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झुमरी तिलैया की गुड़-गेहूं वाली झिल्लियां मिठाई आज भी बच्चों की पहली पसंदखानपान
3 जुल॰ 2026, 5:49 am (119 दिन पहले)· 4

झुमरी तिलैया की गुड़-गेहूं वाली झिल्लियां मिठाई आज भी बच्चों की पहली पसंद

कोडरमा के झुमरी तिलैया में तुलसी प्रसाद वर्मा 1988 से गुड़ और गेहूं के आटे से झिल्लियां मिठाई बना रहे हैं, जो आज भी सौ रुपये प्रति किलो में बिकती है और 15 से 20 दिन तक खराब नहीं होती।

झारखंड के कोडरमा जिले में आज भी एक पुरानी देसी मिठाई का जलवा कम नहीं हुआ है। बाजार में कलाकंद, मलाई चॉप और तरह-तरह के पैकेज्ड स्नैक्स भरे पड़े हैं, फिर भी झिल्लियां मिठाई अपनी अलग पहचान के साथ लोगों की पसंद बनी हुई है। करीब चार दशक बीत जाने के बावजूद इस मिठाई का क्रेज जरा भी कम नहीं हुआ है। बच्चे हों या बड़े, सब इसे बड़े चाव से खाते हैं और कोडरमा से बाहर जाने वाले लोग इसे साथ ले जाना नहीं भूलते।

झुमरी तिलैया में चार दशक से एक ही दुकान, एक ही स्वाद

झुमरी तिलैया के राजगढ़िया मोड़ के पास साल 1988 से झिल्लियां मिठाई बनाकर बेच रहे दुकान संचालक तुलसी प्रसाद वर्मा बताते हैं कि यह मिठाई सिर्फ स्वाद की वजह से नहीं, बल्कि इसके पौष्टिक गुणों के कारण भी लोगों में मशहूर है। उनका कहना है कि वक्त के साथ कई पारंपरिक पकवान और मिठाइयां लोगों की पसंद से गायब होती जा रही हैं, लेकिन झिल्लियां मिठाई का स्वाद आज भी वैसा ही बना हुआ है। उनके मुताबिक इस मिठाई की सबसे खास बात यह है कि यह भूख मिटाने के साथ-साथ शरीर को ऊर्जा भी देती है।

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कैसे तैयार होती है यह कुरकुरी मिठाई

तुलसी प्रसाद वर्मा के अनुसार झिल्लियां मिठाई बनाने का तरीका काफी सीधा है। सबसे पहले गेहूं के आटे में पानी और थोड़ा सा रिफाइंड तेल मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंधा जाता है। इसके बाद इस आटे को करीब एक इंच लंबे टुकड़ों का आकार देकर गर्म तेल में सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है। इसके बाद गुड़ की गाढ़ी चाशनी तैयार कर इन तले हुए टुकड़ों को उसमें डुबोया जाता है। आखिर में ऊपर से हल्का सूखा आटा छिड़ककर गुड़ की परत को सख्त कर दिया जाता है, जिससे मिठाई का स्वाद और बनावट दोनों और निखर जाते हैं। इसे बनाने में मुख्य रूप से गेहूं का आटा, गुड़ और थोड़ी मात्रा में रिफाइंड तेल ही इस्तेमाल होता है। किसी तरह के कृत्रिम रंग, फ्लेवर या रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे यह बाजार की बाकी मिठाइयों के मुकाबले ज्यादा प्राकृतिक और सेहतमंद मानी जाती है।

बच्चों की पसंदीदा, सेहत का भी रखती है ख्याल

यह मिठाई खासतौर पर बच्चों को बहुत पसंद है। इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। गेहूं और गुड़ से बनी होने के चलते इससे बच्चों को पोषण भी मिलता है। गुड़ में मौजूद आयरन और खनिज तत्व तथा गेहूं के पोषक गुण इसे एक पारंपरिक और सेहतमंद मिठाई बनाते हैं।

15 से 20 दिन तक खराब नहीं होती, बाहर ले जाना आसान

तुलसी प्रसाद वर्मा बताते हैं कि झिल्लियां मिठाई सामान्य तापमान पर 15 से 20 दिनों तक आराम से सुरक्षित रहती है। इसमें किसी तरह का रस या नमी नहीं होने के कारण इसे पैक करके कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। यही वजह है कि कोडरमा से बाहर रहने वाले लोग जब भी यहां आते हैं तो इस मिठाई को अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। फिलहाल बाजार में इसकी कीमत सौ रुपये प्रति किलो है।

सवाल-जवाब

झिल्लियां मिठाई कहां मिलती है?
यह मिठाई कोडरमा के झुमरी तिलैया स्थित राजगढ़िया मोड़ के पास मिलती है, जहां तुलसी प्रसाद वर्मा 1988 से इसे बना और बेच रहे हैं।
झिल्लियां मिठाई किन चीजों से बनती है?
इसे गेहूं के आटे, गुड़ और थोड़ी मात्रा में रिफाइंड तेल से बनाया जाता है, इसमें कोई कृत्रिम रंग, फ्लेवर या रसायन नहीं मिलाया जाता।
यह मिठाई कितने दिनों तक खराब नहीं होती?
सामान्य तापमान पर यह मिठाई 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रहती है।
झिल्लियां मिठाई की कीमत क्या है?
फिलहाल इसकी कीमत सौ रुपये प्रति किलो है।
यह मिठाई बच्चों को इतनी पसंद क्यों है?
इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों को आकर्षित करता है और गेहूं-गुड़ से बनी होने के चलते उन्हें पोषण भी मिलता है।
यह मिठाई कब से बनाई जा रही है?
तुलसी प्रसाद वर्मा 1988 से, यानी करीब चार दशकों से यह मिठाई बना रहे हैं।
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