राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नांगली सकरावती इंडस्ट्रियल इलाके में एक औद्योगिक इकाई में अचानक भयंकर आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग की विकराल लपटों और काले धुएं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे स्थानीय लोगों में अफरातफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग तुरंत हरकत में आया और शुरुआत में आधा दर्जन गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल वाहनों की संख्या लगातार बढ़ाई गई और वर्तमान में कुल 21 गाड़ियां मौके पर आग बुझाने के निरंतर प्रयास कर रही हैं।
अधिकारियों की तैनाती और राहत कार्य
घटना की गंभीरता को भांपते हुए दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मैदान में उतारा गया है। इस पूरे अभियान की कमान संभालने के लिए डिविजनल फायर ऑफिसर संदीप दुग्गल को 100 से अधिक दमकल कर्मियों के दल के साथ मौके पर भेजा गया है। इसके अलावा डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर डीबी मुखर्जी भी स्थिति का जायजा लेने और राहत कार्यों की निगरानी करने के लिए घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं। आग बुझाने के इस कठिन अभियान में काफी समय लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है क्योंकि आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
घटना का समय और आधिकारिक श्रेणियां
फायर ब्रिगेड के अधिकारी राजेंद्र अटवाल से मिली जानकारी के अनुसार, कंट्रोल रूम को इस दुर्घटना की सूचना शाम 4 बजकर 21 मिनट पर प्राप्त हुई थी। यह हादसा शमशान घाट वाला रोड, नांगली सकरावती के पास हुआ है। स्थिति के वर्गीकरण के तहत शाम 4 बजकर 40 मिनट पर इसे मेक-4 कैटेगरी का घोषित किया गया और जैसे-जैसे आग फैलती गई, शाम 5 बजकर 25 मिनट पर इसे आधिकारिक रूप से मीडियम फायर की श्रेणी में डाल दिया गया। दमकल कर्मियों की ओर से लगातार पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोकने के कड़े प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति और सुरक्षा इंतजाम
राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। फायर कंट्रोल रूम ने इस भीषण अग्निकांड को मीडियम कैटेगरी का घोषित किया हुआ है और पूरा इलाका घने धुएं की चादर में लिपटा हुआ है। सुरक्षा के लिहाज से आसपास के क्षेत्र में आवाजाही को नियंत्रित किया गया है ताकि दमकल गाड़ियों की आवाजाही में कोई बाधा उत्पन्न न हो। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही इसके वास्तविक कारणों और नुकसान का आकलन स्पष्ट हो सकेगा।



















