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गुड़ और सौंफ की महक वाला गुलगुला, बघेलखंड की मिठास घर पर बनाने का आसान देसी तरीकाखानपान
18 जून 2026, 7:36 am (45 दिन पहले)· 2

गुड़ और सौंफ की महक वाला गुलगुला, बघेलखंड की मिठास घर पर बनाने का आसान देसी तरीका

बघेलखंड का पारंपरिक मीठा पकवान गुलगुला गुड़, गेहूं के आटे और सौंफ से कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है। जानिए मुलायम और जालीदार गुलगुले बनाने की पूरी विधि।

बघेलखंड की पहचान सिर्फ उसकी बोली, लोकगीतों और संस्कृति में ही नहीं बसती, यहां की रसोई भी इस इलाके की मिठास को आगे बढ़ाती है। यहां के पारंपरिक पकवान लोगों के मन में खास जगह रखते हैं और इन्हीं में से एक है गुलगुला, जिसे कई घरों में मीठा पुआ के नाम से भी पुकारा जाता है। गुड़, गेहूं के आटे और सौंफ से बनने वाला यह व्यंजन गांव की चौखट से लेकर शहर की रसोई तक आज भी उतने ही चाव से खाया जाता है।

इसकी सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसे बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता और सामग्री भी बेहद मामूली होती है, फिर भी स्वाद किसी बड़ी मिठाई से कम नहीं रहता। शाम की चाय के साथ हो, त्योहार का मौका हो या घर में कोई छोटा सा शुभ कार्य, कड़ाही से उठती गुलगुले की खुशबू पूरे माहौल को मीठा कर देती है।

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परंपरा से जुड़ा स्वाद

बघेलखंड के घरों में गुलगुला महज एक पकवान नहीं, बल्कि परंपरा का हिस्सा माना जाता है। बरसों से घर की महिलाएं इसे अपने हाथों से बनाती आ रही हैं। गुड़ की प्राकृतिक मिठास और सौंफ की खुशबू मिलकर इसे ऐसा स्वाद देती हैं जो दूसरे किसी व्यंजन में मुश्किल से मिलता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी मेहमानों के स्वागत और पारिवारिक आयोजनों में गुलगुले बनाए जाते हैं, और यही वजह है कि नई पीढ़ी भी इस पुराने स्वाद से जुड़ी हुई है।

मुलायम गुलगुले की पूरी विधि

TrendKia से बातचीत में सतना निवासी मीना द्विवेदी ने बताया कि स्वादिष्ट और मुलायम गुलगुले बनाने की शुरुआत गुड़ के घोल से होती है। सबसे पहले एक कप गुड़ को डेढ़ कप गुनगुने पानी में अच्छी तरह घोल लें और फिर इस घोल को छानकर ठंडा होने के लिए अलग रख दें।

इसके बाद दो कप गेहूं के आटे में एक चम्मच सौंफ और एक चौथाई चम्मच इलायची पाउडर मिला लें। अब धीरे-धीरे गुड़ का पानी डालते हुए पकौड़े जैसा गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रहे कि घोल में कहीं भी गुठलियां न रह जाएं। घोल बन जाने के बाद इसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें, ताकि यह अच्छी तरह फूल जाए।

तलने का सही तरीका

तलने से ठीक पहले घोल में एक चुटकी बेकिंग सोडा डालकर उसे अच्छी तरह फेंट लेना चाहिए। अब कड़ाही में तेल या घी मध्यम आंच पर गर्म करें। हाथों को हल्का गीला करके उंगलियों की मदद से घोल को छोटी-छोटी बॉल्स के रूप में तेल में छोड़ते जाएं। इन्हें मध्यम आंच पर लगातार अलट-पलट करते हुए करीब पांच से छह मिनट तक तलें। जब इनका रंग सुनहरा और गहरा भूरा हो जाए, तब इन्हें कड़ाही से बाहर निकाल लें। इस तरीके से बने गुलगुले बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम तथा जालीदार बनते हैं।

जन्मदिन और मांगलिक अवसरों की रवायत

एक दौर ऐसा भी था जब विंध्य क्षेत्र में केक काटने का चलन नहीं था। उस समय बच्चों के जन्मदिन, नामकरण, पूजा-पाठ और दूसरे मांगलिक मौकों पर सबसे पहले गुलगुले ही बनाए जाते थे। बुजुर्गों का मानना था कि घर में मीठा बनने और कड़ाही चढ़ने से सुख-समृद्धि आती है।

समय के साथ खान-पान की आदतें भले बदल गई हों, लेकिन बघेलखंड में गुलगुले का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और खास मौकों पर इसकी मौजूदगी अब भी देखने को मिलती है। बघेली लोकगीतों और लोक-संस्कृति में भी इसका जिक्र मिलता है। शायद यही कारण है कि गुलगुला आज भी लोगों को उनके बचपन, गांव और पुरानी परंपराओं की मीठी यादों से जोड़ देता है।

सवाल-जवाब

गुलगुला बनाने में कौन सी मुख्य सामग्री लगती है?
गुलगुला बनाने के लिए मुख्य रूप से गुड़, गेहूं का आटा और सौंफ की जरूरत होती है, साथ ही इलायची पाउडर और एक चुटकी बेकिंग सोडा भी डाला जाता है।
घोल को कितनी देर रखना चाहिए?
घोल तैयार करने के बाद उसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रखना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह फूल जाए।
गुलगुले को कितनी देर तलना चाहिए?
गुलगुलों को मध्यम आंच पर लगातार अलट-पलट करते हुए करीब पांच से छह मिनट तक, सुनहरा और गहरा भूरा होने तक तलना चाहिए।
गुलगुले का बघेलखंड में क्या महत्व है?
पहले विंध्य क्षेत्र में केक काटने का चलन न होने पर जन्मदिन, नामकरण और पूजा जैसे मांगलिक अवसरों पर सबसे पहले गुलगुले बनाए जाते थे, और इन्हें सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता था।
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