नागालैंड के कॉफी उत्पादकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी पैदावार को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए एक समग्र रणनीति पर काम करने की जरूरत है। पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने राज्य में कॉफी क्षेत्र के विस्तार के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत प्रसंस्करण इकाइयों, मूल्य संवर्धन और मजबूत बाजार संपर्कों को अनिवार्य बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बागवानी तक सीमित रहने के बजाय पूरी उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना समय की मांग है।
तौफेमा गांव में जमीनी हकीकत का जायजा
सतिंदर कुमार भल्ला ने राजधानी कोहिमा से लगभग 34 किलोमीटर दूर स्थित तौफेमा गांव का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य कॉफी यूटिलाइजेशन ऑफ सरप्लस पोटेंशियल (यूएसपी) परियोजना के तहत चल रहे कार्यों और सहायक बुनियादी ढांचे की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान उन्होंने स्थानीय कॉफी बागानों का निरीक्षण किया, हाई-टेक कॉफी वाशिंग स्टेशन की कार्यप्रणाली को परखा और तौफेमा क्लस्टर के किसानों के साथ विस्तृत बातचीत की।
बैठक में भल्ला ने कहा कि कॉफी विकास को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए सड़क संपर्क में सुधार, आधुनिक प्रसंस्करण उपकरण, फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता नियंत्रण और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कॉफी यूएसपी परियोजना को एक व्यापक आजीविका और आर्थिक विकास पहल के रूप में लागू करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय समुदाय क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और मानव क्षमता का पूरा लाभ उठा सकें।
सहयोग और बहुफसली खेती से आय बढ़ाने की रणनीति
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सचिव ने एक संयुक्त दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार, कॉफी बोर्ड, स्थानीय प्रशासन, उत्पादक, तकनीकी संस्थान और निजी क्षेत्र के हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने राज्य सरकार और कॉफी बोर्ड से आग्रह किया कि वे केंद्रीय कृषि संस्थानों के साथ मिलकर कॉफी बागानों में उपयुक्त अंतर-फसलों (इंटरक्रॉपिंग) और संबद्ध कृषि गतिविधियों की संभावनाएं तलाशें। बागानों में अन्य फसलों को शामिल करने से भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार होंगे।
कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए जल संचयन प्रणाली, मशीनीकरण और आधुनिक उपकरणों की व्यवहार्यता पर काम किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से यह भी कहा कि वे औद्योगिक संगठनों, निवेशकों और निर्यातकों से संपर्क साधें ताकि कॉफी क्षेत्र में मशीनीकरण और ऑटोमेशन के लिए निवेश आकर्षित किया जा सके।
1981 से अब तक का सफर और स्थानीय चुनौतियां
इस अवसर पर विकास आयुक्त वाई किखेतो सेमा ने बताया कि नागालैंड में कॉफी की खेती की शुरुआत वर्ष 1981 में हुई थी। हालांकि, पर्याप्त जागरूकता की कमी, कमजोर बाजार संपर्कों और अन्य विविध चुनौतियों के कारण यह क्षेत्र अब तक अपनी पूरी आर्थिक क्षमता का दोहन नहीं कर पाया है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जहां भी तकनीकी रूप से अनुकूल हो, वे कॉफी के साथ काली मिर्च जैसी फसलों की खेती करके अपने बागानों में विविधता लाएं।
वहीं तौफेमा ग्राम परिषद के अध्यक्ष फुदुओलहौ केंस ने किसानों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि निराई-गुड़ाई और फसल कटाई के समय अधिक मजदूरी लागत के कारण किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने ब्रश कटर और कटाई से जुड़ी मशीनरी उपलब्ध कराने में मदद मांगी। इसके अलावा, उन्होंने सिंचाई और कटाई के बाद के कार्यों के लिए पानी की भारी कमी का उल्लेख करते हुए जल संचयन संरचनाओं, भंडारण टैंकों और सिंचाई सुविधाओं के निर्माण की आवश्यकता जताई।
बातचीत के दौरान भल्ला ने युवा कॉफी उत्पादक विबेई केंस के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने कॉफी के क्षेत्र में विशेष प्रमाणन हासिल करने के लिए वियतनाम की यात्रा की थी। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम स्थानीय कुशल पेशेवरों को तैयार करने और नागालैंड के पूरे कॉफी उद्योग को नई मजबूती देने में सहायक साबित होंगे।





















