रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की बैठक से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ी संभावनाबैंक ऑफ इंग्लैंड की क्लेयर लोम्बार्डेली ने दी सख्त मौद्रिक नीति की चेतावनी, ऊर्जा कीमतों और मजदूरी दबाव पर नजरसंयुक्त राष्ट्र महासभा में जेलेंस्की का बड़ा वार, पुतिन को बताया युद्ध फैलाने वाला पेशेंट जीरोजापानी येन और वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और ट्रंप-शी बैठक पर टिकी नजरेंइंफाल में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, हथियार और गोला-बारूद के जखीरे के साथ तीन गिरफ्तारवैश्विक युद्धों के बीच वार्ता ही समाधान, सुरक्षा परिषद के वीटो पर उठे सवालहैदराबाद में आशियाना खरीदने से पहले जांच लें एफटीएल और बफर जोन, कागजी रजिस्ट्री भी नहीं रोकेगी विध्वंसअमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से लुढ़का बिटकॉइन, पेपे और वर्ल्डकॉइन में भारी गिरावटराजस्थान में रेंजर प्रताप सिंह की हत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य प्रशासन से माँगा एक्शन प्लानकच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर से भारतीय रुपया दबाव में, वैश्विक बाजारों में हलचल
विधानसभा से न्यू सचिवालय की सड़क बनी मांसाहार का ठिकाना, मटन प्रेमियों की जुटती है भारी भीड़खानपान
24 सित॰ 2026, 2:04 pm (14 मिनट पहले)· 0

विधानसभा से न्यू सचिवालय की सड़क बनी मांसाहार का ठिकाना, मटन प्रेमियों की जुटती है भारी भीड़

राजधानी में सचिवालय मार्ग के किनारे लगभग 50 ठेलों पर देसी और चंपारण मटन की महक बिखरती है, जहां कामकाजी दिनों में लोग किफायती भोजन के लिए पहुंचते हैं।

राजधानी के प्रशासनिक गलियारे में इन दिनों दोपहर के समय एक अलग ही तरह की रौनक देखने को मिलती है। बिहार विधानसभा से न्यू सचिवालय के बीच गुजरने वाली सड़क के किनारे लगभग 200 से 300 मीटर की दूरी में मांसाहारी व्यंजनों की एक अनूठी मंडी तैयार हो चुकी है। मटन के शौकीनों के लिए यह जगह किसी पसंदीदा ठिकाने से कम नहीं है, जहां महंगे होटलों और चमचमाते डाइनिंग हॉल के बजाय खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे ही गरमागरम स्वाद परोसा जाता है। जैसे ही कोई इस रास्ते पर कदम रखता है, एक दुकान से दूसरी दुकान तक लगातार तैरती मसालों और मटन की महक लोगों को अपनी ओर खींच लेती है।

फुटपाथ पर सजी करीब 50 दुकानें

इस पूरे मार्ग पर लगभग 50 के आसपास छोटी दुकानें और ठेले कतार में लगे रहते हैं। यहां न तो कोई बड़ा ढाबा नजर आता है और न ही किसी भव्य रेस्टोरेंट का बोर्ड लगा है। फुटपाथ पर साधारण ठेले लगे हैं, जिनके बगल में कुछ प्लास्टिक की कुर्सियां और मेजें बिछा दी गई हैं। दोपहर का समय होते ही आसपास के लोग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी करते हैं, कुर्सियों पर बैठते हैं और गरमागरम मटन के साथ रोटी या चावल का आनंद लेने लगते हैं। इस बाजार को चलाने वालों में विविधता भी दिखती है, जहां कई स्टॉलों को महिलाएं संभालती हैं तो कई जगहों पर बुजुर्ग कारीगर अपने पारंपरिक सलीके से ग्राहकों को भोजन परोसते मिलते हैं।

ये भी पढ़ें

देसी से लेकर चंपारण तक के जायके

इस सड़क पर खानपान के शौकीनों को कई तरह की शैलियों का स्वाद मिलता है। कुछ ठेलों पर पारंपरिक देसी तरीके से पका हुआ मटन मिलता है, जबकि कई दुकानों पर चंपारण शैली के खास मसालों और हांडी वाले जायके की पेशकश की जाती है। इन तमाम दुकानों के बीच बंगाली दादा होटल नाम की दुकान काफी चर्चा में रहती है। इस खास दुकान पर अक्सर अन्य ठेलों के मुकाबले अधिक भीड़ देखी जाती है और वहां रखी कुर्सियां हमेशा ग्राहकों से भरी रहती हैं। इसके बावजूद बाकी ठेलों पर भी ग्राहकों की कमी नहीं रहती, क्योंकि हर दुकान के पास अपने नियमित खाने वाले मौजूद हैं।

चिकन, मछली और 100 रुपये में पेटभर भोजन

मांसाहारी भोजन की तलाश में आने वाले लोगों के लिए यहां केवल मटन तक ही सीमित विकल्प नहीं हैं। कई दुकानों के मेनू में चिकन और तली या तरीदार मछली भी उपलब्ध कराई जाती है। ग्राहक अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से चावल अथवा रोटी चुन सकते हैं, जिसके साथ ताजी कटी प्याज और सलाद भी दिया जाता है। कीमतों की दृष्टि से हर विक्रेता का दर तय करने का पैमाना थोड़ा भिन्न हो सकता है, परंतु आमतौर पर लगभग 100 रुपये के बजट में एक व्यक्ति के लिए भरपेट भोजन का प्रबंध हो जाता है। कम खर्च में जायकेदार मांसाहार का शौक पूरा करने वालों के लिए यह इलाका काफी मुफीद साबित हो रहा है।

कामकाजी दिनों और दोपहर में पहुंचना सही

इस पूरे बाजार की हलचल सप्ताह के हर दिन एक समान नहीं रहती। इलाका बड़े सरकारी कार्यालयों के ठीक पास स्थित है, इसलिए सामान्य कामकाजी दिनों में दोपहर के वक्त सरकारी कर्मचारियों और आगंतुकों की भारी उपस्थिति देखने को मिलती है। इसके विपरीत, धार्मिक आस्था के चलते मंगलवार और गुरुवार को मांसाहार खाने वालों की संख्या में कमी आ जाती है, जिससे इन दिनों बहुत कम दुकानें लगती हैं। रविवार को भी अधिकांश विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखते हैं और इक्का-दुक्का ठेले ही नजर आते हैं। ठीक वैसे ही जैसे चाट या गोलगप्पे के ठेले एक के बाद एक कतार में दिखते हैं, उसी तर्ज पर मटन के ठेलों की यह श्रृंखला भी कामकाजी दिनों की दोपहर में ही अपने पूरे शबाब पर होती है।

सवाल-जवाब

यह मटन और चिकन बाजार किस स्थान पर लगता है?
यह बाजार बिहार विधानसभा से लेकर न्यू सचिवालय के बीच सड़क किनारे फुटपाथ पर 200 से 300 मीटर के दायरे में लगता है।
इस इलाके में लगभग कितनी दुकानें संचालित होती हैं?
इस छोटे से हिस्से में करीब 50 के आसपास ठेले और छोटी दुकानें लगती हैं।
यहां भोजन की सामान्य कीमत कितनी है?
आमतौर पर लगभग 100 रुपये में एक व्यक्ति के लिए भरपेट भोजन उपलब्ध हो जाता है।
मटन के अलावा यहां और क्या खाने को मिलता है?
मटन के साथ-साथ कई ठेलों पर चिकन और मछली भी चावल, रोटी व सलाद के साथ परोसी जाती है।
कौन सी दुकान यहां सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है?
दुकानों में बंगाली दादा होटल काफी लोकप्रिय है, जहां अक्सर अन्य दुकानों से ज्यादा भीड़ देखी जाती है।
सप्ताह के किन दिनों में यहां दुकानें कम लगती हैं या बंद रहती हैं?
मंगलवार और गुरुवार को मांसाहार खाने वाले कम होने से कम दुकानें लगती हैं, जबकि रविवार को अधिकांश दुकानें बंद रहती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp