राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और उसके आसपास के परिसरों में सुरक्षा बलों द्वारा की गई गहन जांच के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस पूरी कवायद के दौरान कुल 2,873 लोगों के रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल की गई, जिनमें से लगभग 980 से ज्यादा व्यक्तियों के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज मिले। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, ये लोग कत्ल, कत्ल की कोशिश, डकैती, जबरन वसूली, दुष्कर्म, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, गैरकानूनी हथियार रखने और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे संगीन मामलों में संलिप्त रहे हैं।
आपराधिक मामलों का विस्तृत विश्लेषण
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि इस व्यापक डेटा विश्लेषण से यह बात स्पष्ट हुई है कि जांच के दायरे में आए लोगों में से कम से कम 101 व्यक्ति पुराने कत्ल के मामलों से जुड़े हुए थे। इसके अलावा, 62 लोग कत्ल की कोशिश के मामलों में, 284 लोग लूट और डकैती के मामलों में, 229 लोग शस्त्र अधिनियम के उल्लंघनों में, 135 लोग झपटमारी की वारदातों में, 19 लोग अपहरण के मामलों में और 67 लोग नशीले पदार्थ से जुड़े अधिनियमों के अंतर्गत दर्ज मुकदमों में आरोपी रह चुके हैं।
महिला सुरक्षा और अन्य गंभीर अपराध
जांच के आंकड़ों के मुताबिक, इन संदिग्धों में से 61 लोग दुष्कर्म के मामलों में शामिल पाए गए हैं, जबकि 25 अन्य लोग महिलाओं की लज्जा भंग करने या छेड़छाड़ से जुड़ी घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। इसके साथ ही, छह व्यक्तियों के खिलाफ लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज थे। कॉकरोच जनता पार्टी के चलो संसद मार्च के दौरान भड़की हिंसा और झड़पों की पृष्ठभूमि में यह पूरा सत्यापन अभियान चलाया गया था।
हिंसा और झड़पों के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन हिंसक झड़पों में 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर पर भारी भीड़ के इकट्ठा होने और 20 जुलाई को निकाले गए मार्च के दौरान फैली हिंसा के बाद ही इस बड़े स्तर के सत्यापन की शुरुआत की गई थी।
डोजियर सत्यापन और डेटाबेस की मदद
इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले या उसके आसपास मंडराने वाले लोगों की वास्तविक प्रकृति का आकलन करना और उनके आपराधिक इतिहास का पता लगाना था। अधिकारियों ने बताया कि ये निष्कर्ष विभिन्न जिला पुलिस इकाइयों और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा सुरक्षित रखे गए मौजूदा आपराधिक डेटाबेस और डोजियर सत्यापन प्रणालियों की मदद से किए गए विश्लेषण का हिस्सा हैं।
एक-तिहाई से अधिक लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड
जांच के दायरे में लाए गए कुल 2,873 व्यक्तियों में से 989 लोगों को पूर्व में गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त पाया गया, जो यह दर्शाता है कि कुल जांचे गए लोगों में से एक-तिहाई से अधिक का पुराना पुलिस रिकॉर्ड था। पुलिस का कहना है कि यह सत्यापन जिला पुलिस इकाइयों के पास उपलब्ध डोजियर रिकॉर्ड पर पूरी तरह आधारित है।
बार-बार अपराध करने वाले आदतन अपराधी
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि कत्ल के मामलों से जुड़े 101 लोगों में से 42 ऐसे थे जो दो या दो से अधिक अलग-अलग आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं, जबकि 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों से जुड़ा हुआ था। इसी प्रकार, कत्ल की कोशिश के मामलों से ताल्लुक रखने वाले 62 लोगों में से 25 के खिलाफ दो से अधिक मुकदमे दर्ज मिले।
डकैती और अन्य संगीन जुर्म
पुलिस दस्तावेजों से यह बात सामने आई कि 284 व्यक्ति पहले डकैती और लूटपाट की वारदातों में संलिप्त रहे हैं। इनमें से 155 लोग दो या अधिक आपराधिक मामलों में शामिल थे, जबकि 31 के रिकॉर्ड में 10 या उससे अधिक मामले दर्ज थे, जो उनके आदतन अपराधी होने की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, जांच में 61 ऐसे लोग भी मिले जो दुष्कर्म के मामलों में नामजद थे और उनमें से आठ लोग दो या अधिक मुकदमों का सामना कर रहे थे।
नशीले पदार्थों और हथियारों से जुड़े मामले
महिलाओं के खिलाफ अपराधों का सामना कर रहे लोगों में से छह के खिलाफ दो या अधिक मामले दर्ज मिले, जबकि अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों के मामलों में भी व्यापक संलिप्तता पाई गई। नशीले पदार्थों के अपराधों से जुड़े लोगों में से नौ व्यक्ति ऐसे थे जो दो से अधिक मामलों में शामिल रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन निष्कर्षों का इस्तेमाल प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की चल रही जांच को आगे बढ़ाने और दोषियों की पहचान करने में किया जाएगा।



















