बॉलीवुड में अस्सी और नब्बे के दशक के दौरान कई फिल्मों पर सीमा पार की कहानियों को ज्यों का त्यों उठाने के आरोप लगे थे। निर्माता पहलाज निहलानी के बैनर तले बनी एक्शन फिल्म आग ही आग इसी फेहरिस्त का एक प्रमुख उदाहरण है। शिबू मित्रा के निर्देशन में तैयार हुई यह मसाला ड्रामा उस दौर में सिनेमाघरों में जबरदस्त कामयाब रही थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र के अभिनय को काफी सराहा गया, वहीं अभिनेता चंकी पांडे ने इसी प्रोजेक्ट के जरिए हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय सफर का आगाज किया था। फिल्म के निर्माण से जुड़ा एक रोचक पहलू यह भी रहा कि निर्माता इसमें मुख्य किरदार के लिए माधुरी दीक्षित को जोड़ना चाहते थे, मगर उन्होंने इस पेशकश को ठुकरा दिया था।
कलाकारों की बड़ी फौज और सुपरहिट संगीत
फिल्म आग ही आग में दिग्गज कलाकारों की एक लंबी कतार मौजूद थी। इसमें नीलम कोठारी, गुलशन कुमार, डैनी डेंजोंगप्पा, मौसमी चटर्जी और विनोद मेहरा जैसे चर्चित चेहरों ने अलग-अलग किरदार निभाए थे। पर्दे पर इस मल्टीस्टारर फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता देखने को मिली थी। फिल्म के संगीत पक्ष को संगीतकार बप्पी लहरी ने संभाला था। उनके धुनों पर सजे गानों को लता मंगेशकर, आशा भोसले और शब्बीर कुमार जैसे मशहूर गायकों ने अपनी आवाज दी थी। यह पूरा संयोजन टिकट खिड़की पर दर्शकों को खींचने में पूरी तरह कामयाब रहा था।
पाकिस्तानी ब्लॉकबस्टर शेर खान से हूबहू दृश्य उठाने का मामला
फिल्म डेटाबेस आईएमडीबी के विवरण के अनुसार, आग ही आग की मूल कहानी असल में लॉलीवुड यानी पाकिस्तानी सिनेमा की 1981 में रिलीज हुई ऐतिहासिक फिल्म शेर खान पर आधारित थी। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों के आकलन में यह बात सामने आई कि भारतीय निर्माताओं ने न केवल कहानी की रूपरेखा ली, बल्कि कई अहम दृश्यों को भी दृश्य दर दृश्य दोहरा दिया था। 1981 की उस मूल एक्शन म्यूजिकल पंजाबी फिल्म का निर्देशन युनीस मलिक ने किया था, जबकि उसके निर्माण की जिम्मेदारी अनवर कमल पाशा ने निभाई थी।
चरित्रों की अदला-बदली और कहानी का ताना-बाना
पाकिस्तानी फिल्म शेर खान में मुख्य भूमिका अभिनेता सुल्तान राही ने निभाई थी, जबकि उनके पिता के किरदार में इकबाल हसन नजर आए थे। भारतीय रीमेक आग ही आग में इस ढांचे को बदलते हुए धर्मेंद्र को पिता की भूमिका में पेश किया गया। दूसरी तरफ पाकिस्तानी फिल्म में अभिनेता मुस्तफा कुरैशी ने एक ऐसे पुलिस अधिकारी का रोल निभाया था, जो कहानी के मुख्य नायक शेर खान से प्रतिशोध लेने के पीछे पड़ा रहता है। यही टकराव हिंदी संस्करण में भी केंद्रीय द्वंद्व बनकर सामने आया।
अस्सी और नब्बे के दशक में सीमा पार से रीमेक का दौर
उस दौर में हिंदी फिल्म उद्योग पर पाकिस्तानी पटकथाओं को बिना आधिकारिक घोषणा के अपनाने के कई आरोप लगे थे। यह सिलसिला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं था। उदाहरण के लिए, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म पाप की दुनिया को साल 1986 की पाकिस्तानी फिल्म फैसला की प्रति माना जाता है। इसी प्रकार, उस जमाने की एक अन्य चर्चित हिंदी फिल्म गुनाहों का फैसला को भी लॉलीवुड की फिल्म कीमत की नकल के तौर पर रेखांकित किया जाता रहा है।
शेर खान का ऐतिहासिक बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड
मूल फिल्म शेर खान ने पाकिस्तान के फिल्मी इतिहास में अभूतपूर्व सफलता दर्ज की थी। सुल्तान राही, अंजुमन, इकबाल हसन और मुस्तफा कुरैशी अभिनीत इस फिल्म ने सिनेमाघरों में डायमंड जुबली मनाई थी। यह लंबे समय तक पाकिस्तान के इतिहास में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में शीर्ष पर बनी रही। देश के कई सिनेमाघरों में यह फिल्म लगातार 5 वर्षों तक प्रदर्शित होती रही और अनगिनत हफ्तों तक इसके शो पूरी तरह हाउसफुल चलते रहे। इसी फिल्म की कामयाबी ने मुख्य अभिनेत्री अंजुमन को रातोंरात स्टार बना दिया था। इसके बाद अंजुमन और सुल्तान राही की जोड़ी इतनी लोकप्रिय हुई कि दोनों ने पंजाबी सिनेमा में लगभग 117 फिल्मों में एक साथ स्क्रीन साझा करने का रिकॉर्ड बनाया।


















