नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर बवाल थामने का नाम नहीं ले रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चल रहा यह विरोध प्रदर्शन आज लगातार 34वें दिन में प्रवेश कर गया है। इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन ने अब हिंसक रूप ले लिया है। देश भर से आए लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों का गुस्सा हर बीतते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है। लगातार हो रही झड़पों और तनावपूर्ण माहौल के बीच अब इस पूरे प्रकरण में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने हस्तक्षेप करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के हित को सर्वोपरि बताते हुए इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की गुहार लगाई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय का आधिकारिक बयान
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लगातार बढ़ रहे टकराव को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना रुख स्पष्ट किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक विस्तृत बयान के माध्यम से छात्रों से सीधी अपील करते हुए लिखा कि वे छात्रों के दर्द और बेचैनी को अच्छी तरह समझते हैं। प्रशासन ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कुछ लोग और असामाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए छात्रों के डर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। बयान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कुछ ताकतें छात्रों की परेशानी कम करने के बजाय उनके आक्रोश का फायदा उठाकर स्थिति को और भड़काने का काम कर रही हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्वविद्यालय ने अपने संदेश में कहा कि मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा जरूरत स्थिति को शांत करने और छात्रों की परेशानी को कम करने की है। विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनकारी छात्रों को सलाह दी है कि वे अपना पूरा ध्यान उस चीज पर केंद्रित करें जो वास्तव में उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है, यानी उनकी पढ़ाई और उनका सुनहरा भविष्य।
छह जून से सुलग रहा है छात्रों का आंदोलन
यह पूरा विवाद और देशव्यापी आंदोलन 6 जून को शुरू हुआ था जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ-साथ AISA और SFI जैसे कई प्रमुख छात्र संगठनों ने विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर डेरा डाल दिया था। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप नीट-यूजी परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर हुए कथित पेपर लीक और सीबीएसई मार्किंग घोटाले से जुड़ा है। आंदोलनकारी छात्र शुरुआत से ही कई अहम और बड़ी मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं। उनकी सबसे प्रमुख मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस पूरी अनियमितता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दें। इसके अलावा, छात्रों की मांग है कि देश के पूरे परीक्षा तंत्र में पूरी तरह से पारदर्शी सुधार लाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, वे इस कथित घोटाले से प्रभावित हुए हर परीक्षार्थी को एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने की भी पुरजोर मांग कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक की एंट्री और अनशन से मिला बल
इस बड़े छात्र आंदोलन को सबसे बड़ी ताकत और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां तब मिलीं जब जून महीने के आखिरी दिनों में जाने-माने शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बन गए। उनके समर्थन में आते ही आंदोलन में एक नई जान और ऊर्जा आ गई। वांगचुक ने छात्रों की न्यायसंगत मांगों के समर्थन में अपना पूरा जोर लगाते हुए जंतर-मंतर पर ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हालांकि, उनका यह अनशन ज्यादा दिन नहीं चल सका। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करते हुए सोनम वांगचुक को धरना स्थल से जबरन हटा दिया और उनकी बिगड़ती तबीयत का हवाला देते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया। उनके जाने के बाद प्रशासन को लगा था कि आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वांगचुक के वहां से हटते ही अन्य आम छात्र और CJP के प्रमुख नेताओं ने तुरंत मोर्चे की कमान संभाल ली और वे खुद उसी जगह पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे आंदोलन की धार और तेज हो गई।
संसद मार्च के दौरान भड़की भारी हिंसा और लाठीचार्ज
शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन ने 20 जुलाई को एक बेहद खतरनाक और उग्र मोड़ ले लिया। यह दिन राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम था क्योंकि यह संसद के मॉनसून सत्र का पहला दिन था। इसी बात का फायदा उठाते हुए अपनी आवाज सीधे सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए हजारों की तादाद में आक्रोशित छात्रों ने जंतर-मंतर से सीधे संसद भवन की तरफ कूच करने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए रास्ते में कई लेयर की भारी बैरिकेडिंग कर दी थी। जब प्रदर्शनकारी छात्र बैरिकेड्स तोड़ने लगे, तो उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस बल के साथ सीधी और तीखी झड़प हो गई। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाकर्मियों को मजबूरन भारी लाठीचार्ज करना पड़ा और कई राउंड आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। इस भीषण टकराव में कई छात्रों के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी भी बुरी तरह घायल हुए। इसी गहमागहमी और तनाव के बीच CJP के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर ली और उन्हें अपनी मांगों से जुड़ा एक विस्तृत ज्ञापन भी आधिकारिक तौर पर सौंपा।
लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा बवाल, मामला पहुंचा कोर्ट
आज 23 जुलाई को इस देशव्यापी मुद्दे पर जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का 34वां दिन है। चिंताजनक बात यह है कि धरना स्थल पर लगातार तीसरे दिन भी हिंसा की छिटपुट और बड़ी घटनाएं देखने को मिली हैं। बीती रात के हालात तो और भी ज्यादा खौफनाक हो गए जब वहां तैनात पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों पर भीड़ ने सीधा और जानलेवा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले में सुरक्षा बलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा, जिसमें 2 एसीपी और 2 पुलिस इंस्पेक्टर सहित कई अन्य पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए हैं। सड़क से शुरू हुई छात्रों और प्रशासन की यह लड़ाई अब पूरी तरह से कानूनी रूप ले चुकी है। यह पूरा मामला और इससे जुड़ा पेपर लीक विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। अदालत में इस पूरे हिंसक घटनाक्रम और परीक्षा में हुई कथित धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक विशेष याचिका दायर की गई है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




















