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दिल्ली में गिरफ्तारियों के खिलाफ सोनम वांगचुक का अल्टीमेटम, 24 घंटे में रिहाई न होने पर अनशन और पदयात्रा का ऐलानदिल्ली
10 अक्तू॰ 2026, 8:10 pm (31 मिनट पहले)· 0

दिल्ली में गिरफ्तारियों के खिलाफ सोनम वांगचुक का अल्टीमेटम, 24 घंटे में रिहाई न होने पर अनशन और पदयात्रा का ऐलान

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राजधानी में हुए प्रदर्शनों के दौरान व्यापक स्तर पर हुई धरपकड़ को अघोषित आपातकाल करार देते हुए 24 घंटे की मोहलत दी है। उन्होंने साफ किया कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को नहीं छोड़ा गया, तो वे लेह या दिल्ली में पदयात्रा अथवा भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने राजधानी दिल्ली में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई व्यापक धरपकड़ पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान कई वर्गों के लोगों की हिरासत को लेकर उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया। अपने इस बयान में उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए मौजूदा हालात की तुलना देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति से की है।

24 घंटे का अल्टीमेटम और शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी

सोनम वांगचुक ने साझा किए गए वीडियो में बताया कि जब वे वापस लौटे, तो उन्हें राजधानी में बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों की जानकारी मिली। इन हिरासत में लिए गए लोगों में छात्र नेता, युवा प्रतिनिधि, वकील, पत्रकार और संसद सदस्य शामिल हैं। वांगचुक ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले सभी से शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी, क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार मिलना स्वाभाविक माना जाता है।

देश के मौजूदा वातावरण पर गहरी चिंता जताते हुए सोनम वांगचुक ने कहा,

"अब लग रहा है कि कोई अघोषित इमरजेंसी देश में लगी हुई है। मैं इस बात की कड़ी निंदा करता हूं।"
उन्होंने सरकार से पुरजोर आग्रह किया कि आज शाम तक इन सभी गिरफ्तारियों को निरस्त किया जाए और उत्पन्न स्थिति का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए।

सामाजिक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वे स्वयं शांतिपूर्ण आंदोलन की राह पकड़ने पर विचार करने के लिए विवश हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम चाहे लेह में उठाया जाए या दिल्ली में, वह धरना, भूख हड़ताल या फिर पदयात्रा के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन समय रहते संवाद स्थापित कर मसलों को सुलझा लेगा और ऐसी नौबत नहीं आने देगा।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में यह सारा तनाव एसआईआर के विरोध और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन के बाद उपजा। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर कार्रवाई की। पुलिस ने सीजेपी के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली हवाई अड्डे पर ही विमान से उतरते वक्त हिरासत में ले लिया।

सीजेपी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। शहर भर में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। विरोध स्थलों पर उस वक्त स्थिति और बिगड़ गई जब वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए और उनके बीच झड़प देखने को मिली।

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सवाल-जवाब

सोनम वांगचुक ने सरकार को क्या चेतावनी दी है?
उन्होंने कहा है कि यदि 24 घंटे के भीतर हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो वे लेह या दिल्ली में अनशन, धरना या पदयात्रा करने पर विचार करेंगे।
दिल्ली में किन मांगों को लेकर प्रदर्शन हुआ था?
प्रदर्शनकारी एसआईआर के विरोध में और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में एकत्र हुए थे।
दिल्ली में कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 7,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया।
हवाई अड्डे पर किन नेताओं को हिरासत में लिया गया?
सीजेपी के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते ही हिरासत में लिया गया।
सोनम वांगचुक ने देश के मौजूदा हालात पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि देश में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

अचानक इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेना और वो भी एयरपोर्ट से सीधे नेताओं को उठाना, कानून-व्यवस्था के नाम पर बहुत डरावना है। अगर प्रशासन ने तुरंत बातचीत से मामला नहीं सुलझाया, तो सोनम वांगचुक का अल्टीमेटम सच साबित हो जाएगा और स्थिति संभल नहीं पाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। 7000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेना और एयरपोर्ट से सीधे नेताओं को उठाना वाकई चिंता की बात है। अगर बात नहीं संभली तो हालात सच में बिगड़ सकते हैं।

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