मिजोरम के दक्षिणी हिस्से में स्थित सीमावर्ती जिले लॉन्गत्लाई में प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। सीमा पार से होने वाले अनधिकृत व्यापार और संदिग्ध वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को पहले से कहीं अधिक चुस्त बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच साझा रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक निकायों की संयुक्त समीक्षा
जिले के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सीमा सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मौजूदा हालात का विस्तार से जायजा लिया गया। इस विचार-विमर्श में जिला प्रशासन, मिजोरम पुलिस, असम राइफल्स और लाई स्वायत्त जिला परिषद के प्रमुख अधिकारियों ने भागीदारी की। इसके अतिरिक्त, स्थानीय सामाजिक संगठन सेंट्रल यंग लाई एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी इस विमर्श में शामिल किया गया ताकि जमीनी स्तर पर सूचनाओं का आदान-प्रदान और निगरानी का दायरा बेहतर हो सके।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त डॉनी लालरुतसांगा ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से गुजरने वाले हर तरह के सामान की सघन तलाशी ली जानी चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए कि अवैध व्यापारिक गतिविधियों और अनाधिकृत वाहनों के संचालन पर बिना किसी ढिलाई के ठोस कानूनी कार्रवाई की जाए। उपायुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि देश के मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
विदेशी नागरिकों के नाम पर वाहन संचालन और चोरी की गाड़ियों पर नजर
समीक्षा के दौरान ऐसे वाहनों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया जो गैर-भारतीय नागरिकों के नाम पर खरीदे गए हैं या उनके द्वारा चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे सभी मामलों की बारीकी से जांच करें ताकि कोई भी कानूनी खामियों का फायदा न उठा सके। इसके साथ ही, चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त और उनके अवैध हस्तांतरण से जुड़े नेटवर्क की तह तक जाने के लिए जांच का दायरा बढ़ाने को कहा गया है।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि मिजोरम के विभिन्न हिस्सों और देश के अन्य राज्यों से गायब हुए वाहनों की शिकायतों पर पहले से कार्रवाई चल रही है। इन मामलों में चुराए गए वाहनों का पता लगाने और उन्हें बरामद करने में नागरिक संगठनों की सक्रियता सामने आई है, जिसमें एओसी वेंग वाईएलए शाखा के योगदान की विशेष रूप से सराहना की गई।
कलादान प्रोजेक्ट और जोरीनपुई मार्ग की बढ़ती अहमियत
अधिकारियों ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोरीनपुई मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहन चर्चा की। कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के तहत विकसित हो रहा यह मार्ग म्यांमार के साथ व्यापारिक संपर्कों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। आने वाले समय में इस गलियारे से वाणिज्यिक गतिविधियों में भारी वृद्धि होने की संभावना है, जिसके चलते सभी कानूनी नियमों और मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य माना गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सीमा की सुरक्षा और कानून का अनुपालन केवल सरकारी तंत्र के बूते संभव नहीं है। इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय वाईएलए की स्थानीय शाखाओं और अन्य नागरिक समूहों से निरंतर सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया गया है, ताकि जिले के नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा को किसी भी स्तर पर आंच न पहुंचे।
























