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बिहार के कटिहार में मखाना से बन रही हैं ठेकुआ और कलाकंद जैसी मिठाइयां, सुमित सहगल की पहल से मिल रहा है नया स्वादखानपान
8 नव॰ 2026, 12:31 pm (6 मिनट पहले)· 0

बिहार के कटिहार में मखाना से बन रही हैं ठेकुआ और कलाकंद जैसी मिठाइयां, सुमित सहगल की पहल से मिल रहा है नया स्वाद

बिहार के कटिहार में मखाना से कलाकंद, बर्फी, पेड़ा, गजक और ठेकुआ जैसी मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। जेटा लेक ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से शुरू हुई इस पहल से 500 से अधिक किसान और 50 स्थानीय महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

पटना के पास स्थित कटिहार में मखाना अब केवल पारंपरिक खीर या साधारण व्यंजनों तक ही सीमित नहीं रह गया है। इसकी प्राकृतिक मिठास और पौष्टिक गुणों को बिल्कुल नए तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। इस दिशा में मखाना से कलाकंद, बर्फी, पेड़ा, गजक, ठेकुआ और सत्तू जैसे कई लजीज व्यंजन और मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। इस पूरे नवाचार की सबसे खास बात यह है कि इन उत्पादों को बनाने की प्रक्रिया में स्थानीय महिलाओं को भी बड़े पैमाने पर जोड़ा गया है। कटिहार के रहने वाले सुमित सहगल अपनी कंपनी जेटा लेक ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से मखाना के वैल्यू एडिशन के इस अनूठे काम को आगे बढ़ा रहे हैं।

मखाना जलेबी से हुई थी इस अनोखी शुरुआत

इस पूरे सफर की शुरुआत सबसे पहले मखाना जलेबी बनाने के साथ हुई थी। सुमित बताते हैं कि उनकी कंपनी की तरफ से पहली बार कटिहार में ही मखाना जलेबी तैयार की गई थी। इस प्रयोग की सफलता के बाद मखाना से अन्य मिठाइयां और खाद्य उत्पाद बनाने का सिलसिला तेजी से शुरू हुआ। अब उनकी पूरी टीम मखाना के जरिए पारंपरिक और बिल्कुल नए स्वाद वाले कई तरह के बेहतरीन प्रोडक्ट तैयार कर रही है। इस रचनात्मक कार्य में आत्मा यानी ATMA और कृषि विभाग के अधिकारियों का लगातार मार्गदर्शन और भरपूर सहयोग भी मिल रहा है, जिससे इस काम को और अधिक बढ़ावा मिल रहा है।

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पारंपरिक स्वाद और शुद्धता का रखा जा रहा है पूरा ध्यान

जेटा लेक ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से जो उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, उनमें मखाना बर्फी, कलाकंद, ठेकुआ, गजक और पेड़ा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा मखाना और चने को मिलाकर एक बहुत ही पौष्टिक सत्तू भी तैयार किया जा रहा है। मखाना कलाकंद में एक बेहतरीन स्वाद और हल्का सा खट्टापन लाने के लिए विशेष रूप से दही का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी उत्पादों को बनाते समय शुद्ध सामग्री और पारंपरिक मिठाई निर्माण की विधियों का पूरा ध्यान रखा जाता है। उदाहरण के लिए, मखाना बर्फी को बनाने में केवल शुद्ध घी और मखाना का ही उपयोग किया जाता है। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को मखाना से बनने वाली मिठाइयों का एक बिल्कुल नया अनुभव कराना है, ताकि खुले बाजार में इसकी एक मजबूत और अलग पहचान स्थापित हो सके।

सैकड़ों किसानों और महिलाओं को मिल रहा है रोजगार

इस पूरी पहल का एक बहुत बड़ा सामाजिक पहलू किसानों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी है। सुमित का कहना है कि उनका एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन सीधे तौर पर 500 से अधिक लोगों के साथ जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, मखाना से स्वादिष्ट मिठाइयां और अन्य उत्पाद तैयार करने के इस काम में करीब 50 महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी महिलाएं कटिहार की ही रहने वाली हैं। इस प्रकार मखाना का यह वैल्यू एडिशन स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए और बेहतरीन अवसर भी पैदा कर रहा है।

बाजार में क्या है मखाना से बनी इन मिठाइयों की कीमत

मखाना से तैयार इन विशेष उत्पादों की कीमतें उनकी सामग्री और गुणवत्ता के अनुसार तय की गई हैं। बाजार में मखाना बर्फी की कीमत 800 रुपये प्रति किलो रखी गई है। इसके अलावा मखाना ठेकुआ 1000 रुपये प्रति किलो और मखाना कलाकंद 900 से 1000 रुपये प्रति किलो की दर से ग्राहकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, मखाना पेड़ा की कीमत करीब 180 से 200 रुपये रखी गई है। इसके अतिरिक्त 100 ग्राम मखाना सत्तू की कीमत 70 से 100 रुपये के बीच तय की गई है। सुमित का यह भी कहना है कि फिलहाल उनका मुख्य मकसद बहुत ज्यादा मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि लोगों को मखाना से तैयार इन बिल्कुल नए उत्पादों का स्वाद चखाना और बाजार में इनकी एक स्थायी पहचान बनाना है।

जल्द ही ऑनलाइन बाजार में भी उतरेंगे ये उत्पाद

फिलहाल जेटा लेक ऑर्गेनाइजेशन अपने इन उत्पादों के विस्तार और उनकी बेहतर मार्केटिंग पर पूरी ताकत से काम कर रहा है। सुमित का कहना है कि उनकी कंपनी बहुत जल्द ही अपने इन सभी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की पूरी तैयारी में जुटी हुई है। उनकी यह पुरजोर कोशिश है कि अगले महीने तक ऑनलाइन बिक्री की पुख्ता व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया जाए, ताकि देश और दुनिया के अन्य हिस्सों के लोग भी आसानी से इन चीजों को खरीद सकें।

सवाल-जवाब

मखाना से कौन-कौन सी नई मिठाइयां तैयार की जा रही हैं?
मखाना से कलाकंद, बर्फी, पेड़ा, गजक, ठेकुआ और सत्तू तैयार किए जा रहे हैं।
इस पहल की शुरुआत करने वाले सुमित सहगल किस संगठन से जुड़े हैं?
सुमित सहगल अपनी कंपनी जेटा लेक ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से यह काम कर रहे हैं।
मखाना बर्फी और ठेकुआ की बाजार में क्या कीमत है?
मखाना बर्फी की कीमत 800 रुपये प्रति किलो और मखाना ठेकुआ की कीमत 1000 रुपये प्रति किलो है।
इस काम में कितने किसान और महिलाएं जुड़े हुए हैं?
इस पहल से 500 से अधिक किसान और कटिहार की करीब 50 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
मखाना कलाकंद में खट्टापन लाने के लिए किसका इस्तेमाल होता है?
मखाना कलाकंद में स्वाद और हल्का खट्टापन लाने के लिए दही का इस्तेमाल किया जाता है।
उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री कब से शुरू होने की योजना है?
कंपनी की कोशिश है कि अगले महीने तक ऑनलाइन बिक्री की व्यवस्था शुरू कर दी जाए।
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