महादेव सट्टा ऐप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कारोबारी विकास गर्ग को अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में 24 जुलाई तक भेज दिया है। जांच एजेंसी इस दौरान यह पता लगाने में जुटी है कि सट्टेबाजी से मिले पैसे को कहां और कैसे लगाया गया।
पूछताछ में दिखाए गए बैंक दस्तावेज
ईडी अधिकारियों ने रिमांड के दौरान विकास गर्ग के सामने बैंक लेनदेन और कई वित्तीय कागजात रखे हैं ताकि उनकी संपत्तियों का पूरा सिलसिला समझा जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुटाई गई अवैध रकम को अलग अलग कंपनियों और संपत्तियों में लगाया गया ताकि उसे वैध कारोबार जैसा दिखाया जा सके।
1175 करोड़ में हुआ अमेरिकी कंपनी का सौदा
जांच में यह बात सामने आई कि इसी सट्टेबाजी की कमाई से अमेरिका की सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स इंक. को करीब 1175 करोड़ रुपये देकर खरीदा गया। ईडी के मुताबिक विकास गर्ग के पास इस कंपनी की 97.58 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और यह पैसा किन किन खातों से होकर गुजरा।
गिरफ्तारी से पहले ही अटैच हो चुकी थी संपत्ति
विकास गर्ग को गिरफ्तार करने से पहले ही ईडी उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुकी थी। इसमें दिल्ली में एक शानदार बंगला, महंगी जमीनें, इक्विटी शेयर और कुछ अन्य निवेश शामिल बताए गए हैं।
अब तक करीब 4000 करोड़ की संपत्ति निशाने पर
ईडी का कहना है कि इस पूरे केस में देश और विदेश मिलाकर अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें कुछ कुर्क की गई है, कुछ जब्त हुई है और कुछ फ्रीज कर दी गई है। एजेंसी को शक है कि अवैध कमाई को असली रंग देने के लिए दुबई, मॉरीशस और ब्रिटेन की कंपनियों में लगाया गया, और इसके लिए एफसीसीबी, एफडीआई, एफपीआई और क्यूआईपी जैसे निवेश रास्तों का सहारा लिया गया। ये वे रास्ते हैं जिनसे आमतौर पर विदेशी पूंजी वैध तरीके से किसी कंपनी में आती है, इसलिए एजेंसी को शक है कि पैसों का असली स्रोत छिपाने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया।
हर महीने 450 करोड़ की कमाई का आरोप
ईडी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज का नेटवर्क हर महीने तकरीबन 450 करोड़ रुपये की अवैध कमाई करता था। इस रकम को शेल कंपनियों, फर्जी बिलिंग और नकद लेनदेन के जरिए घुमाकर वैध बनाने की कोशिश की जाती थी। फिलहाल एजेंसी इस पूरे नेटवर्क में शामिल बाकी लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।




















