भारतीय भोजन की थाली में दाल का स्थान बेहद महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है। हमारे घरों में रोजाना बनने वाली अरहर, मूंग, मसूर, उड़द और चना जैसी दालें प्रोटीन के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक कई दूसरे पोषक तत्व हासिल करने का सबसे सरल और सुलभ माध्यम हैं। लेकिन, हम दाल को किस तरीके से पकाते हैं और उसमें किन सामग्रियों का उपयोग करते हैं, इसका सीधा असर उसकी पौष्टिकता पर पड़ता है। इस समय देश में मनाए जा रहे ‘राष्ट्रीय पोषण माह’ के विशेष अवसर पर, आइए जानते हैं दाल पकाने के कुछ ऐसे आसान और प्रभावी तरीके जो आपके दैनिक भोजन को और अधिक सेहतमंद बना सकते हैं।
सब्जियों को शामिल करके बढ़ाएं दाल की पौष्टिकता
दाल के स्वाद और सेहत से जुड़े फायदों को कई गुना बढ़ाने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे पकाते समय इसमें अलग-अलग प्रकार की ताजी सब्जियां मिलाई जाएं। आप अपनी पसंद के अनुसार दाल में पालक, मेथी, लौकी, गाजर, टमाटर या सहजन यानी मुनगा की पत्तियां बारीक काटकर डाल सकते हैं। इन हरी और मौसमी सब्जियों को मिलाने से दाल में डाइटरी फाइबर, जरूरी विटामिन और मिनरल्स की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, पालक-मूंग दाल या लौकी-चना दाल जैसी पारंपरिक रेसिपी न केवल खाने के स्वाद को बदलती हैं, बल्कि एक ही कटोरी में आपके पूरे परिवार को कई प्रकार के जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्रदान करती हैं।
अलग-अलग अनाजों के साथ मिलाकर खाएं दाल
दाल से मिलने वाले पोषक तत्वों का शरीर में पूरा लाभ उठाने के लिए इसे विभिन्न अनाजों के साथ मिलाकर खाना एक बेहतरीन विकल्प है। भारतीय खानपान की परंपरा में दाल को चावल, रोटी या अन्य साबुत अनाजों के साथ परोसने का रिवाज सड़कों पुराना है और यह एक संपूर्ण संतुलित आहार का आधार बनता है। जब दाल को अनाजों के साथ खाया जाता है, तो यह शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करने में मदद करता है। अपने दैनिक भोजन को और अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए गेहूं के साथ-साथ बाजरा या ज्वार जैसे पारंपरिक साबुत अनाजों को भी अपनी थाली का हिस्सा बनाने का प्रयास करें।
तड़के में तेल और घी की मात्रा रखें बेहद सीमित
अक्सर दाल के स्वाद को बढ़ाने के लिए लोग उसमें भारी तड़का या छौंक लगाते हैं, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में तेल या घी का उपयोग किया जाता है। हालांकि, दाल को स्वादिष्ट बनाने के लिए बहुत ज्यादा चिकनाई की आवश्यकता नहीं होती है। अधिक तेल-घी के उपयोग से दाल में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसकी जगह आप जीरा, बारीक कटा लहसुन, हींग, ताजी करी पत्ती या सूखी लाल मिर्च जैसे खुशबूदार मसालों का उपयोग करके बेहद कम तेल या घी में भी शानदार तड़का तैयार कर सकते हैं। इससे दाल का पारंपरिक स्वाद भी बरकरार रहेगा और आप अनावश्यक कैलोरी के सेवन से भी बच जाएंगे।
अच्छी तरह धोना और जरूरत के अनुसार भिगोना है जरूरी
दाल को पकाने से पहले की जाने वाली तैयारी भी उसकी गुणवत्ता और पाचन क्षमता को प्रभावित करती है। सबसे पहले दाल को साफ पानी से दो-तीन बार अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है ताकि उस पर लगी धूल-मिट्टी साफ हो सके। इसके अलावा, कुछ प्रकार की सख्त दालों को पकाने से पहले थोड़ी देर के लिए पानी में भिगोकर रखना बेहद फायदेमंद होता है। भिगोने से न केवल दाल जल्दी पकती है, बल्कि कुछ लोगों को इसे पचाने में भी आसानी होती है और पेट फूलने जैसी समस्या नहीं होती। हालांकि, सभी प्रकार की दालों को भिगोने की जरूरत नहीं होती है; यह पूरी तरह से दाल की किस्म और आपके पकाने के तरीके पर निर्भर करता है।
नींबू का रस और हरा धनिया मिलाकर बढ़ाएं आयरन का अवशोषण
जब दाल पूरी तरह से पककर तैयार हो जाए, तो उसमें नींबू का रस, ताजा कटा हुआ हरा धनिया या अन्य ताजी जड़ी-बूटियां मिलाना एक बेहद समझदारी भरा कदम है। दालों में प्राकृतिक रूप से आयरन मौजूद होता है, लेकिन पौधों से मिलने वाले इस आयरन को हमारा शरीर आसानी से सोख नहीं पाता है। वैज्ञानिक रूप से, विटामिन C एक ऐसा तत्व है जो शरीर को इस आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है। इसलिए, जब आप अपनी पकी हुई दाल में नींबू का रस या टमाटर जैसी विटामिन C से भरपूर चीजें मिलाते हैं, तो इससे न केवल दाल का स्वाद चटपटा और ताजा हो जाता है, बल्कि आपके शरीर को उसका पूरा आयरन भी मिल पाता है।



















