करवाचौथ के पावन पर्व पर पूजन की थाली बिना किसी खास मिष्ठान के पूरी नहीं मानी जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन पूरे समर्पण के साथ निर्जला उपवास रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन व अर्घ्य देने के उपरांत ही अन्न-जल ग्रहण करती हैं। ऐसे खास अवसर पर व्रत के समापन और मुंह मीठा कराने के लिए हर परिवार किसी शुद्ध, पौष्टिक और विशेष पकवान की तलाश में रहता है। त्योहारी भीड़भाड़ के समय बाजार में बिकने वाली मिठाइयों में मावे और चीनी की मिलावट सेहत के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। ऐसे में बाजार के अशुद्ध विकल्पों पर निर्भर रहने के बजाय रसोई में मौजूद सामान्य सामग्रियों से शुद्ध दूध पेड़ा तैयार करना सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होता है।
बिना झंझट और बिना घंटों मावा भूने तैयार होती है यह मिठाई
घर में पारंपरिक मिठाइयां तैयार करने को अक्सर बहुत समय लेने वाला और थकाऊ काम समझा जाता है। पारंपरिक विधि में घंटों दूध को कड़ाही में औटाना और मावा भूनना पड़ता है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं होता। यह आसान तरीका बिना किसी लंबी तैयारी के हलवाई जैसी बनावट और मुंह में घुल जाने वाली कोमलता प्रदान करता है। केवल तीन मूलभूत सामग्रियों के सटीक अनुपात से रसोई में कुछ ही मिनटों के भीतर यह पारंपरिक मिष्ठान बनकर तैयार हो जाता है। इसमें न तो अतिरिक्त समय खर्च होता है और न ही किसी जटिल विधि का पालन करना पड़ता है।
पेड़ा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री का माप
इस स्वादिष्ट मिष्ठान को बनाने के लिए सामग्री की सटीक मात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। आपको दो कप दूध का पाउडर लेना होगा। इसके साथ एक कप सामान्य या पहले से उबला हुआ दूध चाहिए। कड़ाही में चिकनाई और स्वाद के लिए दो से तीन चम्मच देशी घी की जरूरत होगी। मिठास जोड़ने के लिए आधा कप देशी खंड या पिसी हुई चीनी स्वादानुसार रखी जा सकती है। इसके अलावा, स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए चुटकी भर इलायची पाउडर तथा सजावट के लिए बारीक कतरे हुए पिस्ते या केसर के कुछ रेशों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
गैस जलाने से पहले घोल तैयार करने की पहली प्रक्रिया
पेड़े बनाने की शुरुआत करते समय सबसे पहले एक भारी तले का पैन या साफ कड़ाही लें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अभी चूल्हे की आंच बिल्कुल नहीं जलानी है। पैन के भीतर एक कप दूध, दो कप मिल्क पाउडर और दो चम्मच देशी घी एक साथ डाल दें। अब एक बड़े चम्मच अथवा स्पैचुला की मदद से इन सभी चीजों को लगातार तब तक फेंटते रहें, जब तक कि पाउडर पूरी तरह घुलकर एकसार न हो जाए। मिश्रण में किसी भी तरह की गांठ या लंप्स बाकी नहीं रहने चाहिए। जब घोल पूरी तरह रेशमी और चिकना दिखने लगे, केवल तभी पैन को आंच पर रखने की तैयारी करें।
धीमी आंच पर पकाने और मावेदार स्वरूप देने का तरीका
घोल के पूरी तरह चिकना हो जाने के बाद गैस जलाएं और पैन को सबसे धीमी आंच पर रखें। मिश्रण को लगातार बिना रुके चलाते रहना अनिवार्य है ताकि यह पैन के तले या किनारों पर बिल्कुल न लगे। आंच धीमी रहने पर चार से पांच मिनट के भीतर यह तरल मिश्रण गाढ़ा होना शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे यह रूप बदलकर कड़ाही के बीच में एक गाढ़े मावे का आकार लेने लगता है। जब यह मिश्रण कड़ाही की सतह को पूरी तरह छोड़ने लगे और बंधे हुए आटे की तरह सिमटने लगे, तो तुरंत गैस बंद कर दें। अब इसमें आधा कप पिसी चीनी या देशी खंड और थोड़ा सा इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह एकसार कर लें।
पेड़े को गोल आकार देने और सजाने की अंतिम विधि
चीनी मिलाने के बाद कड़ाही के मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, जिससे कि इसे हाथों से आसानी से छुआ जा सके, तब दोनों हाथों की हथेलियों पर हल्का सा देशी घी लगा लें। इसके बाद मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर गोल लोई बनाएं। हथेलियों के बीच घुमाते हुए इसे हल्का सा चपटा करें और अंगूठे से बीच में हल्का सा दबाव देकर पारंपरिक पेड़े का आकार उभारें। तैयार पेड़ों के ऊपर बारीक कतरे पिस्ते या केसर के धागे सजाएं। यह पूरी तरह शुद्ध और घर में तैयार मिठाई आपके त्योहार की मिठास को दोगुना कर देगी।


















