दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन में सोमवार को एक नया मोड़ देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता ने दावा किया कि सरकार की तरफ से उन्हें बातचीत के लिए बुलावा भेजा गया है, जबकि पार्टी के एक बड़े नेता ने अपना अनशन भी समाप्त कर दिया है।
सरकार से बातचीत, नड्डा से मुलाकात की संभावना
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास के अनुसार, उनके प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया जब पार्टी के समर्थक लगातार कई दिन के धरने के बाद सोमवार को संसद की तरफ मार्च निकाल रहे थे। मार्च के दौरान आरएएफ के जवानों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी, जिसने माहौल को और गरमा दिया। ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आना प्रदर्शनकारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
सौरभ दास का एक्स पोस्ट
सौरभ दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट डालकर इस मुलाकात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुबह करीब पौने बारह बजे वे और आशुतोष रांका पार्टी की ओर से जेपी नड्डा से मिलने के लिए रवाना हो रहे हैं। दास ने अपनी पोस्ट में बताया कि सरकार ने सुबह ही उनसे संपर्क कर बातचीत की पेशकश की थी, और लिखा,
"हमारी मांगें साफ हैं।"उन्होंने यह भी बताया कि मौके पर बड़ी तादाद में युवा जमा हुए हैं, जो इस आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की इस मुलाकात में आंदोलनकारियों की कौन सी मांगें मानी जाती हैं और किन पर आगे बातचीत बढ़ती है।
अभिजीत दीपके ने तोड़ा अनशन
इसी बीच पार्टी के एक और नेता अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखा है। दीपके के अनशन तोड़ने की खबर के साथ ही आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वांगचुक की तीन शर्तें
इससे पहले सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने से पहले सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट कर तीन शर्तें सामने रखी थीं। पहली शर्त के मुताबिक, सरकार को शिक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुई नाकामियों की जिम्मेदारी लेनी होगी, जिनमें पेपर लीक जैसे मामले भी शामिल हैं। दूसरी शर्त में उन्होंने मांग रखी कि खुद उन्हें और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व को संसद तक जाने दिया जाए। तीसरी और आखिरी शर्त के तहत, अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों और नेताओं को यह भरोसा देना होगा कि वे संसद के भीतर इस मुद्दे को उठाएंगे। अगर सेहत या किसी और वजह से कोई नेता खुद संसद में यह मुद्दा नहीं उठा पाता, तो उसे अस्पताल आकर व्यक्तिगत रूप से यह आश्वासन देना होगा कि वह चिट्ठी में लिखी बातों का समर्थन करता है। इन शर्तों के सामने आने के बाद ही आंदोलन से जुड़े नेताओं के अनशन खत्म करने की खबरें सामने आनी शुरू हुईं, जिससे साफ है कि प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बातचीत की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने की दिशा में है।



















