गाड़ियों के फर्जी चालान और आकर्षक नकद पुरस्कारों का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने साइबर अपराधियों के इस सुनियोजित नेटवर्क की जड़ों को खंगालते हुए पांच प्रमुख सदस्यों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक पड़ताल के दौरान सामने आया कि यह संगठित रैकेट 544 से अधिक औपचारिक शिकायतों में शामिल था, जिसके जरिए अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की चपत लगाई जा चुकी है। यह पूरा फ्रॉड एक विदेशी एप्लिकेशन और ऑटोमेटेड फिशिंग संदेशों के जरिए संचालित किया जा रहा था।
धोखाधड़ी का डिजिटल तरीका और छिपे हुए लिंक
इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिराना थी। गिरोह के सदस्य एक विदेशी मोबाइल सॉफ्टवेयर की मदद लेते थे, जिसके माध्यम से साधारण उपयोगकर्ताओं के फोन पर फिशिंग संदेश पहुंचाए जाते थे। इस व्यवस्था में शामिल लोगों को अपने फोन पर नकद प्रोत्साहन यानी 1 से 3 रुपये का छोटा इनाम दिया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति इस कथित इनाम को भुनाने या रिडीम करने का प्रयास करता, उसका फोन कुछ पलों के लिए अपराधियों के इशारे पर काम करने लगता था। इसके बाद वही डिवाइस अनजान संपर्कों को भ्रामक संदेश भेजने का औजार बन जाता था।
एक शिकायत से खुली पूरे नेटवर्क की परतें
इस बड़े साइबर गिरोह का सुराग तब मिला जब नवंबर 2025 में एक नागरिक ने अपने फोन पर आए चालान भुगतान संदेश पर भरोसा कर लिया। पीड़ित ने जैसे ही बकाया जुर्माना समझकर उस लिंक को खोला, उसके क्रेडिट कार्ड खाते से 2.21 लाख रुपये की अनाधिकृत निकासी हो गई। जब तकनीकी विशेषज्ञों ने अपराध में प्रयुक्त सिम कार्ड और टेलीकॉम डेटा का विश्लेषण किया, तो वह नंबर मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी नितेश पटेल के विवरण पर दर्ज पाया गया। आगे की जांच में पुलिस की टीम नितेश पटेल के भतीजे के पास पहुंची। उसके स्मार्टफोन की पड़ताल करने पर विंगो कैश नाम का एक विशेष एप्लिकेशन बरामद हुआ, जिसे उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से डाउनलोड किया था।
ऑटोमेटेड एसएमएस और विदेशी बैंक खातों का जाल
तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि जब भी कोई यूजर इस एप्लिकेशन पर मौजूद रिवॉर्ड को क्लेम करता था, तो उसका सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाता था। इस प्रक्रिया के दौरान मोबाइल की स्क्रीन करीब 30 सेकंड के लिए लॉक हो जाती थी। उसी आधे मिनट के भीतर फोन बिना यूजर की अनुमति के खुद-ब-खुद 9 से 12 फिशिंग संदेश दूसरे नंबरों पर प्रसारित कर देता था। इन संदेशों में चालान के फर्जी निपटारे, पार्सल डिलीवरी वेरिफिकेशन और लॉयल्टी रिवॉर्ड से जुड़े लिंक चिपकाए जाते थे। पुलिस ने जांच के क्रम में ऐसे लगभग 3,300 संदेशों की पहचान की है। ठगी के जरिए जुटाई गई रकम को एक अंतरराष्ट्रीय बैंक खाते में जमा कराया गया था। इसमें म्यूल बैंक खातों की बड़ी श्रृंखला का पता चला है, जहां महज तीन दिनों में ऐप के 41,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं को लगभग 2 करोड़ रुपये बांटे गए थे।
कई राज्यों में छापेमारी और बरामदगी
इस सिंडिकेट के तार देश के कई कोनों से जुड़े थे। पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए मुंबई, लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब से मोती सिंह बघेला, हर्षपाल, विक्की, विशाल दास वैष्णव और बर्जेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के ठिकानों से अपराध में इस्तेमाल होने वाली व्यापक सामग्री बरामद की गई है। जब्त किए गए सामान में 15 डिजिटल उपकरण, 59 डेबिट कार्ड, 52 बैंक पासबुक एवं चेक बुक, विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों की 14 मुहरें, 5 पीओएस मशीनें, 8 क्यूआर कोड स्कैनर, एक सोने की चेन और एक कार शामिल हैं।


















