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आजाद नगर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में झोंपड़ी तले पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे, पानी और शौचालय न मिलने पर बाड़मेर कलेक्टर दफ्तर घेरने की चेतावनीशिक्षा
26 अग॰ 2026, 10:00 pm (1 घंटे पहले)· 2

आजाद नगर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में झोंपड़ी तले पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे, पानी और शौचालय न मिलने पर बाड़मेर कलेक्टर दफ्तर घेरने की चेतावनी

राजस्थान के बाड़मेर जिले में बुनियादी शिक्षा व्यवस्था की लाचारी सामने आई है, जहां आजाद नगर का सरकारी प्राथमिक विद्यालय बिना भवन के झोंपड़ियों में चल रहा है। पानी और शौचालय की सुविधा न होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

राजस्थान के बाड़मेर जिले स्थित गंगाला पंचायत के आजाद नगर गांव से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां संचालित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के पास अपना कोई पक्का भवन नहीं है। इस वजह से छोटे बच्चों को खुले में बनी झोंपड़ियों के नीचे बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और असुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर रहे मासूमों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

झोंपड़ियों में चल रही प्राथमिक कक्षाएं और असुरक्षित माहौल

आजाद नगर का यह प्राथमिक स्कूल पिछले लंबे समय से पक्के भवन के इंतजार में झोंपड़ीनुमा ढांचे में चलाया जा रहा है। विद्यालय परिसर में बच्चों के बैठने के लिए न तो पक्के कमरे हैं और न ही डेस्क या अन्य बुनियादी फर्नीचर की कोई व्यवस्था है। प्राथमिक स्तर के छोटे बच्चे जमीन पर बैठकर ही अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई पूरी करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार एक तरफ हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और दाखिला बढ़ाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ आजाद नगर में बच्चों के सिर पर एक सुरक्षित छत तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। झोंपड़ी में चलने वाले इस स्कूल की वजह से बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर समय अनहोनी का डर बना रहता है।

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मौसम की मार से प्रभावित होती है नियमित पढ़ाई

खुले माहौल और कच्ची झोंपड़ियों में स्कूल चलने के कारण मौसम का थोड़ा सा भी मिजाज बदलने पर बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है। विशेषकर बारिश के दिनों में यह समस्या बेहद विकराल रूप धारण कर लेती है। तेज बारिश और आंधी के दौरान झोंपड़ियों में पानी भरने लगता है और छप्पर से पानी टपकने की वजह से बच्चों का वहां बैठना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों के पास बच्चों की छुट्टी करने या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। मौसम खराब होने पर न केवल पढ़ाई का कीमती समय नष्ट होता है, बल्कि जहरीले जीव-जंतुओं और आंधी-पानी से मासूमों के चोटिल होने का खतरा भी लगातार बना रहता है।

शौचालय और पीने के पानी की सुविधाओं का भारी अभाव

इस प्राथमिक विद्यालय में केवल भवन की ही कमी नहीं है, बल्कि बच्चों की बुनियादी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में छात्र और छात्राओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय न होने के कारण छोटे बच्चों और विशेष रूप से छात्राओं को भारी मानसिक तथा शारीरिक असुविधा झेलनी पड़ती है। इसके अलावा विद्यालय में पीने के स्वच्छ पानी का भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। भीषण गर्मी और रोजाना की कक्षाओं के दौरान बच्चों को पानी के लिए भटकना पड़ता है या फिर अपने घर से पानी लाने पर मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए स्कूल में साफ पानी और शौचालय सबसे बुनियादी जरूरतें हैं, जिनके बिना किसी भी स्कूल का संचालन करना अनुचित है।

बाड़मेर से लेकर जयपुर तक चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण

आजाद नगर के ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने स्कूल के लिए पक्के भवन और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हर संभव दरवाजा खटखटाया है। स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि बाड़मेर जिला मुख्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राज्य की राजधानी जयपुर तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं। कई बार लिखित आवेदन दिए गए और उच्च अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के सामने स्कूल भवन की बदहाली का मुद्दा उठाया गया। इसके बावजूद आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं और धरातल पर स्कूल भवन के निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बन रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।

मांग पूरी न होने पर बाड़मेर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन की चेतावनी

प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने अब सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। गांव के लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ अब और अधिक खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आजाद नगर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के लिए पक्के भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे सभी बच्चों को साथ लेकर बाड़मेर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक बच्चों को सुरक्षित भवन और बुनियादी सुविधाएं देने का ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

झोंपड़ी में चल रहा यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय कहां स्थित है?
यह स्कूल राजस्थान के बाड़मेर जिले की गंगाला पंचायत के आजाद नगर गांव में स्थित है।
स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को किन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
स्कूल के पास अपना पक्का भवन नहीं है, और यहां छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तथा पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है।
खराब मौसम का स्कूल के संचालन पर क्या असर पड़ता है?
बारिश और आंधी के दौरान झोंपड़ियों में पानी भरने लगता है, जिससे पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है और बच्चों की सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं?
ग्रामीणों ने बाड़मेर से लेकर जयपुर तक प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटकर कई बार स्कूल भवन निर्माण की मांग की है।
यदि जल्द स्कूल भवन नहीं बना तो ग्रामीणों ने क्या कदम उठाने की चेतावनी दी है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर वे छात्रों को साथ लेकर बाड़मेर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देंगे।
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