दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से यात्रा करने वाले हवाई यात्रियों के लिए आने वाले वर्ष कई बड़ी सौगातें लेकर आ रहे हैं। हवाई अड्डे की ऑपरेटर कंपनी दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने आने वाले एक दशक में होने वाली ट्रैफिक बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए 'मास्टर प्लान 2036' को अंतिम रूप दे दिया है। इस नए मास्टर प्लान के तहत आईजीआई एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर क्षमता को मौजूदा 10.6 करोड़ से बढ़ाकर वर्ष 2032 तक 12.5 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे में इस बड़े विस्तार से न केवल हवाई अड्डे पर होने वाले मौजूदा कंजेशन और भीड़भाड़ में कमी आएगी, बल्कि लगभग 1.9 करोड़ अतिरिक्त यात्री हर साल आसानी से सफर कर सकेंगे।
हितधारकों से परामर्श और चरणबद्ध योजना
हवाई अड्डे के सूत्रों के अनुसार, डायल द्वारा तैयार किए गए इस नए मास्टर प्लान पर वर्तमान में सभी प्रमुख हितधारकों और एयरलाइंस कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। सभी पक्षों की सहमति के बाद इस अंतिम प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मास्टर प्लान को कई चरणों में लागू करने की तैयारी है ताकि दैनिक उड़ान सेवाओं पर कोई विपरीत असर न पड़े। योजना का पहला चरण अप्रैल 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद एयरपोर्ट की सालाना क्षमता बढ़कर 11.6 करोड़ हो जाएगी। इसके पश्चात 2032 तक इसे 12.5 करोड़ तक पहुंचाया जाएगा। वर्तमान में दिल्ली एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनलों की कुल क्षमता 10.6 करोड़ यात्रियों की है, जिसमें टर्मिनल-1 (टी-1) की क्षमता 4.2 करोड़, टर्मिनल-2 (टी-2) की क्षमता 1.4 करोड़ और टर्मिनल-3 (टी-3) की क्षमता 5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष है।
टर्मिनल-3 में नया पियर-ई बनाने की तैयारी
विस्तार योजना का एक बेहद अहम हिस्सा टर्मिनल-3 पर 'पियर-ई' का निर्माण करना है। एयरपोर्ट की भाषा में पियर उस हिस्से को कहा जाता है जो मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग को एयरोब्रिज से जोड़ता है जहां से यात्री विमान में सवार होते हैं। वर्तमान में टी-3 पर चार पियर मौजूद हैं, जिन्हें ए, बी, सी और डी कहा जाता है। इनमें से पियर ए और बी का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए होता है, जबकि पियर सी और डी घरेलू उड़ानों के संचालन के लिए उपयोग किए जाते हैं। हाल ही में पियर सी में कुछ ढांचागत बदलाव किए गए हैं जिससे जरूरत पड़ने पर वहां से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन भी हो सके। अब अप्रैल 2030 तक टी-3 में नया 'पियर-ई' बनाने की योजना तैयार की गई है। इस नए पियर के चालू होने से टी-3 की वार्षिक क्षमता में लगभग 1 करोड़ यात्रियों का इजाफा होगा, जिससे इस टर्मिनल की कुल क्षमता बढ़कर 6 करोड़ हो जाएगी।
तीनों टर्मिनलों को जोड़ेगा ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर
टर्मिनल-1 से टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के बीच यात्रा करने वाले कनेक्टिंग पैसेंजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए मास्टर प्लान में एक आधुनिक ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर (एपीएम) सिस्टम लाने की योजना शामिल है। यह एयरट्रेन सेवा लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी होगी और तीनों टर्मिनलों को आपस में सीधे जोड़ेगी। इस स्वचालित पैसेंजर मूवर के शुरू होने के बाद एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को बाहरी शटल बसों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे टर्मिनलों के बीच यात्रियों की आवाजाही काफी आसान, त्वरित और तनावमुक्त हो जाएगी।
टर्मिनल-4 का विकल्प और पैसेंजर ट्रैफिक के आंकड़े
भविष्य में एक नए टर्मिनल-4 के निर्माण को लेकर हवाई अड्डे के सूत्रों का कहना है कि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यदि आने वाले वर्षों में यात्रियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होती है और अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता महसूस होती है, तो मौजूदा टर्मिनल-2 को टर्मिनल-4 के रूप में बदलने या पुनर्विकसित करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, केवल जुलाई महीने में दिल्ली एयरपोर्ट से लगभग 60 लाख यात्रियों ने उड़ान भरी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.7 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में जुलाई तक दिल्ली एयरपोर्ट से कुल 2.64 करोड़ यात्री हवाई यात्रा कर चुके हैं।



















