एससी एग्रोटेक के शेयरों में लगातार दूसरे दिन 5 फीसदी का अपर सर्किट, तिमाही शुद्ध मुनाफा 47 गुना बढ़ाकानपुर के सीसामऊ में तीन दशक का सियासी सफरनामा और अगले चुनावी घमासान की बिसातकरनाल के सिंगड़ा गांव में जोहड़ से मिला दो साल के लापता एकांश का शवमेघालय के वेस्ट खासी हिल्स ने पूरे किए 50 साल, राज्य आंदोलन के सेनानियों का हुआ सम्मानबिना झंझट मिनटों में तैयार करें स्वादिष्ट बेसन कढ़ी, चावल के साथ परोसने की सरल विधिचक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतासूरत में मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाला पकड़ा गया, पुलिस ने इलाके में कराया सीन रीक्रिएशनमणिपुर में चुनावी हलचल: ज़ेडआरओ प्रमुख के बेटे डॉ. थांखनखुप गुइते लड़ेंगे 2027 का विधानसभा चुनावहॉर्नबिल महोत्सव से पहले नगालैंड ने केंद्र से प्रोटेक्टेड एरिया परमिट पूरी तरह हटाने की उठाई मांगमातृभाषा में शुरुआती पढ़ाई से आदिवासी बच्चों की सीखने की क्षमता में हुआ बड़ा सुधार
दरभंगा टावर पर कुल्हड़ वाली खास केसर लस्सी का जलवा, 50 रुपये में मिलता है मलाई और मेवे का भरपूर स्वादखानपान
9 सित॰ 2026, 2:29 pm (50 दिन पहले)· 2

दरभंगा टावर पर कुल्हड़ वाली खास केसर लस्सी का जलवा, 50 रुपये में मिलता है मलाई और मेवे का भरपूर स्वाद

बिहार के दरभंगा टावर चौराहे पर पिछले कई दशकों से एक छोटे से टेबल पर लगने वाली लस्सी दुकान शहर की पहचान बन चुकी है। 50 रुपये की इस कुल्हड़ लस्सी का स्वाद चखने के लिए रोजाना शाम को भारी भीड़ जुटती है और लोगों को टोकन लेकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

बिहार का दरभंगा शहर अपनी समृद्ध ऐतिहासिक परंपरा और ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ अपने अनूठे खान-पान के लिए भी जाना जाता है। शहर का हृदय स्थल माने जाने वाले दरभंगा टावर की शाम बहुत ही गुलजार होती है। शाम ढलते ही चौराहे पर लोगों की चहल-पहल, जगमगाती दुकानें और हलचल भरा माहौल एक अलग ही रौनक पैदा करता है। इस पूरी बाजार की भागदौड़ के बीच एक ऐसी खास जगह है, जो स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। यह जगह है दरभंगा टावर की सबसे मशहूर लस्सी की दुकान, जिसके बारे में माना जाता है कि बिना इसका स्वाद लिए शहर का भ्रमण अधूरा ही रहता है।

दरभंगा टावर पर दशकों पुराना स्वाद और टोकन का इंतजार

दरभंगा टावर चौराहे पर एक छोटे से टेबल से शुरू हुआ लस्सी बेचने का यह सिलसिला पिछले कई दशकों से बिना रुके जारी है। दुकान का ढांचा भले ही बहुत साधारण और छोटा है, लेकिन इसके स्वाद की शोहरत पूरे शहर और आसपास के इलाकों में फैली हुई है। यही कारण है कि जैसे ही शाम का समय होता है, यहां लस्सी पीने वाले शौकीनों की भारी जमावड़ा लगने लगता है। लस्सी की बिक्री और ग्राहकों की भारी संख्या को व्यवस्थित रखने के लिए यहां टोकन व्यवस्था लागू की गई है। दुकान पर पहुंचते ही ग्राहकों को सबसे पहले टोकन लेना पड़ता है और फिर अपनी बारी आने का धैर्यपूर्वक इंतजार करना पड़ता है।

ये भी पढ़ें

50 रुपये में मलाई, मेवे और केसर से भरपूर कुल्हड़ लस्सी

विशेष रूप से भीषण गर्मी के दिनों में इस ठंडी और सेहतमंद लस्सी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। महज 50 रुपये की मामूली कीमत में परोसी जाने वाली यह ठंडी लस्सी न केवल गर्मी से राहत दिलाती है, बल्कि स्वाद की एक अनोखी दुनिया से रूबरू कराती है। टोकन लेने के बाद अपनी बारी का इंतजार करना ग्राहकों के लिए मुश्किल जरूर होता है, लेकिन लस्सी का पहला घूंट लेते ही वह इंतजार पूरी तरह से जायज लगने लगता है। इस लस्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका विशुद्ध देसी अंदाज और पारंपरिक तैयारी है। इसे बनाने में गाढ़ी दही के साथ प्रचुर मात्रा में मलाई और मखमली क्रीम मिलाई जाती है।

शहर की खान-पान संस्कृति और पहचान का हिस्सा

लस्सी को तैयार करने के बाद इसे काजू, पिस्ता, बादाम की कतरन और महकते केसर से खूबसूरती से सजाया जाता है। पारंपरिक मिट्टी के कुल्हड़ में परोसे जाने के कारण इसमें सोंधी खुशबू और देसी स्वाद रच-बस जाता है। आज दरभंगा टावर की यह लस्सी सिर्फ एक सामान्य पेय पदार्थ नहीं रह गई है, बल्कि यह शहर की समृद्ध खान-पान संस्कृति और सामाजिक जीवन का अटूट हिस्सा बन चुकी है। दफ्तर से काम निपटाकर घर लौटने वाले कामकाजी लोग हों, कॉलेज के युवा छात्र हों या फिर परिवार के साथ बाजार घूमने निकले लोग, हर कोई यहां रुककर इस लस्सी का स्वाद लेना अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानता है।

सवाल-जवाब

दरभंगा टावर की मशहूर लस्सी दुकान कहां स्थित है?
यह लस्सी दुकान बिहार के दरभंगा शहर में प्रसिद्ध दरभंगा टावर चौराहे पर स्थित है।
एक कुल्हड़ लस्सी की कीमत कितनी है?
यहां एक मिट्टी के कुल्हड़ में मिलने वाली लस्सी की कीमत मात्र 50 रुपये है।
इस लस्सी में कौन-कौन सी सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
इस लस्सी में गाढ़ी दही, मलाई और क्रीम के साथ काजू, पिस्ता, बादाम की कतरन और केसर मिलाया जाता है।
दुकान पर लस्सी खरीदने के लिए टोकन सिस्टम क्यों लागू है?
शाम के समय दुकान पर लस्सी प्रेमियों की भारी भीड़ जुटने के कारण व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोकन दिया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp