रोजमर्रा की दाल, रोटी और साधारण सब्जी खाकर अगर जुबान ऊब चुकी है, तो भोजन की थाली में पारंपरिक तीखापन जोड़ने का वक्त आ गया है। आधुनिक रसोई में मिक्सी का उपयोग आम बात हो चुका है, लेकिन बिजली के ब्लेड में बारीक पिसी चटनी वह असली बनावट और स्वाद नहीं दे पाती जो पारंपरिक खरल या सिलबट्टे पर कूटने से मिलता है। राजस्थान की ग्रामीण रसोई का यह क्लासिक व्यंजन न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि साधारण रोटी के साथ भी एक शानदार दावत जैसा अनुभव देता है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में गर्म बाजरा रोटी के साथ इसका मेल लाजवाब माना जाता है।
छाछ में मिर्च भिगोने का पहला चरण
इस पारंपरिक चटनी की शुरुआत सही सामग्री के चयन और उसकी तैयारी से होती है। सबसे पहले 10 से 12 कश्मीरी सूखी लाल मिर्च लें और उन्हें 1 कप छाछ के अंदर लगभग 1 घंटे के लिए भिगो दें। कश्मीरी लाल मिर्च का इस्तेमाल करने से चटनी का रंग बेहद गहरा और खूबसूरत आता है, जबकि इसका तीखापन संतुलित रहता है जिससे इसे हर कोई आसानी से खा सकता है। यदि आपके पास पर्याप्त समय है या आप सुबह जल्दी तैयारी करना चाहते हैं, तो इन मिर्चों को पूरी रात के लिए भी छाछ में भिगोकर रखा जा सकता है। छाछ का हल्का खट्टापन मिर्च के रेशों को पूरी तरह नरम कर देता है, जिससे आगे कूटने की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाती है।
पत्थर के सिलबट्टे पर कूटने का तरीका
मिर्च अच्छी तरह फूल जाने के बाद मिक्सी निकालने के बजाय मसाला कूटने वाला पत्थर का सिलबट्टा या खरल तैयार करें। भीगी हुई मिर्चों को छाछ से बाहर निकालकर कूटने वाले पॉट में डालें। इसके साथ ही इसमें आधा चम्मच जीरा और स्वादानुसार थोड़ा नमक शामिल करें। छाछ में देर तक भीगे रहने के कारण मिर्च के छिलके इतने मुलायम हो जाते हैं कि वे पत्थर के दबाव से बहुत आसानी से कुचलने लगते हैं। जब लाल मिर्च हल्की दरदरी कूट जाए, तब इसमें आधा कप छिला हुआ ताजा लहसुन मिला दें।
सही बनावट और सामग्री का संतुलन
लहसुन और मिर्च के इस मिश्रण को अपनी पसंद के अनुसार बारीक या दरदरा रखा जा सकता है। प्रामाणिक राजस्थानी शैली में इसे हमेशा थोड़ा मोटा और दरदरा ही कूटा जाता है, क्योंकि पत्थरों के बीच कुचले गए लहसुन से निकलने वाले प्राकृतिक तेल और रस चटनी में एक बेमिसाल स्वाद भर देते हैं। कूटने के अंतिम चरण में बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया और जरूरत अनुसार अतिरिक्त नमक मिला लें। हालांकि यदि आप इस चटनी को लंबे समय तक स्टोर करके रखने की योजना बना रहे हैं, तो हरा धनिया डालने से बचें, क्योंकि ताजी पत्तियों की नमी चटनी की शेल्फ लाइफ को कम कर सकती है।
सरसों के तेल का तड़का और पकाने की विधि
सभी चीजों को आपस में अच्छी तरह एकसार करने के बाद चटनी को कच्चा भी परोसा जा सकता है, परंतु इसे हफ्तों तक सुरक्षित रखने और इसका असली निखार लाने के लिए तेल में भूनना जरूरी होता है। एक पैन में 3 चम्मच सरसों का तेल डालकर मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म करें। तेल की मात्रा अपनी जरूरत के मुताबिक थोड़ी कम या ज्यादा की जा सकती है। जब तेल गर्म हो जाए, तब इसमें एक चौथाई चम्मच जीरा और आधा चम्मच हींग का तड़का लगाएं। हींग की तेज खुशबू आते ही तैयार की गई कुटी चटनी पैन में डाल दें।
धीमी आंच पर भुनाई और खट्टापन
अब गैस की आंच धीमी कर दें और चटनी को लगातार चलाते हुए 4 से 5 मिनट तक अच्छी तरह पकाएं। चूंकि मिर्च को छाछ में भिगोया गया था, इसलिए उसकी सारी नमी भाप बनकर उड़ जानी चाहिए। जब पैन के किनारों से तेल अलग होकर तैरने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि चटनी पूरी तरह पक चुकी है। अंत में चटनी के तीखेपन को संतुलित करने और हल्का खट्टापन जोड़ने के लिए आधा चम्मच आमचूर पाउडर मिलाएं और अच्छी तरह चलाकर गैस बंद कर दें। तैयार चटनी को पूरी तरह ठंडा करके कांच के जार में भरकर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।



















