दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर निकाले गए संसद मार्च के दौरान भड़की हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। मार्च के दौरान राजधानी के कई इलाकों में हुए बवाल में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मंगलवार को प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर मंतर पर जमा हो गए, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने सोमवार की हिंसा को लेकर सख्ती बढ़ाते हुए कई एफआईआर दर्ज कीं और कई लोगों को हिरासत में लिया।
250 से ज्यादा वीडियो के दम पर हो रही पहचान
इस पूरी जांच में वीडियो सबूत सबसे बड़ा हथियार बनकर सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस के पास फिलहाल 250 से ज्यादा वीडियो मौजूद हैं, इनमें आम लोगों के मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो, इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन कैमरों से ली गई फुटेज और ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरे में कैद हुई फुटेज शामिल है। जांच अधिकारी इन वीडियो को बारीकी से खंगालकर चेहरों और हरकतों का मिलान कर रहे हैं, ताकि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा सके और यह भी समझा जा सके कि उस दिन घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।
जांच के चार अहम एंगल
फिलहाल पुलिस की जांच चार अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ रही है। पहला एंगल यह है कि हिंसा में शामिल पहचाने गए उपद्रवियों में से किसी का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं रहा है, जिससे यह पता चल सके कि कहीं यह बार-बार अपराध करने वाले लोगों का समूह तो नहीं। दूसरा एंगल यह जानने से जुड़ा है कि सोमवार को जो लोग जंतर मंतर पहुंचे, क्या वे किसी सोची-समझी योजना के तहत वहां आए थे, या फिर अचानक भीड़ का हिस्सा बन गए। तीसरा एंगल 20 मार्च को हुए भाजपा के संसद मार्च से जुड़ा है, जब कुछ लोगों ने पथराव किया, तोड़फोड़ की, पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त कीं और पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाए थे, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उस दिन की हिंसा भी संगठित तरीके से और शायद उसी नेटवर्क के जरिए अंजाम दी गई थी। चौथा और सबसे अहम एंगल यह है कि क्या नई दिल्ली में हिंसा भड़कने से पहले वॉट्सऐप या टेलीग्राम पर कोई ग्रुप बनाकर लोगों को जानबूझकर भड़काया गया था, जो यह साबित कर सकता है कि यह हिंसा अचानक नहीं बल्कि पहले से तय योजना का नतीजा थी।
वॉट्सऐप ग्रुप्स से मिले भड़काऊ मेसेज
जांच के दौरान पुलिस को हिंसा से जुड़े कई वॉट्सऐप ग्रुप्स के बारे में जानकारी मिली है। इनमें से एक ग्रुप का नाम 'चलो संसद' था, जबकि दूसरे ग्रुप को 'जेएनयू संसद चलो कोआर्डिनेशन' नाम दिया गया था। दोनों ग्रुप्स का इस्तेमाल कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने वाले मेसेज फैलाने के लिए किया गया, जिनमें एक मेसेज में यह तक लिखा था कि अगर किसी प्रदर्शनकारी की मौत होती है तो इससे सरकार पर दबाव बनेगा। सोमवार की हिंसा से पहले इन्हीं ग्रुप्स में कई अन्य आपत्तिजनक पोस्ट भी शेयर की गई थीं। दिल्ली पुलिस अब इन पोस्ट को लिखने और आगे भेजने वालों की तलाश में जुटी है, क्योंकि इनकी पहचान होने से यह साफ हो सकेगा कि हिंसा पहले से तय योजना के तहत हुई थी या अपने आप भड़क गई थी।
जमीन पर कितना हुआ नुकसान
मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारियों समेत कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। इस दौरान झड़पों में पुलिस की 20 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, जबकि 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। दिल्ली पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए हंगामे में शामिल सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है, ताकि दोषी पाए जाने वालों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके और उन पर कार्रवाई की जा सके।



















