वैश्विक कूटनीति के तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत और मॉस्को की साझेदारी को लेकर रूसी राजनयिक हलकों से एक स्पष्ट और मजबूत संदेश सामने आया है। रूसी दूतावास के प्रवक्ता पेत्र सिजोव ने साफ शब्दों में कहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूद दशकों पुरानी दोस्ती को कोई भी तीसरा पक्ष न तो कमजोर कर सकता है और न ही इसमें किसी तरह का दखल दे सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाले उतार-चढ़ावों और जटिल भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद भारत और रूस के आपसी संबंध हर दौर में समय की कसौटी पर पूरी तरह खरे साबित हुए हैं।
नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक रूसी सांस्कृतिक संध्या के मौके पर पेत्र सिजोव ने द्विपक्षीय संबंधों के बुनियादी आधार की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम सच्चे दोस्त हैं और हमारी इस मजबूत साझेदारी को कोई भी तीसरा देश बदल नहीं सकता। सिजोव के अनुसार यह रिश्ता केवल औपचारिक संधियों, संप्रभु वार्ताओं या कुछ दशकों के कूटनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें दोनों मुल्कों के नागरिकों के बीच सदियों से चले आ रहे आत्मिक और सामाजिक जुड़ाव में गहराई से समाई हुई हैं।
महात्मा गांधी और लियो टॉल्स्टॉय के विचारों का साझा इतिहास
ऐतिहासिक और बौद्धिक रिश्तों की गहराई समझाते हुए रूसी प्रवक्ता ने महात्मा गांधी और प्रसिद्ध रूसी साहित्यकार लियो टॉल्स्टॉय के बीच हुए ऐतिहासिक पत्राचार को याद किया। सिजोव ने बताया कि दोनों महान विचारकों की व्यक्तिगत रूप से कभी प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हुई थी, इसके बावजूद उनके बीच पत्रों के माध्यम से विचारों का निरंतर आदान-प्रदान चलता रहा। महात्मा गांधी उन्हें अपना गुरु मानते थे और उनका यह संवाद इस बात का जीवंत प्रमाण है कि दोनों देशों का बौद्धिक और मानवीय तालमेल कितना पुराना और अटूट रहा है।
इसके अलावा उन्होंने दोनों देशों के बीच लोक संस्कृति और कला के गहरे आकर्षण का भी जिक्र किया। सिजोव ने बताया कि जिस तरह रूस की धरती पर भारतीय सिनेमा को पीढ़ियों से अपार स्नेह और लोकप्रियता मिलती रही है, उसी तरह भारत में भी 'रूसी बैले' नृत्य शैली को कला प्रेमियों द्वारा हमेशा बेहद सम्मान और रुचि के साथ देखा जाता रहा है। दोनों समाजों के बीच होने वाला यह निरंतर सांस्कृतिक आदान-प्रदान द्विपक्षीय साझेदारी का एक बेहद अनिवार्य और जीवंत स्तंभ बना हुआ है।
राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ की भव्य तैयारियां
भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए पेत्र सिजोव ने जानकारी दी कि दोनों देशों के औपचारिक कूटनीतिक रिश्तों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ जल्द आने वाली है। इस ऐतिहासिक पड़ाव से पहले रूस पूरे भारत में संगीत, ललित कला और विविध सांस्कृतिक आयोजनों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इन आयोजनों के जरिए दोनों मुल्कों की साझी विरासत और ऐतिहासिक समझ को आने वाली पीढ़ियों के बीच नए सिरे से मजबूत किया जाएगा।
इसी सांस्कृतिक समारोह के दौरान भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव की पत्नी डायना अलीपोव ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दो राष्ट्रों के रिश्तों को सिर्फ सरकारों के स्तर पर होने वाली वार्ताओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए सीधे जन-जन का संपर्क स्थापित होना कहीं अधिक जरूरी है। डायना अलीपोव ने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक कूटनीति इसलिए सबसे अहम माध्यम बन जाती है क्योंकि संस्कृति सीधे आम नागरिकों के दिलों तक पहुंचती है। यह व्यवस्थागत सरकारों के बीच की औपचारिकता न होकर सीधे एक इंसान से दूसरे इंसान का स्वाभाविक जुड़ाव है।
भारतीय युवाओं को रूसी संस्कृति से जोड़ने की विशेष पहल
डायना अलीपोव ने इस बात पर खास बल दिया कि रूस अब भारत की युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कृति से परिचित कराने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है, ताकि सांस्कृतिक मंचों और कार्यक्रमों में स्कूली छात्रों और युवाओं की सीधी भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा सके। युवाओं की यह सहभागिता भविष्य के लिए दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
रूस संस्कृति दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस खास कार्यक्रम में होली ट्रिनिटी-सेंट सर्जियस लावरा और मॉस्को थियोलॉजिकल अकादमी के एक संयुक्त सांस्कृतिक दल ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस दल ने पारंपरिक रूसी धार्मिक सामूहिक गायन और लोकप्रिय लोकगीत पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह संपूर्ण आयोजन भारत और रूस के नागरिकों के बीच जमीनी भावनात्मक संपर्क को निरंतर प्रगाढ़ बनाने के लिए जारी द्विपक्षीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान का ही एक अहम हिस्सा था।



















