हर भारतीय रसोई में दाल रोज की थाली का हिस्सा है। अरहर हो या मूंग, मसूर हो या उड़द, हर दाल को बनाने का अपना अंदाज है। लेकिन जो एक चीज दाल के स्वाद को सबसे ऊपर ले जाती है, वह है तड़का। तेल या घी में मसाले भुनकर जब खौलती दाल में पड़ते हैं तो खुशबू पूरे घर में फैल जाती है और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। दिक्कत तब आती है जब तड़का लगाते वक्त छोटी-छोटी चूक हो जाती है, और तभी दाल का जायका या तो फीका रह जाता है या उसमें कड़वाहट आ जाती है।
सबसे बड़ी गलती जो ज्यादातर लोग करते हैं, वह है तेल या घी को हद से ज्यादा गरम कर देना। जब बर्तन में तेल बहुत तेज तप जाता है तो मसाले पलक झपकते ही जल जाते हैं। जला हुआ जीरा, झुलसा लहसुन या काली पड़ी लाल मिर्च पूरी दाल की खुशबू बिगाड़ देती है। इसलिए तड़का हमेशा मध्यम आंच पर लगाना सही माना जाता है।
जीरा डालने का सही वक्त
जीरे को दाल के तड़के की जान कहा जाता है, लेकिन अगर इसे गलत समय पर डाल दिया जाए तो इसका असली स्वाद बाहर ही नहीं आता। तरीका यह है कि तेल या घी गरम होने के बाद जैसे ही जीरा चटकने लगे, ठीक उसी पल बाकी मसाले डालें। ऐसा करने पर जीरे के भीतर का प्राकृतिक तेल बाहर निकलता है और वही गहरी खुशबू देता है।
लहसुन और प्याज कितना भूनें
लहसुन वाला तड़का बहुतों को भाता है, पर ध्यान रखना जरूरी है कि यह जले नहीं। हल्का सुनहरा होने तक भुना लहसुन दाल में लाजवाब स्वाद घोल देता है। अगर यह ज्यादा भुनकर जल गया तो स्वाद में कड़वापन घुल जाता है। यही बात लाल मिर्च पाउडर पर भी लागू होती है। बहुत तेज गरम तेल में डालते ही मिर्च जल सकती है और उसका रंग भी बिगड़ जाता है। इसी वजह से कई लोग गैस बंद करने के बाद लाल मिर्च डालते हैं, ताकि उसका चटक रंग और स्वाद दोनों बने रहें।
तड़के के बाद दाल को दम पर रखें
तड़का हमेशा गरम दाल में ही डालें, इससे मसाले अच्छी तरह घुल-मिल जाते हैं। तड़का डालने के बाद दाल को कुछ मिनट ढककर रख दें, इससे मसालों की खुशबू दाल के भीतर तक उतर जाती है। यही कारण है कि कई जगह तड़का लगाने के बाद दाल को थोड़ी देर दम पर छोड़ा जाता है। याद रखें, दाल का स्वाद सिर्फ नमक और मसालों से तय नहीं होता। दाल की क्वालिटी, उसे पकाने का तरीका और तड़के का संतुलन भी उतना ही मायने रखता है। घी में लगा तड़का दाल को ज्यादा रिच और भरपूर स्वाद देता है, जबकि तेल में लगाने पर एक हल्का और अलग फ्लेवर मिलता है।













