देश की राजधानी में सड़कों पर निगरानी रख रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नियम तोड़ने वालों को पकड़ने में पूरी मुस्तैदी दिखा रहे हैं, लेकिन उनसे होने वाली जुर्माना वसूली बेहद निराशाजनक स्थिति में पहुंच चुकी है। साल 2026 के पहले नौ महीनों में शहर की सड़कों पर लगे 404 स्वचालित निगरानी कैमरों ने प्रति मिनट लगभग 10 चालान काटे हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक नोटिसों में से तकरीबन आधे मामले तय सीमा से ज्यादा गति में वाहन चलाने से जुड़े हैं। तकनीकी निगरानी के जरिए रफ्तार के शौकीनों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है, मगर इसका दूसरा पहलू यह है कि नोटिस मिलने के बाद वाहन चालक सरकारी खजाने में जुर्माना जमा करने को लेकर बिल्कुल गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 2021 से सितंबर 2026 के बीच जारी हुए कुल नोटिसों में से करीब 79 प्रतिशत का भुगतान लोगों ने नहीं किया है। चालू वर्ष में कैमरों से लाखों नोटिस भेजे जाने के बावजूद हकीकत यह है कि पांच प्रतिशत से भी कम पर वसूली दर्ज हो सकी है।
चालान जारी होने की रफ्तार छह साल के शिखर पर
सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को संभालने के मोर्चे पर साल 2026 के दौरान पिछले छह वर्षों में सबसे तेज गति से कार्रवाई दर्ज की गई है। इस वर्ष 30 सितंबर तक यातायात कर्मियों ने सड़क पर सीधे तैनात रहकर 30.8 लाख चालान काटे। दूसरी तरफ स्वचालित कैमरों के नेटवर्क ने 40.6 लाख अलग से नोटिस जारी कर दिए। मैदानी अमले और कैमरों की इस संयुक्त कार्रवाई से कुल चालान का आंकड़ा 71.4 लाख तक जा पहुंचा है। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि शहर भर में चौबीसों घंटे औसतन प्रति मिनट 18 चालान जारी किए जा रहे हैं। चौराहों और मुख्य मार्गों पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के साथ डिजिटल निगरानी का दायरा इतना सख्त है कि नियमों की अनदेखी करने वाले बच नहीं पा रहे हैं, लेकिन इसके उलट जुर्माना जमा कराने की प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतरी दिखाई देती है।
ओवरस्पीडिंग और गलत पार्किंग पर सबसे ज्यादा कार्रवाई
सड़क पर नियमों का उल्लंघन दर्ज करने में ऑटोमैटिक कैमरे सबसे ज्यादा सक्रिय ओवरस्पीडिंग पकड़ने में रहे हैं। तेज गति से गाड़ी दौड़ाने वालों की धरपकड़ का दारोमदार लगभग पूरी तरह इन स्वचालित कैमरों की कार्यप्रणाली पर ही टिका हुआ है। गति सीमा तोड़ने के बाद कैमरों के निशाने पर सबसे अधिक वह लोग आए जिन्होंने वाहनों को गलत तरीके से खड़ा किया। चालू वर्ष 2026 में अनुचित पार्किंग के लिए अब तक लगभग 5.5 लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं। दोपहिया चालकों द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भी कैमरों ने सख्त रुख अपनाया है। बिना हेलमेट सफर करने के मामले में जहां 2021 के भीतर 1.8 लाख नोटिस बने थे, वहीं इस वर्ष सितंबर तक यह संख्या बढ़कर 5.9 लाख के स्तर पर पहुंच गई है।
बीते वर्षों में डिजिटल नोटिसों की संख्या में आया बदलाव
सालाना रुझान पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में कैमरों के जरिए काटे जाने वाले कुल नोटिसों की संख्या में एक क्रमिक गिरावट भी देखी गई है। वर्ष 2021 के दौरान इन निगरानी कैमरों ने करीब 66 लाख नोटिस जारी किए थे। यह आंकड़ा 2022 में घटकर 59.9 लाख रह गया और 2023 में और कम होकर 56.7 लाख दर्ज किया गया। इसके बाद 2024 में 51.8 लाख तथा 2025 में 51.6 लाख चालान कैमरों के खाते में दर्ज हुए। मौजूदा वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में यह संख्या 40.6 लाख तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही चौराहों पर लाल बत्ती की अनदेखी रोकने के लिए सख्ती बरकरार रखी गई है। चालू वर्ष में अब तक 1.9 लाख चालकों ने रेड लाइट का नियम तोड़ा है, जबकि जेब्रा क्रॉसिंग और स्टॉप लाइन का उल्लंघन करने वालों को भी कैमरे लगातार नोटिस थमा रहे हैं।
शराब पीकर गाड़ी चलाने और कागजातों की कमी पर कड़ा रुख
सड़क पर दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले चालकों के खिलाफ भी सख्त रवैया अपनाया गया है। शराब के नशे में वाहन चलाने पर होने वाली कार्रवाई के आंकड़ों में भारी उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2021 में शराब पीकर गाड़ी चलाने के सिर्फ 2800 चालान किए गए थे, लेकिन 2025 में यह संख्या बढ़कर 25,600 तक पहुंच गई। चालू वर्ष के सितंबर महीने तक इस मद में 16,900 चालान दर्ज हो चुके हैं। जानलेवा तरीके से गाड़ी चलाने यानी खतरनाक ड्राइविंग के आरोप में इस साल अब तक 20,700 चालान काटे गए। वहीं सीट बेल्ट न लगाने के अपराध में 33,600 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई। वैध दस्तावेजों के बिना गाड़ी लेकर निकलने वालों की तादाद भी काफी बड़ी है। इस वर्ष बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के चलने वाले करीब 4.1 लाख चालकों को पकड़ा गया, जबकि बिना ड्राइविंग लाइसेंस गाड़ी चलाने के आरोप में 3.6 लाख चालान जारी किए गए।
जुर्माना भरने में चालकों की उदासीनता और जब्ती की कार्रवाई
स्वचालित प्रणाली से भेजे जाने वाले चालानों पर जुर्माना न मिलने का गिरता स्तर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। साल 2021 से 2026 के पूरे दौर में कैमरों ने तकरीबन 3.26 करोड़ नोटिस जारी किए, लेकिन इनमें से महज 67 लाख लोगों ने ही जुर्माने का भुगतान करने की जिम्मेदारी निभाई। इस तरह लगभग 2.59 करोड़ नोटिसों का पैसा आज भी अटका हुआ है। वर्ष 2021 में करीब 26 प्रतिशत चालकों ने नोटिस मिलने पर जुर्माना भरा था, जबकि 2026 में वसूली की यह दर गिरकर पांच प्रतिशत से भी नीचे सिमट गई है। इस साल सितंबर तक जारी हुए 40.6 लाख नोटिसों में से केवल 2 लाख का ही निपटारा हो सका है। नियमों की लगातार अनदेखी और बेहद गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए अधिकारियों ने 21,800 वाहनों को जब्त करने का कदम भी उठाया है।





















