आज के इस भागदौड़ भरे दौर में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना कई बार एक चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में यदि खानपान में कुछ प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को स्थान दिया जाए, तो शरीर को आवश्यक मजबूती मिल सकती है। शतावरी और मोरिंगा यानी सहजन ऐसी ही दो प्रमुख औषधीय और पौष्टिक चीजें हैं, जिनका उपयोग प्राचीन समय से ही आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय रसोई में किया जाता रहा है।
शतावरी का उपयोग विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में प्रमुखता से किया जाता है। इसके अलावा, यह पाचन क्रिया को सुधारने और शरीर की सामान्य सहनशक्ति व ताकत बढ़ाने में भी मददगार मानी जाती है। शतावरी के चूर्ण को आमतौर पर हल्के गर्म दूध या पानी में घोलकर सेवन किया जाता है। यदि आप इसे अपनी दिनचर्या में जोड़ना चाहते हैं, तो हमेशा उत्पाद के पैकेट पर निर्देशित मात्रा के अनुसार ही इसका सेवन करें ताकि उचित परिणाम मिल सकें।
बहुत से लोग रात को बिस्तर पर जाने से ठीक पहले शतावरी को गुनगुने दूध के साथ लेना पसंद करते हैं। यदि कोई व्यक्ति दूध का सेवन नहीं करना चाहता है, तो वह इसे हल्के गर्म पानी के साथ भी ले सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए सभी के लिए एक ही मात्रा या सेवन का तरीका उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है। यदि आप पहले से किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की दवा ले रहे हैं या फिर गर्भवती हैं, तो शतावरी का सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
मोरिंगा को आम बोलचाल की भाषा में सहजन के नाम से जाना जाता है। इसकी हरी पत्तियों में प्रचुर मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें मुख्य रूप से प्रोटीन, विभिन्न विटामिन्स और मिनरल्स शामिल हैं। मोरिंगा की पत्तियों को अपनी दैनिक सब्जी, दाल, सूप या चटनी में आसानी से शामिल किया जा सकता है। यदि आपके पास ताजी पत्तियां उपलब्ध नहीं हैं, तो बाजार में मिलने वाले मोरिंगा पाउडर का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। इसे दाल, सब्जी, सूप या शेक में थोड़ी सी मात्रा में मिलाकर खाया जा सकता है। इस बात की कोई बाध्यता नहीं है कि इसे खाली पेट ही लिया जाए, बल्कि इसे सामान्य भोजन के साथ भी आसानी से खाया जा सकता है।
डाइट में शतावरी और मोरिंगा को कैसे शामिल करें?
यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि शतावरी और मोरिंगा दोनों का सेवन एक साथ ही किया जाए। आप अपनी व्यक्तिगत जरूरत, शारीरिक स्थिति और पसंद के आधार पर इनमें से किसी एक या दोनों को अलग-अलग तरीकों से अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। जहां शतावरी को मुख्य रूप से दूध या पानी में मिलाकर लिया जाता है, वहीं मोरिंगा को अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना बेहद आसान और सुविधाजनक होता है।



















