मॉनसून के आगमन के साथ ही ग्रामीण अंचलों के खेतों में विभिन्न फसलों के साथ कई प्राकृतिक वनस्पतियां और देसी सब्जियां अपने आप उग आती हैं। राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र में खेतों के भीतर स्वाभाविक तौर पर पनपने वाली सेंद ऐसी ही एक पारंपरिक देसी सब्जी है, जिसका जायका आज भी गांव के बाशिंदों के बीच बेहद चाव से पसंद किया जाता है। खेतों की मेड़ों और फसलों के बीच तैयार होने वाली यह सब्जी ग्रामीण परिवेश के पारंपरिक खानपान का एक अभिन्न अंग मानी जाती है, जिसे परिवार के बुजुर्ग विशेष रूप से खाना पसंद करते हैं।
बाजरे की कटाई के दौर में दो महीने तक उपलब्ध
सेंद की उपलब्धता पूरे बारह महीने नहीं रहती, बल्कि यह कुदरती सब्जी साल में केवल बरसात के मौसम के दौरान ही खेतों में देखने को मिलती है। लगभग दो महीने की सीमित अवधि के दौरान किसान जब अपने खेतों में बाजरे की कटाई का काम करते हैं, तब फसलों के बीच से ताजी सेंद तोड़कर घर लाते हैं। कृषि कार्य निपटाने के साथ ही खेत से सीधी तोड़ी गई इस ताजी देसी सब्जी से घर पर बेहद लजीज व्यंजन तैयार किया जाता है, जो आज भी पुरानी ग्रामीण संस्कृति और शुद्ध स्वाद से रूबरू कराता है।
सेंद को उबालने और पीसने की तैयारी
रसोई में सेंद की सब्जी बनाना काफी सरल है और यह बहुत ही कम समय में बनकर तैयार हो जाती है। इसे पकाने की प्रक्रिया खेत से लाई गई सेंद की सफाई से शुरू होती है। चूंकि यह सीधे जमीन और खेतों से तोड़ी जाती है, इसलिए इस पर मिट्टी और धूल के कण लगे रहते हैं। इसे पकाने से पहले साफ पानी में अच्छी तरह धोना बेहद अनिवार्य होता है। इसके उपरांत सेंद को एक बर्तन में पानी डालकर तब तक उबाला जाता है जब तक कि यह पूरी तरह नरम न पड़ जाए। उबालने के बाद इसे गर्म पानी से बाहर निकालकर सामान्य तापमान पर ठंडा होने दिया जाता है, जिसके बाद मिक्सी में डालकर इसका बारीक पेस्ट बना लिया जाता है।
मसाला भूनने और तड़का लगाने की विधि
सब्जी को स्वादिष्ट बनाने के लिए एक गाढ़ा और चटपटा मसाला बेस तैयार किया जाता है। इसके लिए टमाटर, प्याज, हरी मिर्च और लहसुन की आवश्यकता होती है। लहसुन और प्याज को अच्छी तरह छीलने व छोटे टुकड़ों में काटने के बाद इन सभी सामग्रियों को मिक्सी में पीसकर एक महीन पेस्ट बना लिया जाता है। इसके बाद गैस चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाकर उसमें सरसों का तेल गर्म किया जाता है। गर्म तेल में जीरा और हींग का छौंक लगाया जाता है, जिससे देसी महक उठती है। तड़का तड़कने के तुरंत बाद तैयार किया गया प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और लहसुन का पेस्ट तेल में डालकर मिलाया जाता है।
धीमी आंच पर पकाने और परोसने का तरीका
कढ़ाई में पेस्ट डालने के बाद उसमें लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर और गरम मसाला पाउडर मिलाया जाता है। इस पूरे मसाले को धीमी आंच पर तकरीबन 5 मिनट तक अच्छी तरह भूना जाता है। जब मसाला सुनहरा रंग पकड़ ले और सतह पर तेल छोड़ने लगे, तब उसमें पहले से पीसकर रखी गई उबली हुई सेंद को डाल दिया जाता है। इसके बाद सेंद को मसाले के साथ धीमी आंच पर 5 से 10 मिनट तक पकने दिया जाता है। जब सब्जी पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है और चारों तरफ से तेल छोड़ने लगती है, तब आंच बंद करके ऊपर से बारीक कटा ताजा हरा धनिया डाला जाता है। गरमागरम रोटियों अथवा पराठों के साथ परोसी जाने वाली यह देसी सब्जी आज भी लोगों को पारंपरिक देहाती भोजन की महक से जोड़ती है।



















