भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे सितारे हुए हैं जिन्होंने एक ही प्रोजेक्ट के भीतर दर्शकों को अपने कई रूपों से चौंका दिया है। कमल हासन ने दशावतारम में दस अलग-अलग किरदार जीवंत किए थे, तो संजीव कुमार ने नया दिन नई रात में नौ रूपों में अपनी अभिनय कला का प्रदर्शन किया था। श्रीदेवी ने चालबाज में जुड़वां भूमिकाएं निभाई थीं और गोविंदा ने बड़े मियां छोटे मियां में डबल रोल से लोगों को खूब हंसाया था। हालांकि, साल 2015 के दौरान एक ऐसी दक्षिण भारतीय फिल्म रिलीज हुई थी जहां बात केवल कई किरदार निभाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि मुख्य अभिनेता ने अपने शारीरिक स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर एक अभूतपूर्व प्रयोग किया था।
विक्रम के चार अलग और अनोखे अवतार
वह फिल्म आई थी जो 14 जनवरी 2015 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई थी। इस रोमांटिक एक्शन थ्रिलर का निर्देशन शंकर ने किया था और इसमें विक्रम के साथ एमी जैक्सन, सुरेश गोपी, उपेन पटेल और एन. संथानम जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। लगभग 188 मिनट लंबी इस मूवी की सबसे बड़ी खासियत अभिनेता विक्रम का जबरदस्त शारीरिक कायापलट था। उन्होंने इसमें एक बॉडीबिल्डर, एक मॉडल, एक क्रूर दिखने वाले बीस्ट और एक कुबड़े यानी हंचबैक के रूप में चार अलग-अलग लुक्स अपनाए थे। कहानी लिंगेसन नाम के युवक के इर्द-गिर्द घूमती है जो पहले बॉडीबिल्डर बनने की ख्वाहिश रखता है और फिर मॉडलिंग की दुनिया में ऊंचाइयां छूता है, लेकिन उसके दुश्मन उसे एक खतरनाक वायरस का इंजेक्शन देकर पूरी तरह बदशक्ल बना देते हैं जिसके बाद वह प्रतिशोध की आग में कूद पड़ता है।
जान जोखिम में डालकर किया गया बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन
इस प्रोजेक्ट के लिए विक्रम ने केवल मेकअप का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी काया को पूरी तरह बदल डाला। शुरुआती दृश्यों के लिए उन्होंने मांसपेसियों और वजन को बढ़ाया, फिर मॉडलिंग के दौर के लिए खुद को स्लिम किया और विकृत किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए अपना वजन बहुत अधिक घटा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका वजन लगभग 90 किलो से गिरकर 56 किलो के आसपास पहुंच गया था। एक अन्य जगह जिक्र मिलता है कि उनका वजन 86 किलो से घटकर 56 किलो हुआ था। अभिनेता ने एक इंटरव्यू में साझा किया था कि इस प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक भूख उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई थी। वह बेहद सीमित आहार पर रहते थे जिसमें अंडे की सफेदी और आधे सेब जैसी चीजें शामिल थीं। वजन कम करने के मकसद से वह हर रोज कसरत करते थे और लगभग 15 किलोमीटर तक साइकिल चलाते थे।
परिवार की चिंता और प्रोस्थेटिक मेकअप का दर्द
इस खतरनाक ट्रांसफॉर्मेशन की वजह से उनका परिवार भी उनकी सेहत को लेकर काफी डरा हुआ था। फिल्म निर्माता शंकर ने भी स्वीकार किया था कि विक्रम के इस तरह तेजी से वजन गिराने से वह खासे चिंतित थे क्योंकि उन्होंने अभिनेता से ऐसा करने के लिए कहा भी नहीं था, मगर विक्रम अपनी जिद पर अड़े हुए थे। केवल वजन कम करना ही एकमात्र चुनौती नहीं थी, बल्कि विक्रम को भारी-भरकम प्रोस्थेटिक मेकअप के साथ लंबे समय तक शूटिंग करनी पड़ती थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह मेकअप कई बार 11 से 17 घंटे तक उनकी त्वचा पर लगा रहता था जिससे उन्हें स्किन रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। विक्रम ने बाद में इस प्रोजेक्ट को अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक माना। उन्होंने बताया कि प्रोस्थेटिक की वजह से उन्हें लगभग एक साल तक एक अनजान चेहरे के साथ काम करना पड़ा और सेट पर मौजूद लोग भी उन्हें आसानी से पहचान नहीं पाते थे। वजन घटाने के इस कठिन सफर के दौरान उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया था क्योंकि हर कोई उनकी सेहत को लेकर लगातार सवाल पूछता रहता था।
शानदार बजट और बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई
इस मेगा बजट प्रोजेक्ट को बनाने में लगभग 100 करोड़ रुपये की भारी लागत आई थी जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी। जब यह मकर संक्रांति और पोंगल के पर्व पर थिएटर्स में उतरी तो इसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बना दिए। पहले ही दिन इस फिल्म ने दुनिया भर में 34 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था। भारत और विदेशी बाजारों को मिलाकर इसने कुल 240 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया। अपनी कुल निर्माण लागत से दोगुने से भी ज्यादा मुनाफा कमाने के कारण यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शुमार हो गई थी।



















