उत्तराखंड में कुछ दिनों की धीमी रफ्तार के बाद मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होने के लिए तैयार है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 25 सितंबर से राज्य के मौसम में एक बड़ा और व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। इस मौसमी बदलाव के तहत पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में तेज गरज-चमक के साथ बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के कारण ये मौसमी परिस्थितियां काफी गंभीर रूप ले सकती हैं। स्थानीय प्रशासन और मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता के साथ-साथ पर्यटकों को भी सलाह दी है कि वे अचानक होने वाले इस बदलाव के लिए खुद को तैयार रखें, क्योंकि यह मानसूनी दौर आने वाले दो दिनों में और अधिक आक्रामक होने वाला है।
कुमाऊं मंडल के जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
25 सितंबर को कुमाऊं मंडल के जिलों में इस नए मौसमी तंत्र का सबसे व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। नैनीताल, हल्द्वानी, भीमताल और भवाली जैसे पहाड़ी इलाकों में दोपहर के बाद आसमान में गहरे काले बादलों का जमावड़ा शुरू हो जाएगा, जिसके बाद मध्यम से भारी स्तर की बारिश होने की प्रबल संभावना है। स्थानीय प्रशासन नैनीताल झील के जलस्तर की बारीकी से निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी तरह का पानी मॉल रोड पर न आए। इसके अलावा, बागेश्वर और अल्मोड़ा के घाटी वाले पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। तेज हवाओं के साथ होने वाली इस बारिश से ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ और चंपावत में भी कुछ जगहों पर बिजली कड़कने के साथ तीव्र बारिश की बौछारें पड़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने पहाड़ी ढलानों पर बसे गांवों और बस्तियों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा है। अचानक होने वाली इस तेज बारिश से नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन के कारण मलबा गिरने से एनएच-109 जैसे प्रमुख मार्ग बाधित हो सकते हैं।
मैदानी क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी से राहत, पर आंधी का बना रहेगा खतरा
पहाड़ों से इतर, उत्तराखंड के दक्षिणी मैदानी इलाकों में शामिल उधम सिंह नगर के प्रमुख शहरों जैसे रुद्रपुर, काशीपुर और खटीमा में पिछले चौबीस घंटों के दौरान लोगों को बेहद उमस और बढ़े हुए तापमान का सामना करना पड़ा है। 25 सितंबर को होने वाली बारिश इन इलाकों में तापमान को काफी नीचे ले आएगी, जिससे उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इस राहत के साथ-साथ आंधी-तूफान का भी बड़ा खतरा जुड़ा हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज आंधी चलने के कारण खुले मैदानों में लगे होर्डिंग्स, बिजली के पोल और कमजोर पेड़ टूटकर गिर सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली ग्रिड को नुकसान हो सकता है। बिजली वितरण कंपनियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। वहीं, पवित्र नगरी हरिद्वार में 25 सितंबर को मौसम काफी हद तक सामान्य रहने की उम्मीद है। यहां आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जो बिना किसी बड़ी असुविधा के उमस से राहत दिलाने में मददगार साबित होगी, हालांकि गंगा घाटों के पास सुरक्षा टीमें अलर्ट पर रहेंगी।
देहरादून और केंद्रीय गढ़वाल में छाए रहेंगे बादल, तापमान रहेगा नियंत्रित
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और उसके आसपास के पर्यटन स्थलों जैसे ऋषिकेश और मसूरी में 25 सितंबर को दिनभर आंशिक से लेकर पूर्ण रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। देहरादून में आज भारी बारिश का कोई गंभीर अलर्ट नहीं है, लेकिन दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ कुछ समय के लिए तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। हालांकि, रिस्पना और बिंदाल जैसी स्थानीय नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए नदियों के पास जाने से बचें। रुक-रुक कर होने वाली यह बारिश तापमान को नियंत्रित रखेगी और मौसम को बेहद सुहावना बना देगी। दूसरी ओर, पौड़ी गढ़वाल और चमोली जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम थोड़ा अधिक सक्रिय रहेगा, जहां आकाशीय बिजली गिरने और तेज बारिश के दौर आने की आशंका जताई गई है। ऊंचे पर्वतीय अंचलों में ठंडी हवाएं चलने के कारण सुबह और रात के समय हल्की ठंडक महसूस होने लगेगी, जो इस मौसम के बदलने का साफ संकेत है।
पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करने वालों और चारधाम तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
गढ़वाल मंडल के मध्य पर्वतीय जिलों जैसे रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल में 25 सितंबर को मौसम सामान्य रूप से अनुकूल रहने की उम्मीद है। इन जिलों में केवल बहुत हल्की से हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे प्रमुख यात्रा मार्ग सुचारू रूप से चलते रहेंगे। सड़कों को तुरंत साफ करने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने संवेदनशील जगहों पर भारी मशीनरी तैनात की है। हालांकि, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम किसी भी समय बदल सकता है। हल्की बारिश के साथ चलने वाली ठंडी हवाओं के कारण यहां तापमान में तेजी से गिरावट आ सकती है। इन पवित्र धामों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े और बरसाती अवश्य रखें। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले मौसम बुलेटिनों पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि असली सतर्कता 26 और 27 सितंबर को रखनी होगी जब इन पहाड़ी जिलों में मानसूनी बारिश का दायरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
26 और 27 सितंबर को बारिश का चरम दौर और उसके बाद मौसम का साफ होना
मौसम विज्ञान विभाग के साप्ताहिक पूर्वानुमान के अनुसार, इस मानसूनी तंत्र का सबसे उग्र और विनाशकारी रूप 26 और 27 सितंबर को दिखाई देगा। 26 सितंबर को कुमाऊं मंडल के तीन प्रमुख जिलों नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर में कहीं-कहीं 'अत्यंत भारी बारिश' (204.4 मिलीमीटर से अधिक बारिश) होने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही देहरादून, पौड़ी, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में भारी (64.5 से 115.5 मिलीमीटर) से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। 27 सितंबर को बारिश का यह मुख्य क्षेत्र गढ़वाल मंडल की तरफ केंद्रित हो जाएगा, जिससे देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और पौड़ी के साथ-साथ कुमाऊं के नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने के आसार हैं। इस भारी बारिश के दौर से राहत 28 सितंबर से मिलनी शुरू होगी, जब मानसूनी गतिविधियों में तेजी से कमी आएगी। पश्चिमी गढ़वाल के उत्तरकाशी और देहरादून को छोड़कर राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क होने लगेगा और 30 सितंबर तक हरिद्वार व उधम सिंह नगर में धूप खिलने के साथ मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा।



















