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बघेलखंड की खास बखरी: बचे चावल का स्वादिष्ट उपाय, पर इन दो दिनों में न करें सेवन!खानपान
19 जून 2026, 7:08 am (132 दिन पहले)· 3

बघेलखंड की खास बखरी: बचे चावल का स्वादिष्ट उपाय, पर इन दो दिनों में न करें सेवन!

बघेलखंड की पारंपरिक बखरी रात के बचे चावल का स्वादिष्ट उपयोग करने का एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसे रविवार और बुधवार को बनाना या खाना वर्जित है।

अक्सर घरों में रात के खाने के बाद बचे हुए चावल को लेकर सुबह यह सवाल उठता है कि इनका क्या किया जाए। ऐसे में भारतीय पारंपरिक खानपान में इस समस्या का एक बेहद स्वादिष्ट समाधान छिपा है। हम आपको बघेलखंड की ऐसी ही एक पारंपरिक रसोई से रूबरू करा रहे हैं, जहाँ दूध और चावल के मेल से एक जादुई व्यंजन तैयार होता है। इस खास पकवान को स्थानीय लोग बखरी या बखीर कहते हैं, और इसके बिना वहाँ के त्योहार व उत्सव अधूरे माने जाते हैं। यह न सिर्फ आपकी मीठे की तलब को शांत करेगा, बल्कि बचे हुए चावलों का ऐसा लाजवाब उपयोग होगा कि आप उंगलियाँ चाटते रह जाएँगे।

बघेलखंड की रसोई का गौरव: बखरी

बघेलखंड की लोक संस्कृति और खानपान में बखरी का स्थान किसी शाही पकवान से कम नहीं है। प्राचीन काल से लेकर आज के आधुनिक दौर तक, इसे विशेष अवसरों, तीज-त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में बड़े चाव से बनाया जाता रहा है। इसे खासतौर पर गरमागरम दाल पूरी या सुहारी के साथ परोसने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही जीवंत है। यह केवल एक पकवान नहीं, बल्कि बघेलखंड के लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का एक माध्यम भी है।

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जब स्वाद से जुड़ी हो परंपरा: रविवार और बुधवार की मनाही

इस बेहद लोकप्रिय और स्वादिष्ट व्यंजन के साथ एक दिलचस्प मोड़ भी जुड़ा है। बखरी को बनाने और खाने को लेकर कुछ कड़े नियम हैं, जिनका पालन बघेलखंड के घरों में आज भी सख्ती से किया जाता है। स्थानीय निवासी Anjali Chaturvedi ने TrendKia को बताया कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार, हफ्ते के रविवार और बुधवार को घर में न तो बखरी बनाई जाती है और न ही इसका सेवन किया जाता है। इसके पीछे कई सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताएँ हैं, जिन्हें लोग आज भी बड़े सम्मान के साथ मानते हैं और उनका पालन करते हैं।

आसानी से घर पर बनाएं मलाईदार बखरी

अगर आप भी इस पारंपरिक स्वाद को अपने घर पर चखना चाहते हैं, तो इसे बनाने की विधि बेहद सरल है। सबसे पहले एक भारी तले वाले बर्तन या कड़ाही में एक लीटर दूध लेकर उसे अच्छी तरह गर्म करें। जब दूध में बढ़िया उबाल आ जाए, तो उसमें आधा कप Basmati चावल डालें। ध्यान रहे कि चावल को अच्छी तरह धोकर लगभग आधे घंटे के लिए पानी में भिगोया गया हो, और दूध में डालने से पहले हल्के हाथों से थोड़ा मैश कर लिया गया हो। अब गैस की आँच को धीमा कर दें। फिर दूध और चावल के इस मिश्रण को बीच-बीच में चमचे से चलाते रहें ताकि यह तले में चिपके नहीं। इसे तब तक पकाना है, जब तक चावल पूरी तरह से मुलायम न हो जाएँ और दूध गाढ़ा होकर अपनी मात्रा का आधा न रह जाए।

जब दूध पर्याप्त गाढ़ा हो जाए और चावल अच्छी तरह घुलमिल जाएँ, तब इसमें आधा कप चीनी, एक छोटा चम्मच हरी इलायची का पाउडर और अपनी पसंद के बारीक कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता डालें। अब इस मलाईदार खीर जैसी बखरी को चीनी पूरी तरह घुलने तक धीमी आँच पर पाँच मिनट और पकाएँ। आपकी गरमागरम और खुशबूदार बखरी तैयार है। आप चाहें तो इसे एकदम गरमागरम परोसें या फिर फ्रिज में रखकर ठंडी-ठंडी रबड़ी जैसी बखरी का आनंद लें।

सवाल-जवाब

बखरी क्या है?
बखरी, जिसे बखीर भी कहते हैं, भारत के बघेलखंड क्षेत्र का एक पारंपरिक मीठा व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से दूध और चावल से बनाया जाता है, अक्सर बचे हुए पके चावल का उपयोग करने के लिए।
बखरी बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या हैं?
मुख्य सामग्री में एक लीटर दूध, आधा कप Basmati चावल, आधा कप चीनी, एक छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे जैसे काजू, बादाम और पिस्ता शामिल हैं।
बघेलखंड में बखरी पारंपरिक रूप से कब खाई जाती है?
बघेलखंड में बखरी त्योहारों, उत्सवों और पारिवारिक आयोजनों का एक अभिन्न हिस्सा है, और इसे अक्सर दाल पूरी या सुहारी के साथ परोसा जाता है।
क्या बखरी बनाने या खाने के कोई खास नियम हैं?
हाँ, स्थानीय निवासी Anjali Chaturvedi ने TrendKia को बताया कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार, सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताओं के कारण रविवार और बुधवार को बखरी न तो बनाई जाती है और न ही इसका सेवन किया जाता है।
क्या बखरी को ठंडा परोसा जा सकता है?
हाँ, बखरी को गरमागरम परोसा जा सकता है या फिर फ्रिज में ठंडा करके रबड़ी जैसी बखरी का आनंद लिया जा सकता है।
Basmati चावल को कितनी देर भिगोना चाहिए?
Basmati चावल को अच्छी तरह धोकर दूध में डालने से पहले लगभग आधे घंटे के लिए पानी में भिगोना चाहिए।
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