों तक और पद्म श्री सम्मान तक फैली उनकी जीवन यात्रा सादगी, लगन और कलात्मक समर्पण की मिसाल है।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के समृद्ध इतिहास में कुछ विभूतियों का योगदान महज उनकी प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनका संपूर्ण जीवन कला की निश्छल साधना बन जाता है। वसुंधरा कोमकली, जिन्हें संगीत प्रेमी और प्रशंसक आदर से वसुंधरा ताई कहकर पुकारते थे, शास्त्रीय गायन की एक ऐसी ही अमूल्य धरोहर थीं। अपनी सुरीली आवाज, सुरों की सहज समझ और असाधारण समर्पण के बल पर उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पटल पर अपनी एक स्वतंत्र और दैदीप्यमान पहचान बनाई। हालांकि उन्हें अक्सर प्रख्यात संगीत मनीषी कुमार गंधर्व की संगिनी के रूप में स्मरण किया जाता है, लेकिन वसुंधरा ताई की अपनी सांगीतिक प्रतिभा इतनी समृद्ध और प्रभावशाली थी कि उन्होंने भारतीय संगीत परंपरा में अपना एक खास मुकाम हासिल किया।

कोलकाता के संगीत सम्मेलन से जागा जुनून

वसुंधरा कोमकली का जन्म 23 मई 1931 को वर्तमान झारखंड के जमशेदपुर शहर में हुआ था। बाल्यावस्था से ही उनके भीतर संगीत के प्रति गहरा रुझान देखने को मिलने लगा था। जब वह केवल 12 वर्ष की थीं, तब उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके भविष्य की दिशा तय कर दी। कोलकाता में आयोजित एक बड़े संगीत सम्मेलन के दौरान उन्होंने पहली बार युवा शास्त्रीय गायक कुमार गंधर्व का गायन सुना। कुमार गंधर्व की गायकी में मौजूद नवीनता और सुरों के प्रवाह ने 12 वर्षीय वसुंधरा के बाल मन पर अमिट छाप छोड़ी।

ये भी पढ़ें

उस अविस्मरणीय प्रस्तुति को सुनने के पश्चात वसुंधरा ने संकल्प लिया कि वे शास्त्रीय संगीत को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी और कुमार गंधर्व से ही संगीत की बारीकियां सीखेंगी। हालांकि, उस समय पारिवारिक और व्यावहारिक परिस्थितियों के कारण उनका तुरंत मुंबई जाकर कुमार गंधर्व से तालीम लेना संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं हटाए। उन्होंने कोलकाता में ही रहकर अपने रियाज को जारी रखा और शास्त्रीय गायन का निरंतर अभ्यास किया। कम उम्र में ही उनकी गायकी की मधुरता और लयबद्धता के कारण उन्हें ऑल इंडिया रेडियो से जुड़ने का अवसर मिला, जहां से उनकी प्रतिभा की गूंज संगीत प्रेमियों तक पहुंचने लगी।

मुंबई का सफर और उस्तादों की शागिर्दी

संगीत साधना के प्रति वसुंधरा ताई का दृढ़ निश्चय उन्हें आखिरकार साल 1946 में मुंबई ले आया। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध संगीत विज्ञानी और गुरु प्रोफेसर बी.आर. देवधर से शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ग्रहण करना प्रारंभ किया। प्रोफेसर बी.आर. देवधर के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने गायन की नींव को बेहद मजबूत बनाया। इसके साथ ही उन्हें अपने स्वप्न गुरु कुमार गंधर्व से भी शास्त्रीय गायन की सूक्ष्मताओं और प्रयोगधर्मी शैलियों को सीखने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

कुमार गंधर्व के सानिध्य में कई वर्षों तक संगीत का गहन अध्ययन करने, साथ में रियाज करने और भारतीय संगीत के विभिन्न आयामों को तलाशने के बाद, दोनों कलाकारों के बीच एक अटूट कलात्मक और आत्मीय संबंध बन गया। लंबी सांगीतिक सहयात्रा के पश्चात साल 1962 में वसुंधरा ताई और कुमार गंधर्व विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि दो महान संगीत साधकों की कलात्मक आत्माओं का एकाकार होना था।

तानपुरा साधक से स्वतंत्र मंच कलाकार तक

विवाह के उपरांत भी वसुंधरा ताई ने अपनी संगीत यात्रा को नए शिखर प्रदान किए। कुमार गंधर्व के साथ मंच साझा करते हुए उन्होंने दशकों तक देश और दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। अपने सांगीतिक सफर के शुरुआती दौर में वह मंच पर कुमार गंधर्व के साथ बैठकर तानपुरा संभालती थीं और मुख्य गायन में सुरों का तालमेल बिठाते हुए वोकल सपोर्ट देती थीं। लेकिन समय के साथ उनकी छिपी हुई अद्वितीय प्रतिभा पूर्ण रूप से मुखरित होकर सामने आई।

वसुंधरा ताई ने स्वयं को केवल तानपुरा साधक या सहयोगी गायिका तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ख्याल गायकी के पारंपरिक स्वरूप में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। इसके अतिरिक्त उन्होंने निर्गुणी भजन, लोकगीत और पारंपरिक रचनाओं को एक ऐसी भावपूर्ण शैली में पिरोया, जो सीधे श्रोताओं के हृदय में उतर जाती थी। उनकी गायकी में एक तरफ जहां परंपरा के प्रति अगाध आदर था, वहीं दूसरी तरफ सुरों के साथ नए प्रयोगों का सुंदर सामंजस्य भी दिखता था। धीरे-धीरे वह शास्त्रीय संगीत जगत में एक प्रमुख सोलो गायिका के रूप में स्थापित हो गईं।

राष्ट्रीय सम्मान, देवास में निधन और संगीतमय विरासत

भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय संगीत में वसुंधरा कोमकली के अप्रतिम योगदान को रेखांकित करते हुए भारत सरकार ने साल 2006 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से अलंकृत किया। इसके अलावा उन्हें भारतीय संगीत के प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो कला के क्षेत्र में उनकी जीवनभर की तपस्या का प्रमाण था।

अपने जीवन के अंतिम वर्ष वसुंधरा ताई ने मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर देवास स्थित अपने निवास स्थान पर बिताए। 29 जुलाई 2015 को 84 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकने) के कारण देवास स्थित अपने घर में उनका निधन हो गया। यद्यपि वसुंधरा ताई आज भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी सांगीतिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है। उनकी सुपुत्री कलापिनी कोमकली भी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक अत्यंत लोकप्रिय और स्थापित गायिका हैं, जो अपनी मां और पिता द्वारा स्थापित शास्त्रीय परंपरा और घराने की गायकी को निष्ठापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं।

सवाल-जवाब

वसुंधरा कोमकली कौन थीं?
वसुंधरा कोमकली, जिन्हें प्यार से वसुंधरा ताई कहा जाता था, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक प्रसिद्ध गायिका थीं, जिन्होंने ख्याल गायकी, भजनों और लोकगीतों में अतुलनीय योगदान दिया।
वसुंधरा कोमकली का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 23 मई 1931 को जमशेदपुर, झारखंड में हुआ था।
उनकी मुलाकात कुमार गंधर्व से कब और कैसे हुई?
12 वर्ष की आयु में उन्होंने कोलकाता के एक संगीत सम्मेलन में कुमार गंधर्व का गायन सुना, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखने और उनसे तालीम लेने का निश्चय किया।
वसुंधरा कोमकली ने मुंबई में किससे संगीत की शिक्षा ली?
वह 1946 में मुंबई पहुंचीं और प्रोफेसर बी.आर. देवधर से संगीत सीखा, जिसके बाद उन्होंने कुमार गंधर्व से भी गायकी की बारीकियां सीखीं।
वसुंधरा कोमकली को कौन से प्रमुख राष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
उन्हें 2006 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से अलंकृत किया गया और इसके अतिरिक्त संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
वसुंधरा कोमकली का निधन कब हुआ और उनकी सांगीतिक परंपरा कौन आगे बढ़ा रहा है?
उनका निधन 29 जुलाई 2015 को देवास, मध्य प्रदेश में कार्डियक अरेस्ट से हुआ। उनकी सुपुत्री कलापिनी कोमकली, जो खुद एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका हैं, इस संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR