देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा को लेकर एक विस्तृत विश्लेषण सामने आया है। इस वर्ष इस महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा के आयोजन का जिम्मा आईआईटी रुड़की के पास था। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक की है, जिसमें प्रत्येक प्रश्न का बारीक मूल्यांकन शामिल किया गया है। इस रिपोर्ट के सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि किस तरह कुछ बेहद जटिल सवालों ने परीक्षा कक्ष में बैठे मेधावी विद्यार्थियों को भी उलझा दिया और उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
परीक्षा संरचना और विषयों का संतुलन
जेईई एडवांस्ड की पूरी परीक्षा प्रणाली दो अनिवार्य चरणों यानी पेपर 1 और पेपर 2 में विभाजित रहती है। इन दोनों ही प्रश्नपत्रों में परीक्षार्थियों की समझ को परखने के लिए गणित, फिजिक्स और केमिस्ट्री तीनों विषयों से प्रश्न शामिल किए जाते हैं। परीक्षा के प्रारूप के तहत पेपर 1 में तीनों विषयों से 16-16 प्रश्न पूछे गए थे, जिससे इस पहले भाग में कुल प्रश्नों की संख्या 48 रही। इसके बाद पेपर 2 के चरण में प्रत्येक विषय से 18-18 प्रश्न पूछे गए, जिससे कुल मिलाकर 54 प्रश्नों का सेट तैयार हुआ।
इस साल इस राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगिता में कुल 1.79 लाख विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। प्रश्नपत्र के समग्र स्तर का मूल्यांकन करें तो समग्र कठिनाई काफी चुनौतीपूर्ण स्तर पर आंकी गई। हालांकि गणित के खंड में पिछले वर्षों के मुकाबले छात्रों को थोड़ी राहत महसूस हुई, लेकिन इसके विपरीत फिजिक्स और केमिस्ट्री के हिस्सों ने उम्मीदवारों के गहन ज्ञान और धैर्य की कड़ी परीक्षा ली।
फिजिक्स पेपर 1 का दूसरा प्रश्न साबित हुआ सबसे बड़ी बाधा
आईआईटी रुड़की के आधिकारिक डेटा के मुताबिक, फिजिक्स पेपर 1 के प्रश्न संख्या 2 को पूरे इम्तिहान का सबसे जटिल और कठिन सवाल दर्ज किया गया है। इस एकल प्रश्न ने मेरिट की दौड़ में शामिल हजारों होनहारों के कदम रोक दिए। परीक्षा में शामिल कुल 1.79 लाख उम्मीदवारों में से 1.28 लाख छात्रों, यानी 71.89 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने इस प्रश्न को हल करने का जोखिम तक नहीं उठाया और इसे पूरी तरह अनछुआ छोड़ दिया।
जिन साहसी छात्रों ने इसे हल करने का प्रयास किया, उनमें से भी एक बड़ा हिस्सा सटीक परिणाम तक नहीं पहुंच सका। लगभग 24,933 परीक्षार्थियों यानी 13.88 प्रतिशत के उत्तर गलत निकले। इस प्रकार नकारात्मक अंकन और छूटे हुए प्रयासों को मिलाकर देखा जाए तो लगभग 85 प्रतिशत अभ्यर्थियों को इस विशेष सवाल पर शून्य अंक से ही संतोष करना पड़ा।
केमिस्ट्री के चार सवालों से 60 प्रतिशत से ज्यादा ने बनाई दूरी
कठिनाई का यह दौर केवल भौतिक विज्ञान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि रसायन विज्ञान के पर्चे ने भी छात्रों को गहरे असमंजस में डाला। विश्लेषण के अनुसार केमिस्ट्री के खंड में चार ऐसे विशिष्ट प्रश्न सामने आए, जिन्हें 60 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों ने हल करने की कोशिश ही नहीं की।
केमिस्ट्री पेपर 1 के प्रश्न संख्या 1 पर नजर डालें तो 66.59 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने इससे पूरी तरह दूरी बना ली, जबकि प्रयास करने वाले 19 प्रतिशत छात्रों ने गलत उत्तर दर्ज किया। इस तरह कुल 85 प्रतिशत छात्र इसमें अंक हासिल करने में असफल रहे। इसी पेपर के प्रश्न संख्या 4 की स्थिति और भी विकट रही, जहां 62.27 प्रतिशत छात्रों ने सवाल छोड़ दिया और 27 प्रतिशत ने त्रुटिपूर्ण गणना की, जिससे 90 प्रतिशत उम्मीदवारों को निराशा हाथ लगी।
पेपर 2 में भी केमिस्ट्री की यही प्रवृत्ति बरकरार रही। केमिस्ट्री पेपर 2 के पहले सवाल को 67.42 प्रतिशत छात्रों ने छुआ तक नहीं और 20 प्रतिशत ने गलत हल दिया। वहीं पेपर 2 के प्रश्न संख्या 3 को 62.45 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने अनछुआ छोड़ दिया और 27 प्रतिशत का जवाब गलत रहा, जिसके चलते 89 प्रतिशत उम्मीदवारों को इस प्रश्न से कोई अंक प्राप्त नहीं हो सके। आगामी 2027 सत्र की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के लिए प्रश्नों का यह चयन और छोड़ने की रणनीति अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



















