सर्दियों में मूली सब्जी की टोकरी में सबसे ज्यादा बचती है और अक्सर समझ नहीं आता कि इसका क्या किया जाए. आंध्र प्रदेश के घरों में इसी दुविधा का हल एक तीखी और खुशबूदार चटनी के रूप में निकाला गया है, जिसे मुलंगी चटनी कहा जाता है. सलाद या पराठे तक सीमित समझी जाने वाली मूली इस रेसिपी में एक बिल्कुल नया रूप ले लेती है.
नारियल, भुने मसाले, इमली और तड़के का मेल इस चटनी को इडली, डोसा, उपमा और गरम चावल के साथ परोसने लायक बनाता है. सामग्री घर में आसानी से मिल जाती है, तेल भी बहुत कम लगता है और विधि इतनी सरल है कि पहली बार बनाने वाला भी इसे आसानी से बना सकता है. जिन लोगों को मूली का तीखा स्वाद पसंद नहीं, उनके लिए भी यह चटनी एक अच्छा मौका है इसे दोबारा आजमाने का.
मूली से बनी चटनी लोगों को क्यों भाती है
कई लोग मूली की कच्ची गंध और उसके तीखेपन की वजह से इसे पसंद नहीं करते. लेकिन जब मूली को तेज आंच पर थोड़ी देर भून लिया जाता है, तो उसकी यह कच्ची महक काफी हद तक कम हो जाती है. इसके बाद जब यह नारियल, धनिया, जीरा और इमली के साथ मिलती है, तो पूरी चटनी का स्वाद ही बदल जाता है. यही कारण है कि मुलंगी चटनी में तीखापन तो रहता है, लेकिन वह भारी बिल्कुल नहीं लगता, हर सामग्री का अपना स्वाद अलग से महसूस होता है.
आंध्र स्टाइल में तैयार करने का तरीका क्यों अलग है
आंध्र प्रदेश के ज्यादातर घरों में मूली को बहुत देर तक पकाया नहीं जाता, इसे सिर्फ हल्का सा भून लिया जाता है ताकि उसकी नैसर्गिक मिठास बनी रहे. न तो इसमें कुछ भी डीप फ्राई करने की जरूरत होती है, न ही ढेर सारे मसाले डालने पड़ते हैं. चंद आसान चरणों में तैयार हो जाने वाली यह चटनी अपना पारंपरिक स्वाद पूरी तरह बनाए रखती है.
चटनी बनाने के लिए क्या चाहिए
इस चटनी की मुख्य सामग्री बारीक कटी मूली, प्याज, आधा कप ताजा कद्दूकस किया नारियल, करी पत्ता, इमली, हल्दी और नमक है. तड़के के लिए तेल, सरसों के दाने, जीरा, सूखी लाल मिर्च और हींग चाहिए, जबकि मसाला पाउडर के लिए धनिया, जीरा और सूखी लाल मिर्च को अलग से भूनकर पीसा जाता है.
मुलंगी चटनी बनाने की पूरी विधि
शुरुआत में कड़ाही में तेल गर्म कर लें और उसमें बारीक कटी मूली डालकर तेज आंच पर कुछ मिनट तक भूनें, जब तक वह थोड़ी नरम न हो जाए. इसके बाद कटा हुआ प्याज डालें और तब तक पकाएं जब तक वह पारदर्शी न दिखने लगे. अब इसी मिश्रण में नारियल, करी पत्ता, इमली, हल्दी और नमक डालकर करीब दो मिनट तक चलाते रहें, फिर गैस बंद करके इसे पूरी तरह ठंडा होने दें.
इसी बीच एक अलग पैन में बिना तेल डाले धनिया, जीरा और सूखी लाल मिर्च को हल्का सा भून लें. जैसे ही इनसे खुशबू आने लगे, इन्हें ठंडा करके बारीक पीस लें. अब ठंडा हो चुका मूली वाला मिश्रण और यह मसाला पाउडर दोनों को मिक्सर में डालकर हल्का दरदरा पीस लें, इसे बहुत महीन करने की जरूरत नहीं है.
आखिर में एक छोटे पैन में तेल गर्म करके उसमें सरसों के दाने, जीरा, सूखी लाल मिर्च, हींग और करी पत्ता डालकर तड़का तैयार करें. इस गरमागरम तड़के को तैयार चटनी के ऊपर डालकर अच्छी तरह मिला लें.
दरदरी बनावट ही असली स्वाद की चाबी है
इस चटनी का पूरा मजा तभी आता है जब इसकी बनावट थोड़ी दरदरी रहे. अगर इसे बहुत ज्यादा बारीक पीस दिया जाए, तो मूली, नारियल और मसालों का अलग-अलग स्वाद पहचानना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से दक्षिण भारत के कई घरों में इसे जानबूझकर हल्का मोटा ही रखा जाता है.
किन व्यंजनों के साथ परोसें
यह चटनी इडली, डोसा, उपमा और गरम चावल, सभी के साथ बेहद अच्छी लगती है. अगर सुबह जल्दी में नाश्ता बनाना हो, तो सिर्फ इडली और यह चटनी परोसकर भी पूरा स्वाद पाया जा सकता है.
बचाकर रखने का सही तरीका
मुलंगी चटनी का असली स्वाद तभी मिलता है जब इसे ताजा खाया जाए. अगर कुछ चटनी बच जाए, तो इसे एयरटाइट डिब्बे में भरकर फ्रिज में 24 घंटे तक रखा जा सकता है. परोसने से पहले इसे कुछ देर के लिए कमरे के तापमान पर रख दें और एक बार अच्छी तरह चला लें, क्योंकि नारियल वाली चटनी फ्रिज में रखने पर थोड़ी गाढ़ी हो जाती है.
इन गलतियों से बचें
- गरम मिश्रण को तुरंत मिक्सर में डालकर न पीसें.
- मूली को धीमी आंच पर बहुत देर तक न पकाएं.
- जरूरत से ज्यादा इमली डालने से बचें.
- चटनी को बहुत ज्यादा पतला या एकदम स्मूद न बनाएं.
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो चटनी का स्वाद कई गुना निखर जाता है.
जो लोग रोज की एक जैसी नारियल या टमाटर की चटनी से ऊबकर कुछ नया ढूंढ रहे हैं, उनके लिए आंध्र स्टाइल मुलंगी चटनी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. यह कम समय में बन जाती है और आम सी दिखने वाली मूली को भी एक स्वादिष्ट डिश में बदल देती है. एक बार चख लेने के बाद यह पसंदीदा चटनियों की फेहरिस्त में शामिल हो सकती है.





















