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घर पर तैयार करें गोरखपुर का लजीज हांडी मटन, मद्धम आंच और पारंपरिक मसालों से आएगा असली स्वादखानपान
20 सित॰ 2026, 5:19 pm (13 मिनट पहले)· 0

घर पर तैयार करें गोरखपुर का लजीज हांडी मटन, मद्धम आंच और पारंपरिक मसालों से आएगा असली स्वाद

गोरखपुर के अदालत हांडी मटन हाउस की प्रसिद्ध शैली में मटन बनाने की पूरी विधि जानें, जिसमें सही मैरिनेशन और धीमी आंच पर पकाने का तरीका शामिल है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के खानपान में मिट्टी के बर्तनों और पारंपरिक मसालों का तालमेल हमेशा से खास रहा है। इसी समृद्ध परंपरा का एक प्रमुख स्वाद गोरखपुर के अदालत हांडी मटन हाउस में देखने को मिलता है, जहां सुबह की शुरुआत से लेकर ढलती शाम तक लजीज मटन का लुत्फ उठाने वालों का तांता लगा रहता है। इस खास व्यंजन की लोकप्रियता के पीछे तीखे सरसों के तेल का तड़का, खड़े मसालों का सही संतुलन और घंटों मद्धम आंच पर मांस को पकाने की पारंपरिक कला है। यह प्रक्रिया गोश्त को इतना मुलायम बना देती है कि वह मुंह में जाते ही घुल जाता है। यदि आप भी रसोई में वही समृद्ध सुगंध और गाढ़ी ग्रेवी वाला स्वाद पाना चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी नियमों का पालन करके इसे सरलता से बना सकते हैं।

गोश्त का चुनाव और मैरिनेशन की सही तकनीक

इस व्यंजन को शुरू करने के लिए एक किलो ताजा मटन की जरूरत होती है। सबसे पहले मांस के टुकड़ों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और छन्नी में रखकर सारा अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें। जब गोश्त सूख जाए, तब उसमें एक कप ताजा दही मिलाएं। इसके बाद दो बड़े चम्मच अदरक और लहसुन का पिसा हुआ पेस्ट, एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच पिसी लाल मिर्च, एक चम्मच धनिया पाउडर तथा आवश्यकतानुसार नमक डालें।

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इन सभी चीजों को हाथों से मटन के प्रत्येक टुकड़े पर अच्छी तरह मलें, जिससे मसालों का लेप हर रेशे पर समान रूप से चढ़ जाए। अब इस मिश्रण को ढककर कम से कम 30 मिनट और बेहतर परिणामों के लिए एक पूरे घंटे के लिए अलग रख दें। यह आराम का समय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दही और नमक मांस के रेशों को कोमल बनाते हैं, जबकि सूखे मसाले भीतर तक समाकर पकने के दौरान एक गहरा जायका तैयार करते हैं।

कच्ची घानी के तेल में खड़े मसालों और प्याज की भुनाई

अब मिट्टी की एक पारंपरिक हांडी या फिर मोटे पेंदे वाली भारी कड़ाही को चूल्हे पर चढ़ाएं। इसमें तीन से चार बड़े चम्मच शुद्ध सरसों का तेल डालें और तब तक गर्म होने दें जब तक कि उसका कच्चापन और तीखापन संतुलित न हो जाए। गर्म तेल में तड़के के लिए तेजपत्ता, एक टुकड़ा दालचीनी, एक बड़ी काली इलायची, दो से तीन छोटी हरी इलायची, साबुत लौंग, साबुत काली मिर्च और एक चम्मच साबुत जीरा डालें। जैसे ही ये साबुत मसाले चटकने लगें और रसोई में अपनी महक बिखेरने लगें, तुरंत बारीक कटी हुई तीन से चार प्याज अंदर डाल दें।

प्याज को मध्यम लौ पर धीरज के साथ भूनते रहें जब तक कि उसका रंग गहरा सुनहरा न दिखने लगे। हांडी मटन की ग्रेवी की रंगत और गाढ़ापन पूरी तरह से प्याज के भुनने के स्तर पर निर्भर करता है। यदि प्याज कच्चा रह गया तो तरी में मिठास आ जाएगी, इसलिए इसे तब तक करछी से चलाते हुए पकाएं जब तक कि तेल अलग न होने लगे।

टमाटर का पेस्ट और तेज आंच पर मांस की भुनाई

जब प्याज पूरी तरह सुनहरा हो जाए, तो उसमें बारीक कतरी हुई ताजी हरी मिर्च और थोड़ा सा अतिरिक्त अदरक-लहसुन का पेस्ट शामिल करें। इसे एक मिनट तक भूनने के बाद दो से तीन बारीक कटे हुए लाल टमाटर डालें। इस पूरे मसाले को तब तक पकने दें जब तक टमाटर पूरी तरह गलकर एकसार न हो जाएं और किनारों से तेल साफ नजर न आने लगे।

मसाला भुनते ही मैरिनेट करके रखा हुआ मटन हांडी में डाल दें। इस मोड़ पर चूल्हे की आंच तेज कर दें और कुछ मिनट तक गोश्त को लगातार चलाते हुए भूनें। तेज आंच पर भूनने से मटन के बाहरी रेशे बंध जाते हैं और उसका प्राकृतिक रस अंदर ही सुरक्षित रहता है। लगातार कलछी चलाते रहना जरूरी है ताकि मसाला बर्तन के पेंदे में जलने न पाए और भुने हुए मसालों की एक चमकदार परत मटन के हर टुकड़े पर मजबूती से चिपक जाए।

धीमी आंच पर दम देकर पकाना

जब गोश्त की अच्छी तरह भुनाई हो जाए और उसका रंग बदलने लगे, तब इसमें आवश्यकतानुसार पहले से खौलाया हुआ गर्म पानी मिलाएं। कभी भी इसमें ठंडा पानी न डालें, क्योंकि इससे तापमान अचानक गिर जाता है और मटन सख्त हो सकता है। पानी मिलाने के बाद बर्तन पर ढक्कन अच्छी तरह लगा दें। हांडी मटन का असली रहस्य उसकी धीमी आंच की पकाई में ही छिपा है।

चूल्हे की लौ को बिल्कुल कम कर दें और इसे लगभग 45 मिनट से लेकर 60 मिनट तक धीरे-धीरे पकने दें, जब तक कि मटन पूरी तरह गल न जाए। इस दौरान हर पंद्रह मिनट में एक बार ढक्कन हटाकर लकड़ी के चम्मच से तरी को नीचे तक चलाएं ताकि कुछ भी तले पर न चिपके। यदि पकने के दौरान आपको लगे कि तरी जरूरत से ज्यादा गाढ़ी हो रही है, तो उसमें थोड़ा सा और गर्म पानी मिलाया जा सकता है। मद्धम आंच पर भाप के दबाव में पकने से मटन मसालों के रस को पूरी तरह पी लेता है, जिससे उसकी तरी में एक अनूठा गाढ़ापन आ जाता है।

अंतिम तड़का और परोसने का पारंपरिक तरीका

जब मांस पूरी तरह कोमल हो जाए और रोगन तैरकर ग्रेवी के ऊपर आ जाए, तब ढक्कन हटाएं। अब इसमें एक चम्मच भुना जीरा पाउडर, एक चम्मच पिसा हुआ गरम मसाला और हथेलियों के बीच रगड़कर थोड़ी सी कसूरी मेथी छिड़कें। इन अंतिम मसालों को मिलाने के बाद धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक और पकने दें ताकि उनकी ताजी खुशबू पूरे शोरबे में घुल जाए। गैस बंद करने के बाद ऊपर से बारीक कटी हरी धनिया की पत्तियां बुरक दें। यदि आपने यह पूरी प्रक्रिया मिट्टी की हांडी में की है, तो मिट्टी की सोंधी महक इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है, हालांकि घर पर उपलब्ध किसी भी भारी तले के बर्तन में भी यह उतना ही लाजवाब बनता है।

तैयार गरमा-गरम देसी हांडी मटन को थाली में निकालकर परोसें। इसे सादी तवा रोटी, भट्टी की तंदूरी रोटी, कुरकुरे पराठे, नान अथवा खिले हुए उबले चावल के साथ खाया जा सकता है। थाली में साथ में छल्लेदार कटा हुआ कच्चा प्याज, तीखी हरी मिर्च और ताजे नींबू की फांक रख लें। इस व्यंजन का असली जादू किसी दुर्लभ सामग्री में नहीं, बल्कि बुनियादी मसालों के सही अनुपात, धैर्यपूर्वक की गई भुनाई और मद्धम आंच पर दिए गए दम में बसता है।

सवाल-जवाब

हांडी मटन बनाने के लिए मटन को कितनी देर मैरिनेट करना चाहिए?
मटन को कम से कम 30 मिनट और बेहतर स्वाद तथा कोमलता के लिए एक घंटे तक मैरिनेट करके रखना चाहिए।
हांडी मटन में कौन सा कुकिंग ऑयल सबसे अच्छा स्वाद देता है?
पारंपरिक देसी स्वाद और तीखी सुगंध के लिए इस रेसिपी में शुद्ध सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है।
अगर मिट्टी की हांडी न हो तो क्या इसे सामान्य बर्तन में पकाया जा सकता है?
हां, इसे किसी भी भारी तले वाले बर्तन या कड़ाही में आसानी से बनाया जा सकता है।
मटन को धीमी आंच पर कितनी देर तक पकाना चाहिए?
मटन को पूरी तरह नरम और रसदार होने तक लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक मद्धम आंच पर पकाया जाता है।
गोरखपुर की किस दुकान का हांडी मटन प्रसिद्ध माना जाता है?
गोरखपुर का अदालत हांडी मटन हाउस इस खास मटन रेसिपी के लिए बेहद लोकप्रिय है।
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