उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दक्षिण भारतीय व्यंजनों की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है। इडली, डोसा, वड़ा और सांभर जैसी पारंपरिक डिशेस अब हर वर्ग के लोगों की पहली पसंद बन चुकी हैं। गोरखपुर शहर के प्रसिद्ध नौका विहार इलाके में दक्षिण भारत के मूल निवासी सूर्य दिनेश रेड्डी लोगों को पारंपरिक स्वाद में इडली और डोसा परोस रहे हैं। उनके हाथों बने व्यंजनों का स्वाद स्थानीय लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। डोसा तैयार करने की बारीकियों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि केवल बेहतर घोल यानी बैटर तैयार कर लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि मसालों का चयन, आलू की स्टफिंग और चटनी का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जाए, तो घर की रसोई में भी रेस्टोरेंट जैसा कुरकुरा और स्वादिष्ट डोसा आसानी से तैयार किया जा सकता है।
प्याज-लहसुन और भुने मसालों से निखरेगा स्वाद
डोसे के स्वाद को नए स्तर पर ले जाने के लिए सूर्य दिनेश रेड्डी मसालों की तैयारी पर खास जोर देते हैं। उनके अनुसार, डोसे के मसाले में ताजी प्याज और लहसुन की मौजूदगी स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। इन दोनों सामग्रियों का बारीक पेस्ट बनाकर मसालों में मिलाया जाए, तो उससे भोजन में एक गहरा फ्लेवर और बेहतरीन खुशबू आती है। इसके अलावा साबुत मसालों को इस्तेमाल करने का भी एक विशेष तरीका है। साबुत मसालों को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर हल्का भूनना चाहिए। मसालों को ज्यादा पकाने या जलाने से उनका मूल स्वाद नष्ट हो जाता है, जबकि हल्का रोस्ट करने से उनके सुगंधित तेल सुरक्षित रहते हैं। इस तरह भुने हुए मसालों का बारीक पेस्ट तैयार करके आलू के मिश्रण में मिलाया जाता है, जिससे स्टफिंग का स्वाद बहुत समृद्ध हो जाता है।
आलू की स्टफिंग तैयार करने की सही विधि
मसाला डोसा की असली पहचान उसकी अंदरूनी आलू स्टफिंग से होती है। अधिकतर लोग उबले हुए आलू को सीधे मसालों के साथ मिला देते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं है। सूर्य दिनेश रेड्डी की सलाह है कि उबले हुए आलू को मसालों के साथ मिलाने से पहले कुछ समय तक हल्का भून लेना चाहिए। इस प्रक्रिया से आलू के कणों के भीतर मसालों का स्वाद पूरी तरह से समा जाता है, जिससे स्टफिंग बेहद स्वादिष्ट बनती है। इसके साथ ही मसालों का सही संतुलन बनाए रखना भी उतना ही अनिवार्य है। अत्यधिक तीखा मसाला डोसे के स्वाभाविक स्वाद को दबा देता है, वहीं दूसरी तरफ यदि स्टफिंग बहुत फीकी हो तो पूरा स्वाद बेमज़ा हो जाता है। इसलिए मसालों की मात्रा को हमेशा संतुलित रखना चाहिए।
ताजा नारियल और लाल चटनी का बेहतरीन कॉम्बिनेशन
डोसे के साथ परोसी जाने वाली चटनी इसके स्वाद को पूर्णता प्रदान करती है। नारियल की चटनी और डोसे का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए ताजे नारियल, हरी मिर्च और अदरक के टुकड़ों को एक साथ मिलाकर पीसा जाना चाहिए। इसमें स्वादानुसार नमक और हल्के खड़े मसालों का तड़का लगाने से इसका स्वाद और ज्यादा निखर जाता है। नारियल की पारंपरिक चटनी के अलावा लाल चटनी या विशेष मसाला चटनी भी डोसे के साथ परोसी जा सकती है। अलग-अलग प्रकार की तीखी और चटपटी चटनियों के साथ डोसे का सेवन करने से खाने का मजा दोगुना हो जाता है।
तवे का सही तापमान और बैटर फैलाने के नियम
घर पर कुरकुरा डोसा बनाने के लिए तवे का तापमान और बैटर फैलाने की तकनीक सबसे अहम मानी जाती है। सूर्य दिनेश रेड्डी बताते हैं कि जब तवा पूरी तरह से गर्म हो जाए, तभी उस पर बैटर डालना चाहिए। ठंडे या कम गर्म तवे पर बैटर डालने से वह चिपक सकता है और कुरकुरा नहीं बनता। बैटर को तवे पर डालते ही उसे एक पतली परत के रूप में चारों तरफ फैलाना जरूरी है। यदि बैटर की परत मोटी रह जाएगी, तो डोसा नरम और सुस्त बनेगा, जबकि पतली परत इसे एकदम क्रिस्पी बनाती है। सही बैटर, संतुलित मसाले, सही तरीके से भुनी हुई आलू स्टफिंग और नियंत्रित तापमान वाले तवे का तालमेल ही रेस्टोरेंट जैसा डोसा तैयार करने का मुख्य राज है।



















