चक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतामेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधराजस्थान में बदला मौसम का मिजाज, अर्नब तूफान और पश्चिमी विक्षोभ के असर से झमाझम बारिशअलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रत1 नवंबर से चमक जाएगी इन 6 राशियों की किस्मत, मंगल, सूर्य, शुक्र और चंद्रमा बरसाएंगे विशेष कृपाकर्नाटक में बस यात्रा जल्द हो सकती है महंगी, 4 नवंबर को हो सकता है किराए में बढ़ोतरी का ऐलानऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामनेहमीरपुर पॉलीटेक्निक छात्र का मामला: ड्रोन ग्रांट का दावा निकला फर्जी, तीसरी मंजिल से गिरने की जांच में जुटी पुलिसपश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर वापस भेजा जाएगा, शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुखअमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षता
गाजीपुर में सनी पाल की तीन पीढ़ियों पुरानी दुकान पर उड़द दाल की इमरती का अनोखा स्वाद, जानिए जलेबी से कैसे है अलगखानपान
22 अग॰ 2026, 8:11 am (69 दिन पहले)· 2

गाजीपुर में सनी पाल की तीन पीढ़ियों पुरानी दुकान पर उड़द दाल की इमरती का अनोखा स्वाद, जानिए जलेबी से कैसे है अलग

गाजीपुर के महुआ बाग चौराहे पर सनी पाल तीन पीढ़ियों से शुद्ध उड़द दाल की पारंपरिक इमरती तैयार कर रहे हैं, जो अपने खास टेक्सचर और ताजे स्वाद के कारण जलेबी से बिल्कुल अलग पहचान रखती है।

गाजीपुर शहर के प्रसिद्ध महुआ बाग चौराहे पर रोजाना सुबह 9 बजते ही एक खास खुशबू फिज़ा में तैरने लगती है। यहां कड़ाही में शुद्ध घी और तेल का मेल जब गरमाता है, तो उड़द दाल के घोल से बारीक धारें निकलकर गोल आकृतियां बनाने लगती हैं। सनी पाल की यह मिठाई की दुकान केवल एक व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि तीन पीढ़ियों से चला आ रहा स्वाद का एक ऐसा ठिकाना है जहां गाजीपुर की सुबह मिठास के साथ शुरू होती है। आज के दौर में जहां खान-पान का तरीका तेजी से बदल रहा है, वहां इस दुकान ने अपनी पुरानी पहचान और गुणवत्ता को पूरी ईमानदारी से संभालकर रखा हुआ है।

तीन पीढ़ियों की साधना और गाजीपुर की मीठी पहचान

मशीनों और आधुनिक फास्ट फूड के बढ़ते चलन के बावजूद, महुआ बाग चौराहे की यह छोटी सी दुकान अपने पारंपरिक तरीके के लिए दूर-दूर तक जानी जाती है। इस सफर की नींव Sunny Pal के दादाजी ने रखी थी, जिसे आज उनके पोते सनी पाल उतनी ही लगन और निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के लिए यह जगह केवल मिठाई खरीदने का केंद्र नहीं है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और खान-पान की स्मृतियों का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है। सींक पर सजी तैयार इमरतियों को देखकर यह साफ समझ आता है कि इस हुनर को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है। दुकान पर हर दिन 150 से 200 पीस इमरती चुटकियों में बिक जाते हैं, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें

कलाई का सटीक संतुलन और इमरती बनाने की विधि

इमरती का एकदम सही आकार और बनावट तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक कारीगर की कलाई का संतुलन होता है। यह निपुणता रातों-रात हासिल नहीं होती, बल्कि वर्षों के निरंतर अभ्यास के बाद आती है। जब खौलते हुए घी और तेल में उड़द दाल के पेस्ट की पतली धारें गिराई जाती हैं, तो वे देखते ही देखते एक खूबसूरत फूलनुमा आकार ले लेती हैं। कड़ाही से बाहर निकालकर जब इन्हें छननी पर रखा जाता है, तो मात्र कुछ ही सेकंड के भीतर इनके ऊपर एक कुरकुरी परत जम जाती है। इसके बाद इन्हें तुरंत गुनगुनी चाशनी में डुबोया जाता है। चाशनी में रहने के दौरान मिठास इसके रेशे-रेशे के भीतर तक समा जाती है, जिससे इमरती बाहर से बेहद क्रिस्पी और अंदर से रसदार बनकर तैयार होती है।

इमरती और जलेबी के बीच का बुनियादी अंतर

अक्सर लोग इमरती और जलेबी को एक ही समझ बैठते हैं, जबकि इन दोनों मिठाइयों की सामग्री और बनावट में जमीन-आसमान का फर्क होता है। जलेबी को तैयार करने के लिए मैदे के खमीर का उपयोग किया जाता है और इसे गोल-मटोल घुमावदार चक्रों के रूप में छाना जाता है। दूसरी तरफ, इमरती को पूरी तरह से पीसी हुई उड़द दाल के पेस्ट से बनाया जाता है, जिसकी संरचना के बीच में एक आकर्षक फूलनुमा जालीदार चक्र मौजूद होता है। मात्र ₹25 प्रति पीस की दर से मिलने वाली यह इमरती अपने अनोखे टेक्सचर, शुद्धता और स्वाद के मामले में हर दूसरी मिठाई से अलग नज़र आती है।

ईमानदारी की परंपरा और ताजा परोसने का नियम

दुकान पर ताजगी बनाए रखने के लिए एक विशेष नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है। सुबह 9 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक के कार्य समय के दौरान दिन में दो बार कड़ाही में नया और ताजा बैटर उतारा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी ग्राहक को बासी या ठंडी मिठाई न मिले, बल्कि हर व्यक्ति को बिल्कुल गरमागरम इमरती का आनंद मिले। भले ही समय के साथ दुनिया बदल गई हो, लेकिन इस दुकान पर चूल्हा जलने और शुद्धता बनाए रखने की यह परंपरा दशकों बाद भी उसी ईमानदारी के साथ जारी है। चाशनी से तर-बतर होकर जब सुनहरी इमरतियां टोकरी में सजाई जाती हैं, तो गाजीपुर के कोने-कोने से लोग इस स्वाद का लुत्फ उठाने पहुंचे जाते हैं।

सवाल-जवाब

गाजीपुर में सनी पाल की इमरती की दुकान कहां स्थित है?
यह दुकान गाजीपुर के प्रसिद्ध महुआ बाग चौराहे पर स्थित है, जो सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है।
इमरती और जलेबी बनाने की सामग्री में क्या अंतर होता है?
जलेबी मैदे के खमीर से बनाई जाती है, जबकि इमरती पूरी तरह से पीसी हुई उड़द दाल के पेस्ट से तैयार की जाती है।
महुआ बाग में इमरती की कीमत और दैनिक बिक्री कितनी है?
यहां इमरती ₹25 प्रति पीस की दर से मिलती है और रोजाना 150 से 200 पीस बिक जाते हैं।
इमरती को बाहर से क्रिस्पी और अंदर से रसदार कैसे बनाया जाता है?
उड़द दाल के बैटर को घी-तेल में तलने के बाद छननी पर रखकर तुरंत गुनगुनी चाशनी में डाला जाता है, जिससे मिठास रेशे-रेशे में समा जाती है।
दुकान पर ताजगी बनाए रखने के लिए क्या नियम अपनाया जाता है?
दुकान पर दिन में दो बार नया ताजा बैटर कड़ाही में उतारा जाता है ताकि ग्राहकों को हमेशा गरम और ताजा इमरती मिले।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp