घर के बने भोजन और रेस्टोरेंट के खान-पान में अक्सर स्वाद का एक बड़ा अंतर महसूस होता है। कई लोग यह मानते हैं कि व्यावसायिक रसोई या होटलों में किसी रहस्यमयी मसाले का प्रयोग किया जाता है, जिसके कारण उनकी दाल और सब्जियां अधिक जायकेदार लगती हैं। हालांकि, जमशेदपुर में मसाला बाजार के संचालक मानस बताते हैं कि स्वाद का असली राज किसी जादुई तत्व में नहीं, बल्कि सही मात्रा में मिलाए गए ताजा साबुत मसालों के संतुलन में छिपा है। यदि घर पर ही सही अनुपात में मसालों को भूनकर पीसा जाए, तो साधारण से साधारण डिश भी होटल जैसी खुशबूदार और लजीज बन सकती है।
14 साबुत मसालों का अनूठा मिश्रण
इस खास ऑल इन वन मसाले को तैयार करने के लिए रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 बुनियादी और खुशबूदार साबुत मसालों की जरूरत होती है। बाजार में उपलब्ध पहले से पिसे हुए पैकेटबंद मसालों की तुलना में ताजा भुने गए साबुत मसाले भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं। इस सीक्रेट मसाले को बनाने के लिए नीचे दी गई सामग्रियां एकत्र करनी होती हैं
- दालचीनी और लौंग: यह भोजन को गहरा स्वाद और मनमोहक खुशबू प्रदान करते हैं।
- छोटी इलायची और बड़ी इलायची: छोटी इलायची से मीठा सुगंधित अहसास मिलता है, जबकि बड़ी इलायची डिश को तीखा और गाढ़ा स्वाद देती है।
- काली मिर्च और सूखी लाल मिर्च: ये दोनों मसाले भोजन में प्राकृतिक तीखापन और बढ़िया रंग लाते हैं।
- शाही जीरा और सफेद जीरा: जीरे की दोनों किस्में पाचन और सुगंध दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
- तेजपत्ता, जावित्री और जायफल: यह सुगंधित तिकड़ी रेस्टोरेंट स्टाइल ग्रेवी की मुख्य पहचान मानी जाती है।
- सौंफ और धनिया के बीज: सौंफ से मिठास और ठंडक मिलती है, जबकि धनिया पाउडर ग्रेवी को थिकनेस और संतुलित बेस देता है।
- कसूरी मेथी: भुनी हुई थोड़ी सी कसूरी मेथी अंत में भोजन में शाही महक जोड़ती है।
मसाला भूनने और पीसने की सही तकनीक
मसाला तैयार करते समय तापमान और भूनने के समय का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। मानस के अनुसार, सभी साबुत मसालों को एक भारी तले की कढ़ाई में लेकर धीमी आंच पर हल्का सा सूखा भूनना चाहिए। तेज आंच पर भूनने से मसालों के प्राकृतिक तेल जल सकते हैं, जिससे उनका स्वाद कड़वा हो सकता है। धीमी आंच पर सिकने से मसालों की नमी पूरी तरह खत्म हो जाती है और उनके अंदर मौजूद प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल सक्रिय हो जाते हैं।
हल्का भूनने के बाद मसालों को आंच से उतारकर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब मसाले कमरे के तापमान पर आ जाएं, तब इन्हें मिक्सर ग्राइंडर में डालकर बारीक पीस लें। तैयार पिसे हुए मसाले को तुरंत किसी साफ और एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रख दें। एयरटाइट डिब्बे में रखने से मसाले की ताजी खुशबू हफ्तों तक बनी रहती है और उसमें नमी नहीं आती।
उपयोग की मात्रा और विभिन्न व्यंजनों में प्रयोग
इस खास मसाले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका प्रयोग बेहद कम मात्रा में किया जाता है। किसी भी डिश को बनाने के दौरान अंत में या तड़के के समय केवल आधा या एक चम्मच मसाला मिलाना ही पर्याप्त होता है। यह एक चम्मच मसाला पूरी डिश का जायका पूरी तरह बदलने में सक्षम है।
यह बहुपयोगी मसाला शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के पकवानों के लिए मुफीद है। इसका इस्तेमाल रोजमर्रा की आलू की सब्जी, अरहर या मूंग की दाल, पनीर की विभिन्न किस्मों, छोले, राजमा, वेज पुलाव, फ्राइड राइस और चिकन या मटन जैसी नॉनवेज डिशेज में किया जा सकता है। होटलों में भी शेफ रोज ताजा पिसे मसालों का ही प्रयोग करते हैं ताकि हर सर्विंग में एक समान ताजगी और सुगंध बनी रहे।
बचत, शुद्धता और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन विकल्प
बाजार के महंगे और मिलावटी मसालों की जगह घर पर तैयार किया गया यह मसाला हर लिहाज से फायदेमंद है। यह बेहद कम खर्च में तैयार हो जाता है और इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव या मिलावट की गुंजाइश नहीं रहती। जब आप घर आए मेहमानों या परिवार के सदस्यों को इस मसाले से बना खाना परोसेंगे, तो उन्हें साधारण दाल-सब्जी में भी किसी बड़े रेस्टोरेंट जैसा स्वाद मिलेगा। शुद्धता और स्वाद का यह संयोजन रोजमर्रा के भोजन को भी खास बना देता है।



















