बिहार के दरभंगा जिले में मांसाहारी व्यंजनों के शौकीनों के लिए ग्रामीण अंचल में एक खास ठिकाना चर्चा का विषय बना हुआ है। हायाघाट प्रखंड के विराम पट्टी इलाके में स्थित यह भोजनालय अपने पारंपरिक और अलग तरह के मांसाहारी व्यंजनों के लिए पहचाना जा रहा है। गांव के शांत माहौल में मौजूद होने के बाद भी यहां मिलने वाले खाने की विविधता और मुफीद कीमतें लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं, जिसके चलते यह जगह खान-पान के प्रेमियों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
परंपरागत व्यंजनों की विस्तृत फेहरिस्त
इस भोजनालय के संचालक संजय कुमार सहनी बीते कई वर्षों से यहां अपनी दुकान चला रहे हैं। वे बताते हैं कि उनकी थाली में केवल पारंपरिक मटन या चिकन तक ही चीजें सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय खान-पान से जुड़े अन्य व्यंजन भी शामिल किए गए हैं। मेन्यू में खस्सी का मीट, मुर्गा, पचौनी, मछली, घोंघी और अंडा नियमित तौर पर तैयार किया जाता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले भोजन प्रेमी इन पारंपरिक स्वादों का आनंद लेने के लिए विशेष रूप से यहां पहुंचते हैं।
किफायती दरें और तय रेट लिस्ट
विराम पट्टी के इस ठिकाने की सबसे बड़ी खासियत इसकी उचित और तय कीमतें हैं, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति आसानी से इनका स्वाद ले सकता है। भोजनालय में खस्सी का मीट 100 रुपये में 100 ग्राम की दर से दिया जाता है। वहीं मुर्गा 50 रुपये में 100 ग्राम और पचौनी का दाम 50 रुपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त मछली 25 रुपये प्रति पीस, घोंघी 50 रुपये प्रति पीस और उबला या बना हुआ अंडा 20 रुपये प्रति पीस के हिसाब से ग्राहकों को परोसा जाता है। जेब पर भारी न पड़ने वाले ये दाम ही ग्राहकों की बढ़ती तादाद की मुख्य वजह हैं।
दूर-दराज से पहुंचते हैं कद्रदान
संजय कुमार सहनी के अनुसार, उनके पास करीब 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करके नियमित ग्राहक भोजन करने आते हैं। इसके अलावा इस मार्ग से सफर करने वाले राहगीर भी यहां गाड़ी रोककर इन देसी पकवानों का स्वाद चखना नहीं भूलते। देहाती परिवेश में स्थित होने के बावजूद इस बात पर विशेष जोर दिया जाता है कि परिसर में स्वच्छता बनी रहे और पकाने के दौरान स्वाद व शुद्धता से कोई समझौता न हो।
शाम के समय उमड़ती है भारी भीड़
आसपास के स्थानीय निवासियों का मानना है कि दरभंगा शहर के बड़े होटलों में भी एक साथ मांसाहारी व्यंजनों की इतनी वैरायटी मिलना मुश्किल होता है, जितनी आसानी से विराम पट्टी की इस छोटी सी दुकान में मिल जाती है। दिन ढलने के बाद, खासकर शाम के वक्त यहां खाने वालों का तांता लग जाता है। यदि कोई दरभंगा क्षेत्र में मौजूद है और बिल्कुल देहाती शैली में विभिन्न मांसाहारी व्यंजनों का अनुभव करना चाहता है, तो हायाघाट के विराम पट्टी का रुख कर सकता है।



















