हास्य कलाकार प्रणित मोरे के खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज आपराधिक मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की संयुक्त पीठ ने इस कानूनी अर्जी पर विचार करते हुए केंद्र सरकार के अलावा महाराष्ट्र और हरियाणा के प्रशासनों से उनका आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। मंच संचालक के खिलाफ इंटरनेट पर साझा किए गए एक आपत्तिजनक संवाद के बाद कई थानों में कानूनी शिकायतें की गई थीं।
शीर्ष अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें
अदालत में हास्य कलाकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अलग-अलग जगहों पर दर्ज प्राथमिकियों की विषय-वस्तु पूरी तरह समान घटनाक्रम से जुड़ी है। ऐसे में कई अदालतों में एक ही बात पर समानांतर प्रक्रिया चलने के बजाय सभी मामलों की संयुक्त सुनवाई तय होनी चाहिए। वकील ने पीठ को अवगत कराया कि संबंधित मंच संचालक पूरे मामले को लेकर सार्वजनिक तौर पर क्षमा मांग चुके हैं और वह किसी भी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
प्रतिरक्षा पक्ष ने यह जानकारी भी प्रस्तुत की कि जिस फुटेज को लेकर यह कानूनी विवाद खड़ा हुआ, उसे किसी भी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज होने से पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। इसके साथ ही अदालत को बताया गया कि सामग्री को सार्वजनिक करने से पूर्व संबंधित प्रचार दल ने कलाकार से आवश्यक सहमति हासिल नहीं की थी। इन सभी बिंदुओं को रिकॉर्ड पर लेते हुए पीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला सुनाया।
मंच पर शुरू हुआ संवाद और विवादित टिप्पणी
इस पूरे मामले का आरंभ गुरुग्राम के एक सभागार में आयोजित हास्य प्रस्तुति के दौरान हुआ था। कार्यक्रम के मध्य प्रेक्षकों के बीच बैठे हिमांशु जांगड़ा नामक दर्शक ने अपनी किसी पुरानी मुलाकात का प्रसंग साझा करना शुरू किया। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसने अपनी साथी के साथ भोजन के दौरान चिकन बिरयानी के बिल पर करीब 370 रुपए का भुगतान किया था। इसके तुरंत बाद उसने ऐसे शब्द कहे जिन्हें सामाजिक स्तर पर महिलाओं के प्रति अत्यंत अशोभनीय माना गया।
डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित अंश में दर्शक यह संकेत देता दिखा कि मामूली धनराशि खर्च करने के आधार पर वह शारीरिक निकटता की अपेक्षा कर रहा था। यहां तक कि जब महिला ने उसे वापस छोड़ने का आग्रह किया, तब भी वह अपने खर्च की भरपाई करने जैसी बातें दोहराता रहा। उस समय मंच पर मौजूद कलाकार इस वार्तालाप पर खिलखिलाते नजर आए और उन्होंने उस प्रसंग को 'पीक गुरुग्राम कॉन्टेंट' कहकर संबोधित किया, जिससे श्रोताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में तीव्र आक्रोश फैल गया।
सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और आयोग का हस्तक्षेप
इंटरनेट पर दृश्य सामग्री सामने आने के पश्चात राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस घटना पर कड़ा रुख अख्तियार किया। आयोग ने मंच संचालक और उक्त दर्शक दोनों को तलब करते हुए हरियाणा के शीर्ष पुलिस अधिकारी को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। संस्था का स्पष्ट आकलन था कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणियां महिला सहमति और व्यक्तिगत गरिमा जैसे संवेदनशील विषयों को बेहद सतही तौर पर प्रस्तुत करती हैं।
इस प्रशासनिक निर्देश के बाद स्थानीय स्तर पर गुरुग्राम में कानूनी प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके समानांतर महाराष्ट्र की साइबर अपराध शाखा ने भी मोरे, जांगड़ा और एक अन्य सहभागी के विरुद्ध औपचारिक आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी। देश के अलग-अलग हिस्सों में कानूनी शिकंजा कसने के बाद ही कलाकार ने सर्वोच्च न्यायिक मंच का दरवाजा खटखटाकर सभी कार्यवाहियों को एक सूत्र में पिरोने का आग्रह किया।



















