बिहार के लखीसराय जिले में नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़े और संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिले के परीक्षा केंद्रों पर प्रशासन की सघन जांच के दौरान कुल नौ ऐसे लोग पकड़े गए जो असली अभ्यर्थियों की जगह पर पेपर दे रहे थे। यह पूरा सौदा मोटी रकम के बदले हुआ था। इसी के साथ परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करने वाली एक निजी एजेंसी के सात कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।
फोटो और फिंगरप्रिंट से हुआ खुलासा
दस्तावेज सत्यापन के दौरान अधिकारियों को संदेह तब हुआ जब कुछ अभ्यर्थियों के फोटो और फिंगरप्रिंट उनके रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए। इसके बाद चारों परीक्षा केंद्रों पर गहन छानबीन शुरू की गई। एसडीपीओ शिवम कुमार ने पुष्टि की कि गिरफ्तार सभी लोग दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे। इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश हो रही है।
तीन केंद्रों से पकड़े गए नौ सॉल्वर
लखीसराय जिले में नीट यूजी पुनर्परीक्षा चार केंद्रों पर आयोजित की गई थी: केंद्रीय विद्यालय किऊल, राजकीय हाइस्कूल हसनपुर, केआरके हाइस्कूल और डायट लखीसराय। इनमें से तीन केंद्रों पर फर्जीवाड़ा सामने आया। केंद्रीय विद्यालय किऊल से सबसे ज्यादा सात सॉल्वर पकड़े गए, जबकि हसनपुर हाइस्कूल और केआरके हाइस्कूल से एक-एक फर्जी परीक्षार्थी को गिरफ्तार किया गया।
MBBS का छात्र भी निकला सॉल्वर
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि पकड़े गए लोगों में खुद मेडिकल छात्र शामिल हैं। एसडीओ प्रभाकर कुमार के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में कई गिरफ्तार युवकों ने खुद को मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा बताया। सूत्रों के अनुसार इनमें पीएमसीएच, एएनएमएमसीएच गया और दिल्ली के मेडिकल संस्थानों के छात्र शामिल हैं। एएनएमएमसीएच, गया के एमबीबीएस फोर्थ इयर के छात्र अर्पित राज को लखीसराय से गिरफ्तार किया गया है और उससे पूछताछ जारी है। हसनपुर परीक्षा केंद्र पर संजीत कुमार नामक पंजीकृत अभ्यर्थी की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देते पकड़ा गया। जांच एजेंसियां अब सभी आरोपियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं।
बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका संदिग्ध
मामले में परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने वाली निजी एजेंसी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ फर्जी अभ्यर्थियों को बिना पूरी बायोमेट्रिक जांच के परीक्षा केंद्रों में प्रवेश मिल गया, जिससे एजेंसी कर्मचारियों की मिलीभगत का अंदेशा है। इन सात कर्मियों से पुलिस एक गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह सब किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा था या नहीं।
अंतरराज्यीय गैंग की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे रैकेट के पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग काम कर रहा हो सकता है। पुलिस यह जानने में जुटी है कि असली अभ्यर्थियों और सॉल्वरों के बीच कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होते ही सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे परीक्षा केंद्रों पर
सूचना मिलते ही डीएम शैलेंद्र कुमार, एसपी प्रेरणा कुमार, एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार स्वयं परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। अधिकारियों ने कई घंटे तक पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जानकारी ली। प्रशासन ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर एक साथ जांच शुरू कर दी है।













