चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतामेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधराजस्थान में बदला मौसम का मिजाज, अर्नब तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से झमाझम बारिशअलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रत1 नवंबर से चमक जाएगी इन 6 राशियों की किस्मत, मंगल, सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बरसाएंगे विशेष कृपाकर्नाटक में बस यात्रा जल्द हो सकती है महंगी, 4 नवंबर को हो सकता है किराए में बढ़ोतरी का ऐलानऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामनेहमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिसपश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर वापस भेजा जाएगा, शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुखअमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षता
छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाली अनोखी देसी सब्जी, बिना पैसे खर्च किए ऐसे बनती है खास कोचई पत्ता पसियाखानपान
25 अग॰ 2026, 11:38 am (66 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाली अनोखी देसी सब्जी, बिना पैसे खर्च किए ऐसे बनती है खास कोचई पत्ता पसिया

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण बरसात के मौसम में जंगलों से मिलने वाले कोचई पत्तों को सुखाकर चावल के पसिया के साथ मिलाकर एक बेहद स्वादिष्ट और पारंपरिक सब्जी तैयार करते हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाकों में बरसात के मौसम के दौरान एक खास और पारंपरिक देसी हरी सब्जी बनाने का चलन काफी पसंद किया जाता है। आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में कोचई पत्ते की मांग और लोकप्रियता काफी बढ़ गई है, जिसे स्थानीय लोग सीधे जंगलों से चुनकर लाते हैं और फिर उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित रख लेते हैं। जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला यह कोचई पत्ता ग्रामीणों के लिए किसी स्वाद के खजाना से कम नहीं है। इन पत्तों को धूप में सुखाकर लंबे समय तक आसानी से संरक्षित रखा जा सकता है, जिसके कारण ग्रामीण साल के किसी भी मौसम में इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनाकर इसका लुत्फ उठा सकते हैं। खानपान की यह प्राचीन परंपरा ग्रामीणों को बाजार की महंगी सब्जियों पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम करने में मदद करती है।

स्थानीय निवासी सनी माझी ने इस पारंपरिक व्यंजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान ग्रामीण जंगलों के भीतर जाकर कोचई के ताजे पत्ते काटते हैं और उन्हें अपने घरों तक लेकर आते हैं। इसके बाद इन पत्तों को धूप में पूरी तरह से सुखाया जाता है। एक बार अच्छी तरह सूख जाने के बाद इन पत्तों को लंबी अवधि तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर साल के अलग-अलग महीनों में इसकी सब्जी तैयार की जाती है।

ये भी पढ़ें

सनी राम माझी के बताए अनुसार, धूप में पहले से सुखाए गए इन कोचई पत्तों को बाद में सब्जी पकाने के लिए तैयार किया जाता है। इस अनोखी रेसिपी में चावल पकाने के बाद बचा हुआ माड़ यानी पसिया, नमक, मिर्च, तेल और खट्टे टमाटर का इस्तेमाल करके स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है। स्थानीय ग्रामीणों का ऐसा मानना है कि चावल के बचे हुए पसिया के साथ तैयार होने वाली इस पारंपरिक सब्जी का स्वाद बेहद खास और लाजवाब होता है, जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगती है।

सनी राम माझी का यह भी कहना है कि यह कोई आधुनिक या नई रेसिपी नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में यह परंपरा बहुत लंबे समय चली आ रही है। बरसात के दिनों में जंगल से मिलने वाले इन कोचई पत्तों को ग्रामीण अपने घर लाते हैं और इन्हें धूप में सुखाकर आने वाले दिनों के लिए सुरक्षित रख लेते हैं। गांव के लोगों का बचपन इन पारंपरिक स्वादों और व्यंजनों की यादों से गहराई से जुड़ा हुआ है।

चूंकि कोचई पत्ता पूरी तरह से जंगलों में मुफ्त में मिल जाता है, इसलिए ग्रामीणों को बरसात के इस मौसम में बाजार से हरी सब्जियां खरीदने की कोई खास आवश्यकता नहीं पड़ती है। इन पत्तों को सुखाकर लंबे समय तक इस्तेमाल करने की इस कला के कारण उनकी बाजार पर निर्भरता काफी कम हो जाती है और वे पूरी तरह से अपनी प्राकृतिक संपदा पर निर्भर रहते हैं।

सवाल-जवाब

कोचई पत्ता सब्जी बनाने के लिए पत्तों को कैसे संरक्षित किया जाता है?
बरसात के मौसम में जंगलों से लाए गए कोचई पत्तों को धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
इस पारंपरिक सब्जी को बनाने में किस मुख्य सामग्री का उपयोग होता है?
इस सब्जी को तैयार करने के लिए सूखे कोचई पत्तों के साथ चावल का बचा हुआ माड़ यानी पसिया, नमक, मिर्च, तेल और टमाटर मिलाए जाते हैं।
यह पारंपरिक सब्जी किस क्षेत्र में बनाई जाती है?
यह पारंपरिक व्यंजन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाकों में काफी लोकप्रिय है।
कोचई पत्ता सब्जी खाने से ग्रामीणों को क्या लाभ मिलता है?
इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और इसके उपयोग से ग्रामीणों की बाजार की सब्जियों पर निर्भरता कम होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp