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नीट यूजी पेपर लीक में सीबीआई की चार्जशीट से बड़ा खुलासा, फीफा वर्ल्ड कप 2026 कोडनेम से चलता था हाईटेक सिंडिकेटपरीक्षा
7 अग॰ 2026, 3:27 pm (36 दिन पहले)· 0

नीट यूजी पेपर लीक में सीबीआई की चार्जशीट से बड़ा खुलासा, फीफा वर्ल्ड कप 2026 कोडनेम से चलता था हाईटेक सिंडिकेट

सीबीआई की हालिया चार्जशीट से खुलासा हुआ है कि नीट यूजी पेपर लीक मामला किसी एक केंद्र की गड़बड़ी नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित डिजिटल अपराध था, जिसमें अभ्यर्थियों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए सवाल रटवाए गए थे।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी को लेकर चल रहे विवाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की पड़ताल से परत-दर-परत कई सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। अदालत में दाखिल की गई हालिया चार्जशीट से यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि यह पेपर लीक मामला महज किसी एक शहर या किसी एक परीक्षा केंद्र तक सीमित कोई स्थानीय धांधली नहीं थी। इसके विपरीत, यह देश के कई राज्यों में फैला एक बेहद सुनियोजित, संगठित और हाई-टेक आपराधिक सिंडिकेट था, जिसने लाखों अभ्यर्थियों की सालों की कड़ी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

डिजिटल चक्रव्यूह: पासवर्ड प्रोटेक्टेड फाइल्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल

सीबीआई द्वारा इकट्ठा किए गए सबूतों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट बताती है कि इस सॉल्वर गैंग ने पेपर लीक की साजिश को अंजाम देने के लिए पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक डिजिटल तकनीक का सहारा लिया। प्रश्नपत्रों को हासिल करने के बाद उन्हें तुरंत स्कैन किया गया और एनक्रिप्टेड डिजिटल फाइल के रूप में तब्दील कर दिया गया। इसके बाद इन फाइलों को टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए तेजी से सर्कुलेट किया गया।

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इन डिजिटल फाइलों की सुरक्षा के लिए उन पर मजबूत पासवर्ड लगाए गए थे। इन पासवर्ड्स को केवल वही लोग हासिल कर सकते थे जिन्होंने इस शिक्षा माफिया को मोटी रकम का भुगतान किया था। इस एनक्रिप्टेड डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल करके सिंडिकेट ने महज कुछ ही घंटों के भीतर परीक्षा सामग्री को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा दिया।

‘फीफा वर्ल्ड कप 2026’ कोडनेम और गुप्त स्टडी बैच की साजिश

जांच एजेंसी की पड़ताल में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह इस गैंग द्वारा अपनाए गए छद्म नाम और सीक्रेट स्टडी बैचेज का नेटवर्क है। पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के साथ-साथ अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने के लिए इस सिंडिकेट ने अपने डिजिटल ग्रुप्स का नाम फीफा वर्ल्ड कप 2026 जैसे आकर्षक और फैंसी कोडनेम पर रखा था।

इन सीक्रेट ग्रुप्स में केवल चुनिंदा 10 से 12 अभ्यर्थियों को ही शामिल किया जाता था। परीक्षा की तारीख से ठीक 1 से 2 दिन पहले इन चुनिंदा छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से एक जगह इकट्ठा किया गया। वहां उन्हें स्पेशल गाइडेंस और डाउट सॉल्विंग के नाम पर लीक हुए प्रश्नपत्रों के सटीक उत्तर पूरी तरह से रटवाए गए थे ताकि वे परीक्षा हॉल में बिना किसी झिझक के सही उत्तर चुन सकें।

चार राज्यों तक फैले मल्टी-स्टेट नेटवर्क के मोहरे

सीबीआई की विस्तृत जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हुए थे। इस सिंडिकेट के सक्रिय मोहरे बिहार, झारखंड, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में फैले हुए थे और हर राज्य के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी तय की गई थी।

उदाहरण के तौर पर, बिहार में लीक हुए उत्तरों को अभ्यर्थियों से रटवाने के लिए गुप्त सेफ हाउस किराए पर लिए गए थे। वहीं दूसरी तरफ, झारखंड और अन्य पड़ोसी राज्यों से प्रश्नपत्र को समय पर हासिल करने और परीक्षा केंद्रों पर सॉल्वर बिठाने की पूरी प्लानिंग की गई थी। इस तरह पूरे नेटवर्क को एक कॉर्पोरेट मॉडल की तर्ज पर अलग-अलग राज्यों में संचालित किया जा रहा था।

एक्सपर्ट्स और सॉल्वर गैंग द्वारा सटीक उत्तर कुंजी की तैयारी

नीट यूजी का पेपर सिर्फ चोरी या लीक ही नहीं किया गया था, बल्कि परीक्षा से ठीक पहले उसके शत-प्रतिशत सटीक उत्तर तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम लगाई गई थी। इस सॉल्वर गैंग में मेडिकल क्षेत्र और नामचीन कोचिंग संस्थानों से जुड़े एक्सपर्ट शामिल थे।

इन एक्सपर्ट सॉल्वर्स ने बेहद कम समय के भीतर पूरे नीट यूजी प्रश्नपत्र को हल किया और उसकी एक प्रामाणिक उत्तर कुंजी तैयार की। यही तैयार की गई आंसर की बाद में किराए पर लिए गए सेफ हाउस और ऑनलाइन बैचेज में अभ्यर्थियों को रटवाई गई, जिससे छात्र परीक्षा हॉल में बिना सोचे-समझे सही विकल्पों पर टिक लगा सकें।

सीबीआई की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक कदम

सीबीआई ने इस बहुचर्चित मामले में मुख्य साजिशकर्ताओं, बिचौलियों और सॉल्वर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। अदालत में पेश की गई चार्जशीट में जांच एजेंसी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, टेलीग्राम चैट्स और डिजिटल फॉरेंसिक एविडेंस को ठोस सबूत के तौर पर शामिल किया है। सीबीआई की इस निर्णायक कार्रवाई से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ बनाने और ऐसे हाई-टेक सिंडिकेट्स पर स्थायी नकेल कसने के लिए कड़े प्रशासनिक सुधार लागू किए जाएंगे।

सवाल-जवाब

नीट यूजी पेपर लीक में सीबीआई ने किस नए कोडनेम का खुलासा किया है?
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार गिरोह ने टेलीग्राम और व्हाट्सऐप पर अभ्यर्थियों को जोड़ने और जांच एजेंसियों से बचने के लिए 'फीफा वर्ल्ड कप 2026' जैसे कोडनेम का इस्तेमाल किया था।
पेपर लीक गिरोह ने उत्तर रटाने के लिए क्या तरीका अपनाया था?
परीक्षा से 1 से 2 दिन पहले 10 से 12 अभ्यर्थियों के छोटे ग्रुप बनाए गए और उन्हें सेफ हाउस तथा ऑनलाइन बैचेज में उत्तर कुंजी के जरिए सवाल रटवाए गए थे।
यह सिंडिकेट किन-किन राज्यों में सक्रिय था?
सीबीआई जांच में पाया गया कि इस नेटवर्क के मोहरे बिहार, झारखंड, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में फैले हुए थे।
सीबीआई ने अदालत में क्या सबूत पेश किए हैं?
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में फॉरेंसिक सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और टेलीग्राम चैट की प्रतियों को ठोस सबूत के रूप में पेश किया है।
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