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दरभंगा के इस ठेले पर बिना तेल के बनता है क्रंची भुजा, कीमत सिर्फ ₹20खानपान
21 जुल॰ 2026, 12:32 pm (100 दिन पहले)· 3

दरभंगा के इस ठेले पर बिना तेल के बनता है क्रंची भुजा, कीमत सिर्फ ₹20

दरभंगा के लहेरियासराय टावर के पास एक ठेले पर बिना तेल-मसाले के, सिर्फ गर्म नमक में भुना हुआ भुजा मिलता है, जिसकी कीमत महज ₹20 है और साथ में लहसुन-हरी मिर्च की चटनी मुफ्त दी जाती है।

बिहार के दरभंगा जिले में लहेरियासराय टावर के पास शाम होते ही एक ठेले पर लोगों की कतार लग जाती है। यहां न तो तेल का इस्तेमाल होता है और न तीखे मसालों का, फिर भी भुजे का यह स्वाद हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है।

नमक में कैसे बनता है यह खास भुजा

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आए चंद्रभान विश्वकर्मा यह ठेला चलाते हैं। वे बताते हैं कि इसे तेल में नहीं बल्कि नमक में फ्राई किया जाता है। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, यानी पूरे ऑफिस टाइम के दौरान उनका ठेला टावर के पास सजा रहता है। चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाई जाती है और उसमें 5 से 7 किलो नमक डालकर तेज आंच पर गर्म किया जाता है। नमक जब अच्छी तरह तप जाता है, तब उसमें पानी में फूला हुआ चना, सूखा चना, चूड़ा, बादाम समेत 5 से 7 तरह के आइटम डाले जाते हैं। गर्म नमक में ये सभी चीजें भुनकर कुरकुरी हो जाती हैं। इसके बाद चलनी की मदद से नमक अलग किया जाता है और ग्राहकों को गरमागरम भुजा परोसा जाता है।

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₹20 में सेहत और स्वाद दोनों

इस ठेले पर ₹20 में 100 ग्राम भुजा मिलता है और साथ में चटनी बिल्कुल मुफ्त दी जाती है। चंद्रभान का कहना है कि तेल और मसाला न होने की वजह से इसे खाने के बाद पेट में गैस या जलन जैसी शिकायत नहीं होती। यही वजह है कि बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, सभी उम्र के लोग बेझिझक इसका आनंद ले सकते हैं।

कोर्ट-कचहरी से लेकर बाजार तक दीवानगी

ठेले की लोकेशन भी इसकी लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है। एक तरफ कचहरी है तो दूसरी तरफ बाजार, यानी दोनों तरफ से ग्राहक आसानी से पहुंच जाते हैं। लंच टाइम में कोर्ट परिसर के वकील, कलेक्ट्रेट के कर्मचारी और कमिश्नरी के अफसर अक्सर यहीं नजर आते हैं। स्थानीय दुकानदार भी इसके स्वाद के मुरीद हैं और इसी वजह से हर दिन ग्राहकों की डिमांड बढ़ती जा रही है।

लहसुन-हरी मिर्च की चटनी का जादू

भुजे के साथ मिलने वाली चटनी भी उतनी ही खास है। इसे बनाने वाले कारीगर सूरजभान विश्वकर्मा के मुताबिक, हरी मिर्च और लहसुन से तैयार यह चटनी तीखी और चटपटी होती है। उनका दावा है कि इस चटनी को महीने भर तक रखा जा सकता है, इस दौरान भले ही इसका रंग बदल जाए लेकिन स्वाद पहले जैसा ही बना रहता है। ग्राहकों में इस चटनी की मांग इतनी ज्यादा है कि कई लोग भुजा कम और चटनी ज्यादा मांगते नजर आते हैं।

महंगाई के दौर में सस्ता और सेहतमंद विकल्प

मौजूदा दौर में जहां एक समोसे की कीमत ₹10 तक पहुंच चुकी है और पकौड़ियां तेल में डूबी मिलती हैं, वहीं नमक में तैयार यह भुजा लोगों को एक सस्ता, सादा और सेहतमंद विकल्प मुहैया करा रहा है। आजमगढ़ से निकला यह स्वाद अब मिथिला क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुका है। दरभंगा के लहेरियासराय इलाके में लगने वाला यह ठेला सिर्फ लोगों का पेट नहीं भर रहा, बल्कि यह भरोसा भी दिला रहा है कि बिना तेल के भी खाने का स्वाद कमाल का हो सकता है।

सवाल-जवाब

यह भुजा दरभंगा में कहां मिलता है?
यह लहेरियासराय टावर के पास ठेले पर मिलता है, जो कोर्ट परिसर और बाजार के बीच में लगता है।
भुजे की कीमत क्या है?
₹20 में 100 ग्राम भुजा मिलता है और साथ में चटनी मुफ्त दी जाती है।
यह भुजा किस चीज में तैयार किया जाता है?
इसे तेल में नहीं बल्कि गर्म नमक में भुना जाता है, जिसमें 5 से 7 किलो नमक इस्तेमाल होता है।
ठेला कब से कब तक लगता है?
यह ठेला सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, यानी पूरे ऑफिस टाइम में लगा रहता है।
चटनी कितने दिनों तक ठीक रहती है?
कारीगर सूरजभान विश्वकर्मा के मुताबिक चटनी को महीने भर तक रखा जा सकता है, रंग बदल सकता है पर स्वाद वही रहता है।
भुजे में कौन-कौन सी चीजें डाली जाती हैं?
इसमें पानी में फूला हुआ चना, सूखा चना, चूड़ा, बादाम समेत 5 से 7 तरह के आइटम डाले जाते हैं।
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