राष्ट्रीय राजधानी में हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर दायर एक अहम याचिका पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई करने से साफ मना कर दिया है। यह कानूनी विवाद कॉकरोच जनता पार्टी के उस बहुचर्चित मार्च के बाद उपजा है, जिसमें हजारों छात्र नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ संसद का घेराव करने निकले थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट कर दिया कि शीर्ष अदालत फिलहाल इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाएगी।
मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों को लगाई कड़ी फटकार
अदालती कार्यवाही के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनके पास पुलिसिया जुल्म और बर्बरता को साबित करने वाले कई वीडियो मौजूद हैं, तो मुख्य न्यायाधीश ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अदालत को इन वीडियो फुटेज में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने वकीलों को स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास ऐसे वीडियो क्लिप देखने की फुर्सत नहीं है। कोर्ट के इस कड़े रुख से उन प्रदर्शनकारियों को बड़ा झटका लगा है, जो पुलिस बल प्रयोग के खिलाफ तुरंत न्याय की गुहार लगा रहे थे।
जंतर-मंतर से संसद तक कैसे पहुंचा आंदोलन
यह पूरा कानूनी और राजनीतिक बवाल उस लंबे धरने का नतीजा है जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले छात्र लगातार पेपर लीक के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। इस आंदोलन को तब और ज्यादा तूल मिल गया जब जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठ गए। भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके अस्पताल जाने के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने जंतर-मंतर से सीधे संसद भवन की तरफ मार्च करना शुरू कर दिया, जिसे रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और पुलिसिया लाठीचार्ज
सड़कों पर उतरे इन हजारों छात्रों की मांगें बिल्कुल साफ हैं। वे परीक्षा प्रणाली में भारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। इसके साथ ही, व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार और इस तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है। जब यह उग्र भीड़ संसद की तरफ बढ़ने लगी, तो हालात बेकाबू हो गए। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को मजबूरी में आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस हिंसक झड़प के दौरान दोनों तरफ से नुकसान हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र और सुरक्षा बलों के जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद हुआ समूचा विपक्ष
छात्रों पर हुए इस लाठीचार्ज ने देश के सियासी पारे को भी गरमा दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर देश का लगभग पूरा विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ एकजुट हो गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी छात्रों का दर्द साझा करने के लिए उनके बीच पहुंचे। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और डिंपल यादव के साथ-साथ आम आदमी पार्टी की तरफ से आतिशी, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता भी सड़कों पर उतरे। इन सभी विपक्षी नेताओं ने छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मार्च किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसने इस छात्र आंदोलन को एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल दिया है।



















