मलयालम कला जगत में उस समय गहरा शोक छा गया जब एक लोकप्रिय अभिनेता अपनी कला साधना के दौरान ही इस दुनिया को अलविदा कह गए। थिएटर और फिल्मों में अपनी खास पहचान बनाने वाले मुरुगन पनाविला का 46 वर्ष की उम्र में अचानक निधन हो गया। हालांकि उनका भौतिक शरीर अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके द्वारा उठाया गया अंतिम कदम समाज के लिए एक अनुकरणीय मिसाल बन गया है, क्योंकि दुनिया से जाते-जाते वे कई अभागों की जिंदगी रोशन कर गए।
मंच पर रिहर्सल के दौरान हुई थी तबीयत खराब
यह दुखद घटना 21 जुलाई को सामने आई जब श्रीमुरुगन कोझिकोड के वडाकारा में स्थित एक थिएटर मंच पर अपनी प्रस्तुति की रिहर्सल में व्यस्त थे। उसी दौरान उन्हें अचानक गंभीर ब्रेन हेमरेज का सामना करना पड़ा और वे अचानक मंच पर ही अहोश होकर गिर पड़े। उनके साथियों ने बिना किसी विलंब के उन्हें तुरंत एक स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज कई दिनों तक चला।
अंगदान के जरिए पांच मरीजों को मिला नया जीवन
चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद अभिनेता की हालत में सुधार नहीं हो सका और 25 जुलाई की दोपहर को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इस अत्यंत कठिन और शोकाकुल घड़ी में श्रीमुरुगन के परिजनों ने एक बेहद प्रेरणादायक फैसला लिया। उन्होंने अंग दान करने की सहमति दी, जिससे कई अन्य घरों के बुझते चिराग फिर से रोशन हो गए। डॉक्टरों ने पूरी चिकित्सीय प्रक्रिया का पालन करते हुए उनके महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित निकाला और उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया।
इस तरह बांटे गए अभिनेता के अंग
श्रीमुरुगन का यकृत यानी कि लिवर किम्सहेल्थ अस्पताल में उपचाराधीन एक मरीज को सफलताપૂર્વक प्रत्यारोपित किया गया। इसके अतिरिक्त, उनका हृदय वाल्व श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी को उपलब्ध कराया गया। उनकी दोनों आंख की कॉर्निया रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी को भेजी गईं, जिनके जरिए दो दृष्टिहीन व्यक्तियों की दुनिया में रोशनी लौटने की राह तैयार हुई। उनकी त्वचा को सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्किन बैंक को सौंपा गया, जो गंभीर रूप से झुलसे हुए मरीजों के उपचार में अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
भले ही मुरुगन पनाविला का सफर इस नश्वर दुनिया में समाप्त हो चुका हो, लेकिन उनका यह परोपकारी कदम मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा अध्याय लिख गया है जो हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी यह पहल मनोरंजन उद्योग के साथ-साथ पूरे समाज के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत है जो जीवन के बाद भी दूसरों में सांसें भरने का काम करती है।



















