सुबह के भोजन में अगर हर दिन वही जानी-पहचानी इडली, सांभर और डोसा मिले तो स्वाद में नयापन नहीं रहता। इसी एकरसता को तोड़ने के लिए इन दिनों खाने के शौकीनों की थाली में एक ठेठ प्रांतीय तेलुगु व्यंजन नई जगह बना रहा है। तटीय आंध्र और तेलंगाना के ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से खाया जाने वाला यह पकवान अब बड़े शहरों के पारंपरिक टिफिन अड्डों पर सुबह-सुबह भारी मांग में देखा जा रहा है।
स्वाद की खासियत और बनावट
दिखने में यह किसी मोटे नमकीन केक या भारी-भरकम पैनकेक की तरह नजर आता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका दोहरा टेक्सचर है। तेज आंच और तेल के सही संतुलन से इसकी बाहरी परत गहरे सुनहरे रंग की और बेहद करारी हो जाती है, जबकि इसका भीतरी हिस्सा भाप और धीमी आंच में पककर स्पंज की तरह एकदम हल्का और मुलायम बना रहता है। स्थानीय बोलचाल में कई लोग इसे मिनपा रोत्ती के नाम से भी पुकारते हैं।
रसोई में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार
इस नमकीन व्यंजन को पकाने के लिए किसी दुर्लभ मसाले अथवा अलग तैयारी की आवश्यकता नहीं पड़ती। घरों में सामान्य तौर पर तैयार किया जाने वाला उड़द की दाल और चावल अथवा इडली रवा का गाढ़ा बैटर ही इसका मुख्य आधार बनता है।
धीमी आंच पर पकाने की पारपंरिक विधि
इसे तैयार करने के लिए एक भारी और गहरे तले वाले बर्तन या कड़ाही में दो चम्मच कुकिंग ऑयल डालकर गर्म किया जाता है। तड़के का सोंधापन लाने के लिए उसमें थोड़ा सा साबुत जीरा चटकाया जाता है। इसके उपरांत बर्तन के केंद्र में तीन से चार बड़े चम्मच गाढ़ा मिश्रण डाला जाता है। इसे डोसे के समान पतला नहीं फैलाया जाता, बल्कि इसकी मोटाई केक की भांति बरकरार रखी जाती है।
बैटर को अंदर तक समान रूप से पकाने के लिए एक बेहद रोचक देसी नुस्खा अपनाया जाता है। मिश्रण के ठीक मध्य में स्टील अथवा पीतल की एक नन्हीं कटोरी रख दी जाती है, जिससे बीच में छेद बन जाता है और भाप चारों ओर बराबर फैलती है। बर्तन को ढककर मंद आंच पर लगभग आठ से दस मिनट तक सेंका जाता है ताकि निचली सतह पूरी तरह क्रंची हो जाए। इसके बाद बीच की कटोरी को सावधानी से निकालकर रोटी को उलट दिया जाता है और दूसरी सतह को तीन से चार मिनट तक लाल व कुरकुरा होने तक पकाया जाता है।
परोसने के पारंपरिक विकल्प
थाली में गरमा-गरम परोसते समय इसे आमतौर पर तीखी आलम पचड़ी अथवा चने के बेसन से तैयार की जाने वाली बॉम्बे चटनी के साथ पसंद किया जाता है। इसके अलावा मीठे और नमकीन का पुराना संगम चाहने वाले लोग इसे शुद्ध देसी गुड़ की गाढ़ी चाशनी के साथ डुबोकर खाना पसंद करते हैं।

















