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हौज खास की एक पुरानी इमारत, बाहर नंदी की मूर्ति और भीतर परोसा जाता है शानदार साउथ इंडियन जायकाखानपान
24 जून 2026, 1:29 pm (81 दिन पहले)· 2

हौज खास की एक पुरानी इमारत, बाहर नंदी की मूर्ति और भीतर परोसा जाता है शानदार साउथ इंडियन जायका

दिल्ली के हौज खास विलेज में नैवेद्यम नाम का एक रेस्टोरेंट बाहर से किसी शिव मंदिर जैसा दिखता है, लेकिन अंदर पूरी तरह वेजिटेरियन साउथ इंडियन खाना परोसा जाता है, वो भी पीतल, तांबे और स्टील के बर्तनों में.

दिल्ली के हौज खास विलेज में एक ऐसा रेस्टोरेंट है जिसे पहली नजर में देखकर कोई भी इसे मंदिर समझ बैठेगा. इसका नाम है नैवेद्यम. यह नाम अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि नैवेद्यम का मतलब होता है वह भोजन जो ईश्वर या किसी आदरणीय को अर्पित किया जाता है. सनातन धर्म में पूजा के समय देवी-देवताओं को फल, मिठाई या पका हुआ भोजन यानी भोग चढ़ाया जाता है, इसी को नैवेद्य कहते हैं, और देवता के स्वीकार कर लेने के बाद यही प्रसाद बन जाता है. इसी वजह से इस रेस्टोरेंट का नाम लोगों को बहुत अनोखा लगता है.

बाहर से मंदिर, अंदर से रेस्टोरेंट

हौज खास विलेज में घुसते ही यह जगह आपको एक पुरानी सी इमारत के भीतर दिखाई देगी. इमारत इतनी पुरानी है कि पहली नजर में लगेगा जैसे कोई बंद पड़ा हुआ भवन हो. लेकिन बाहर नजर डालते ही आपको भोलेनाथ की सवारी और उनके सारथी माने जाने वाले नंदी बैठे हुए दिख जाएंगे. नंदी की मूर्ति पर फूल और पत्तियां चढ़ी होती हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो किसी ने अभी-अभी पूजा की हो. यह सब देखकर हर किसी को यही भ्रम होता है कि अंदर कोई मंदिर होगा.

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दरवाजे के अंदर कदम रखते ही यह भ्रम टूट जाता है. यहां कोई मंदिर नहीं, बल्कि सचमुच का रेस्टोरेंट है. सुंदर मेज-कुर्सियां सजी हैं, बहुत हल्की रोशनी जल रही होती है और कोई म्यूजिक नहीं बजता. इसके बावजूद माहौल किसी लग्जरी रेस्टोरेंट जैसा महसूस होता है. पूरी जगह को साउथ इंडियन थीम पर तैयार किया गया है, और यहां खाने ज्यादातर वही लोग पहुंचते हैं जिन्हें साउथ इंडियन स्वाद पसंद है.

जेब पर भारी नहीं पड़ता खाना

इस रेस्टोरेंट की एक बड़ी खूबी यह है कि यहां खाना-पीना बहुत महंगा नहीं है. इडली, सांभर और डोसा की कीमत महज 100 रुपए से शुरू होती है. वहीं अगर आप आइसक्रीम के साथ फ्रूट चाट लेना चाहें तो वह 200 रुपए में मिल जाएगी, और स्वाद ऐसा कि पूरा पैसा वसूल लगे. इतना ही नहीं, यहां नारियल पानी और बादाम मिल्क से लेकर कोल्ड कॉफी तक का इंतजाम है.

देवी-देवताओं की मूर्तियों के बीच भोजन

रेस्टोरेंट के अंदर भी आपको देवी-देवताओं की मूर्तियां और पोस्टर लगे मिलेंगे. कहीं भगवान श्रीकृष्ण गायों के बीच नजर आते हैं तो कहीं तिरुपति बालाजी के दर्शन का मौका मिलता है. पूरी जगह भगवान की प्रतिमाओं और पोस्टरों से घिरी हुई है. सबसे खास बात यह है कि यहां पूरी तरह शाकाहारी खाना ही मिलता है, नॉनवेज बिल्कुल नहीं परोसा जाता.

प्लास्टिक नहीं, धातु के बर्तनों में परोसा खाना

आज जहां ज्यादातर रेस्टोरेंट में डिस्पोजल बर्तन और प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जो सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है, वहीं इस रेस्टोरेंट में सब कुछ पीतल, तांबे और स्टील के बर्तनों में दिया जाता है. इससे खाने का स्वाद तो बढ़ता ही है, साथ ही यह सेहत के लिए भी अच्छा रहता है और इसमें किसी तरह का कोई केमिकल भी नहीं होता.

सवाल-जवाब

नैवेद्यम रेस्टोरेंट कहां है?
यह रेस्टोरेंट दिल्ली के हौज खास विलेज में एक पुरानी इमारत के अंदर स्थित है.
नैवेद्यम नाम का मतलब क्या है?
नैवेद्यम का अर्थ है वह भोजन जो ईश्वर या किसी आदरणीय को अर्पित किया जाता है, जिसे सनातन धर्म में नैवेद्य कहते हैं.
यह रेस्टोरेंट बाहर से मंदिर जैसा क्यों लगता है?
इसकी इमारत के बाहर भगवान शिव की सवारी माने जाने वाले नंदी की मूर्ति है, जिस पर फूल और पत्तियां चढ़ी होती हैं, इसलिए यह मंदिर जैसा दिखता है.
यहां खाने की कीमत कितनी है?
इडली, सांभर और डोसा 100 रुपए से शुरू होते हैं, जबकि आइसक्रीम के साथ फ्रूट चाट 200 रुपए की मिलती है.
क्या यहां नॉनवेज खाना मिलता है?
नहीं, यहां पूरी तरह शाकाहारी खाना ही परोसा जाता है, नॉनवेज बिल्कुल नहीं मिलता.
खाना किन बर्तनों में परोसा जाता है?
यहां प्लास्टिक या डिस्पोजल की जगह पीतल, तांबे और स्टील के बर्तनों में खाना दिया जाता है.
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