प्रोटीन के मामले में पनीर किसी खजाने से कम नहीं, और जो लोग नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए तो यह और भी जरूरी हो जाता है। दिक्कत यह है कि बीते कुछ सालों में बाजार के पनीर में मिलावट की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं, इसी वजह से अब बहुत से लोग घर पर ही पनीर बनाना ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। लेकिन घर पर पनीर बनाते वक्त एक परेशानी लगभग सबके सामने आती है, वह यह कि पनीर सख्त और रबड़ जैसा बन जाता है।
इसकी जड़ में दो ही बड़ी गलतियां होती हैं। पहली, दूध को जरूरत से ज्यादा उबालना, और दूसरी, पनीर को बहुत देर तक दबाकर रखना। जब पनीर लंबे समय तक भारी वजन के नीचे दबा रहता है तो उसकी सारी नमी निचुड़ जाती है और वह कड़ा हो जाता है। ठीक इसी तरह, दूध फटने के बाद भी अगर उसे लगातार उबालते रहें तो पनीर की बनावट बिगड़ जाती है।
एसिड एक साथ नहीं, एक-एक चम्मच डालें
दूध फाड़ने के लिए नींबू का रस या सिरका कभी एक साथ न डालें। इसे एक-एक चम्मच करके डालें और साथ-साथ धीरे-धीरे चलाते रहें। जैसे ही दूध अच्छी तरह फट जाए और मट्ठा हरे रंग का दिखने लगे, उसी पल एसिड डालना बंद कर दें।
फटने के बाद उबालना बंद
दूध एक बार फट जाए तो उसे और मत उबालिए। जैसे ही साफ मट्ठा अलग होता दिखे, गैस तुरंत बंद कर दें। जरूरत से ज्यादा गर्म करने पर पनीर सख्त हो जाता है।
छानते ही ठंडे पानी का झटका
पनीर छानने के बाद उसके दानों पर 15 से 30 सेकंड तक ठंडा पानी डालें। इससे पकने की प्रक्रिया वहीं रुक जाती है और पनीर मुलायम बना रहता है। साथ ही नींबू या सिरके का खट्टापन भी निकल जाता है।
कितनी देर दबाना है, यह समझ लें
पनीर को हद से ज्यादा देर तक दबाना सबसे बड़ी गलती है। भुर्जी या सलाद के लिए 15 से 20 मिनट का दबाव काफी है। पालक पनीर या शाही पनीर जैसी ग्रेवी वाली सब्जियों के लिए 30 से 40 मिनट ठीक रहते हैं। टिक्का या कबाब के लिए इसे थोड़ा और दबा सकते हैं, लेकिन 50 मिनट से ज्यादा बिल्कुल नहीं। इससे ज्यादा देर दबाने पर पनीर कड़ा हो जाता है।
दबाने के बाद बर्फ वाले पानी में डुबकी
दबाने के बाद पनीर को कुछ मिनट के लिए बर्फ वाले ठंडे पानी में रख दें। इससे बाहरी परत मजबूत बनती है, जबकि अंदर का हिस्सा नरम और क्रीमी बना रहता है। अगर पनीर को सीधे फ्रिज में रख दिया जाए तो वह चबाने में सख्त लग सकता है। इसलिए यह छोटा सा कदम पनीर को स्वादिष्ट और मुलायम बनाए रखने में बड़ा काम करता है।













