देश की राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीसरे रनवे 11R/29L पर व्यापक स्तर पर चला नवीनीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है। करीब सत्रह वर्षों के लंबे इस्तेमाल के बाद कराए गए इस बड़े अपग्रेड के पश्चात यह रनवे 20 सितंबर 2026 से फिर से नियमित परिचालन में लौट रहा है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने इस पूरे पुनरुद्धार कार्य के विधिवत समाप्त होने और रनवे को दोबारा सक्रिय करने के लिए आवश्यक सभी वैधानिक व विनियामक अनुमतियां मिलने की पुष्टि की है।
फरवरी से चल रहा था सघन आधुनिकीकरण का काम
इस तीसरे रनवे के कायाकल्प की योजना पर काम फरवरी 2026 के महीने में प्रारंभ किया गया था। इस परियोजना के अंतर्गत सिर्फ रनवे की ऊपरी सतह की मरम्मत अथवा री-सर्फेसिंग ही नहीं की गई, बल्कि विमानतल के एयरसाइड से जुड़े कई बेहद अहम आधारभूत ढांचों को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है। इस पूरे प्रयास का प्राथमिक लक्ष्य रनवे की समग्र सुरक्षा, परिचालन क्षमता तथा दैनिक कार्यकुशलता को नई ऊंचाई प्रदान करना है। नवीनीकरण के दौरान रनवे की सतह को नया रूप देकर उसके पेवमेंट को अत्यधिक सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे भारी विमानों की आवाजाही को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सके।
नए रैपिड एग्जिट टैक्सीवे और तकनीकी सुधारों की शुरुआत
हवाई पट्टी के एयरसाइड तंत्र में कई विशिष्ट तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इनमें रनवे 29L के परमानेंट थ्रेशहोल्ड डिस्प्लेसमेंट का कार्य सफलतापूर्वक पूरा करना शामिल है। इसके अलावा, लैंडिंग करने वाले हवाई जहाजों को पट्टी से अत्यंत शीघ्रता से बाहर निकालने के उद्देश्य से एक नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे (आरईटी ज़ेड1) भी निर्मित किया गया है। रनवे की दृश्यता और सुरक्षा मानकों को सशक्त करने के लिए एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम को नए सिरे से अपग्रेड किया गया है, साथ ही उससे जुड़े सभी सिविल और इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के बुनियादी ढांचे में व्यापक तकनीकी सुधार किए गए हैं।
उड़ानों की आवाजाही में आएगी तेजी और घटेगा समय
डायल के अनुसार, इन ढांचागत उन्नयनों के फलस्वरूप विमानों के आवागमन की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित और तीव्र हो सकेगी। नव-निर्मित रैपिड एग्जिट टैक्सीवे की सहायता से उतरने वाले विमान हवाई पट्टी को बेहद कम समय में खाली कर सकेंगे। इससे रनवे पर विमानों के व्यतीत होने वाले समय (रनवे ऑक्यूपेंसी टाइम) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होगी और पूरे एयरपोर्ट की परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी। उन्नत ग्राउंड लाइटिंग और आधुनिक एयरफील्ड प्रणालियों के सक्रिय होने से प्रतिकूल या बदलती मौसम परिस्थितियों में भी रनवे की परिचालन विश्वसनीयता सुदृढ़ रहेगी।
कड़े सुरक्षा निरीक्षणों और मंजूरियों के बाद बहाली
रनवे 11R/29L पर वाणिज्यिक उड़ानों की पुनः शुरुआत करने से पूर्व नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी), संबंधित एयरलाइंस और अन्य आवश्यक वैधानिक प्राधिकरणों के साथ व्यापक तकनीकी निरीक्षण, प्रमाणीकरण और विनियामक औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पाणिकर ने स्पष्ट किया कि तीसरे रनवे का पुनः संचालन दिल्ली हवाई अड्डे के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्नत रनवे, नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे तथा बेहतर नेविगेशन व लाइटिंग प्रणालियां मिलकर हवाई अड्डे की समग्र क्षमता और परिचालन मजबूती को विस्तार देंगे। ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो रनवे 11R/29L को वर्ष 2008 में पहली बार चालू किया गया था और यह करीब 17 वर्षों तक अनवरत सक्रिय रहा, जबकि वर्ष 2017 में इस पर सीमित स्तर का नवीनीकरण और रखरखाव कार्य किया गया था।





















